उभयपदी 'कृ' धातु (करना)
तनादि गण की सबसे प्रमुख धातु। यह उभयपदी है, अर्थात् इसके रूप परस्मैपदी (करोति) और आत्मनेपदी (कुरुते) दोनों में चलते हैं। 'कृ' धातु के रूप प्रायः सभी परीक्षाओं और संस्कृत साहित्य में अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
💡 'कृ' धातु के विशिष्ट नियम (V.V.Imp)
• तनादि गण की धातु होने के कारण यहाँ 'उ' विकरण होता है (कृ + उ)।
• लट् आदि लकारों में गुण होकर 'करोति' तथा उकार का लोप/परिवर्तन होकर 'कुरुतः', 'कुर्वन्ति' जैसे विविध रूप बनते हैं।
• लुङ् लकार (भूतकाल) में परस्मैपदी में 'अकार्षीत्' और आत्मनेपदी में 'अकृत' जैसे अत्यंत विशिष्ट रूप बनते हैं, जिन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | करोति | कुरुतः | कुर्वन्ति |
| मध्यम पुरुष | करोषि | कुरुथः | कुरुथ |
| उत्तम पुरुष | करोमि | कुर्वः | कुर्मः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कुरुते | कुर्वाते | कुर्वते |
| मध्यम पुरुष | कुरुषे | कुर्वाथे | कुरुध्वे |
| उत्तम पुरुष | कुर्वे | कुर्वहे | कुर्महे |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | करिष्यति | करिष्यतः | करिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | करिष्यसि | करिष्यथः | करिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | करिष्यामि | करिष्यावः | करिष्यामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | करिष्यते | करिष्येते | करिष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | करिष्यसे | करिष्येथे | करिष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | करिष्ये | करिष्यावहे | करिष्यामहे |
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | करोतु / कुरुतात् | कुरुताम् | कुर्वन्तु |
| मध्यम पुरुष | कुरु / कुरुतात् | कुरुतम् | कुरुत |
| उत्तम पुरुष | करवाणि | करवाव | करवाम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कुरुताम् | कुर्वाताम् | कुर्वन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | कुरुष्व | कुर्वाथाम् | कुरुध्वम् |
| उत्तम पुरुष | करवै | करवावहै | करवामहै |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकरोत् | अकुरुताम् | अकुर्वन् |
| मध्यम पुरुष | अकरोः | अकुरुतम् | अकुरुत |
| उत्तम पुरुष | अकरवम् | अकुर्व | अकुर्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकुरुत | अकुर्वाताम् | अकुर्वत |
| मध्यम पुरुष | अकुरुथाः | अकुर्वाथाम् | अकुरुध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अकुर्वि | अकुर्वहि | अकुर्महि |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कुर्यात् | कुर्याताम् | कुर्युः |
| मध्यम पुरुष | कुर्याः | कुर्यातम् | कुर्यात |
| उत्तम पुरुष | कुर्याम् | कुर्याव | कुर्याम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कुर्वीत | कुर्वीयाताम् | कुर्वीरन् |
| मध्यम पुरुष | कुर्वीथाः | कुर्वीयाथाम् | कुर्वीध्वम् |
| उत्तम पुरुष | कुर्वीय | कुर्वीवहि | कुर्वीमहि |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | चकार | चक्रतुः | चक्रुः |
| मध्यम पुरुष | चकर्थ | चक्रथुः | चक्र |
| उत्तम पुरुष | चकार / चकर | चकृव | चकृम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | चक्रे | चक्राते | चक्रिरे |
| मध्यम पुरुष | चकृषे | चक्राथे | चकृध्वे / चकृढ्वे |
| उत्तम पुरुष | चक्रे | चकृवहे | चकृमहे |
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कर्ता | कर्तारौ | कर्तारः |
| मध्यम पुरुष | कर्तासि | कर्तास्थः | कर्तास्थ |
| उत्तम पुरुष | कर्तास्मि | कर्तास्वः | कर्तास्मः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कर्ता | कर्तारौ | कर्तारः |
| मध्यम पुरुष | कर्तासे | कर्तासाथे | कर्ताध्वे |
| उत्तम पुरुष | कर्ताहे | कर्तास्वहे | कर्तास्महे |
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | क्रियात् | क्रियास्ताम् | क्रियासुः |
| मध्यम पुरुष | क्रियाः | क्रियास्तम् | क्रियास्त |
| उत्तम पुरुष | क्रियासम् | क्रियास्व | क्रियास्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | कृषीष्ट | कृषीयास्ताम् | कृषीरन् |
| मध्यम पुरुष | कृषीष्ठाः | कृषीयाथाम् | कृषीध्वम् |
| उत्तम पुरुष | कृषीय | कृषीवहि | कृषीमहि |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकार्षीत् | अकार्ष्टाम् | अकार्षुः |
| मध्यम पुरुष | अकार्षीः | अकार्ष्टम् | अकार्ष्ट |
| उत्तम पुरुष | अकार्षम् | अकार्ष्व | अकार्ष्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकृत | अकृषाताम् | अकृषत |
| मध्यम पुरुष | अकृथाः | अकृषाथाम् | अकृध्वम् / अकृढ्वम् |
| उत्तम पुरुष | अकृषि | अकृष्वहि | अकृष्महि |
💡 विशेष (लुङ्): यह कृ धातु का सबसे जटिल लकार है। परस्मैपदी में वृद्धि और सिच् होकर 'अकार्षीत्' बनता है, जबकि आत्मनेपदी में सिच् का विकल्प से लोप/परिवर्तन होकर सीधा 'अकृत' (उसने किया) बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकरिष्यत् | अकरिष्यताम् | अकरिष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अकरिष्यः | अकरिष्यतम् | अकरिष्यत |
| उत्तम पुरुष | अकरिष्यम् | अकरिष्याव | अकरिष्याम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अकरिष्यत | अकरिष्येताम् | अकरिष्यन्त |
| मध्यम पुरुष | अकरिष्यथाः | अकरिष्येथाम् | अकरिष्यध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अकरिष्ये | अकरिष्यावहि | अकरिष्यामहि |
