Class 8 Hindi Malhar Chapter 2 Do Gauraiya | दो गौरैया पाठ का सारांश एवं प्रश्नोत्तर

Sooraj Krishna Shastri
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दो गौरैया

द्वितीयः पाठः (पाठ २) — मल्हार (कक्षा ८)
  • १. पाठ का सारांश (कहानी का मूल कथानक एवं उद्देश्य)
  • २. लेखक-परिचय (भीष्म साहनी का जीवन एवं रचनाएँ)
  • ३. मेरी समझ से & मिलान करें (बहुविकल्पीय प्रश्न एवं स्तम्भ मिलान)
  • ४. पंक्तियों पर चर्चा & सोच-विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)
  • ५. भाषा की बात & व्याकरण (क्रियाविशेषण, हास्य-व्यंग्य एवं अर्थ-भेद)

पाठ का सारांश एवं लेखक-परिचय

पाठ का सारांश

'दो गौरैया' प्रसिद्ध साहित्यकार भीष्म साहनी द्वारा रचित एक हास्य-व्यंग्य एवं वात्सल्य से पूर्ण कहानी है। लेखक के घर में माँ, पिताजी और लेखक के अतिरिक्त अनेक जीव-जंतु (चूहे, बिल्ली, कबूतर, चमगादड़) पहले से रहते थे, जिससे पिताजी घर को 'सराय' कहते थे। एक दिन दो गौरैयाँ बैठक के पंखे पर घोंसला बनाकर रहने लगीं। पिताजी उन्हें लाठी से खदेड़ने, दरवाजे-रोशनदान बंद करने और घोंसला तोड़ने के अनेक प्रयास करते हैं, पर गौरैयाँ हर बार वापस आ जाती हैं। अंत में, जब पिताजी लाठी से घोंसला गिराने वाले होते हैं, तभी घोंसले में से दो नन्हें बच्चों की 'चीं-चीं' सुन पड़ती है। उनके असहाय बच्चों और माता-पिता के वात्सल्य को देखकर पिताजी का कठोर हृदय पिघल जाता है। वे लाठी रख देते हैं और माँ सारे दरवाजे खोल देती हैं। कहानी मनुष्य और पक्षियों के बीच सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता का सुंदर संदेश देती है।

लेखक-परिचय (भीष्म साहनी)

भीष्म साहनी (1915–2003) हिंदी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों व उपन्यासों में मानवीय मूल्यों और सामाजिक संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'तमस' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया। बच्चों के लिए उन्होंने 'गुलेल का खेल' जैसी कई चर्चित कहानियाँ लिखी हैं।

अभ्यास-कार्यम् : मेरी समझ से

(१) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—
उत्तर: घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
(२) कहानी में 'घर के असली मालिक' किसे कहा गया है?
उत्तर: जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
(३) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
उत्तर: पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
(४) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
उत्तर: माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे तथा माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से न भगाई जाएँ।
(५) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
उत्तर: अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।

मिलकर करें मिलान (वाक्य एवं उपयुक्त अर्थ)

क्रम वाक्य उपयुक्त अर्थ
१. वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था।
२. आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
३. वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
४. वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
५. पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
६. इतने में रात पड़ गई। कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
७. वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों।

अभ्यास-कार्यम् : सोच-विचार एवं प्रश्नोत्तर

(क) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर: गौरैयों ने अपना घोंसला बैठक की छत में लगे पंखे के गोले के ऊपर बनाया। उन्होंने सुरक्षित और ऊँचा स्थान होने के कारण घोंसला वहीं बनाया होगा।
(ख) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्त्व समझते हैं?
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षी भी अपने बच्चों, सुरक्षा और आश्रय के महत्त्व को समझते हैं। कहानी में गौरैयों का बार-बार अपने तिनकों और बच्चों के पास लौटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
(ग) "अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।" इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: इससे पिताजी का हठीलापन, दृढ़ निश्चयी होना और अपनी बात पर अड़े रहने का स्वभाव प्रकट होता है।
(घ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
उत्तर: जब पिताजी लाठी से घोंसले के तिनके खींचने लगे, तब गौरैयाँ दीवार पर चुपचाप और उदास बैठ गईं। उनका चहकना बंद हो गया क्योंकि उन्हें अपने बच्चों व घोंसले के नष्ट होने का डर था।
(ङ) कहानी में गौरैयों ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था?
उत्तर: गौरैयों ने खुले दरवाजों से, बंद दरवाजों के नीचे की खाली जगह से और रोशनदान के टूटे हुए शीशे से प्रवेश किया था।
(च) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर: इस कहानी को भीष्म साहनी (बालक/लेखक) सुना रहे हैं। यह "घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं— माँ, पिताजी और मैं" वाक्य से स्पष्ट होता है।

भाषा की बात (व्याकरण एवं शब्द-ज्ञान)

(क) क्रियाविशेषण शब्द प्रयोग

झिड़ककर: पिताजी ने मुझे झिड़ककर कमरे से बाहर भेज दिया।

गंभीरता से: माँ ने गंभीरता से बात सुनकर समाधान बताया।

गुस्से से: उसने गुस्से से लाठी उठाकर जमीन पर पटक दी।

अन्य उदाहरण: बालक सहमकर कोने में बैठ गया | उसने चिल्लाकर मदद माँगी | उसने फुसफुसाते हुए कान में बात कही।

(ख) हेर-फेर मात्रा का (मात्रा परिवर्तन से अर्थ-भेद)

नाच - नाचा - नचा: (नृत्य / नाचना / नचाना)

हार - हरा - हारा: (पराजय या माला / हरा रंग / पराजित हुआ)

पिता - पीता: (जनक / जल ग्रहण करना)

चूक - चुक: (भूल होना / समाप्त होना)

नीचा - नीचे: (निम्न स्तर / धरातल पर)

सहसा - साहस: (अचानक / हिम्मत)

(ग) घर के प्राणी एवं मानवीय व्यवहार

बिल्ली: मन आया तो दूध पी गई, न मन आया तो 'फिर आऊँगी' कहकर चली जाती है।

चूहा: एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठता है मानो बूढ़ा हो; दूसरा बाथरूम की टंकी पर बैठता है मानो गरमी लगती हो।

चमगादड़: शाम होते ही कमरों के आर-पार कसरत करने लगते हैं।

कबूतर: दिन-भर 'गुटर गूँ' का संगीत सुनाते हैं।

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