लभ् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Labh Dhatu Roop in Sanskrit
By -Sooraj Krishna Shastri
अगस्त 02, 2026
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लभ् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Labh Dhatu Roop in Sanskrit
आत्मनेपदी 'लभ्' धातु (प्राप्त करना / पाना)
भ्वादि गण की अत्यंत महत्वपूर्ण 'अनिट्' आत्मनेपदी धातु। इसके भविष्यत् और भूतकालिक रूपों (लप्स्यते, लब्धा, अलब्ध) में संधियों का अद्भुत प्रयोग देखने को मिलता है।
💡 अनिट् धातु होने का प्रभाव (V.V.Imp)
'लभ्' (डुलभष् प्राप्तौ) एक अनिट् धातु है, अर्थात् इसमें भविष्यत् आदि लकारों में 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता।
• लृट् लकार: 'लभ् + स्यते' होने पर 'भ्' को 'प्' (चर्त्व सन्धि) होकर रूप 'लप्स्यते' बनता है ('लभिष्यते' अशुद्ध है)।
• लुट्/लुङ् लकार: 'त' प्रत्यय के जुड़ने पर (लभ् + ता) जश्त्व और धत्व सन्धि के प्रभाव से 'भ् + त' मिलकर 'ब्ध' बन जाते हैं, जिससे रूप 'लब्धा' और 'अलब्ध' बनते हैं।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लभते
लभेते
लभन्ते
मध्यम पुरुष
लभसे
लभेथे
लभध्वे
उत्तम पुरुष
लभे
लभावहे
लभामहे
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लप्स्यते
लप्स्येते
लप्स्यन्ते
मध्यम पुरुष
लप्स्यसे
लप्स्येथे
लप्स्यध्वे
उत्तम पुरुष
लप्स्ये
लप्स्यावहे
लप्स्यामहे
💡 विशेष (लृट्): छात्र अक्सर 'लभिष्यते' लिखते हैं जो व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः गलत है। अनिट् होने से 'भ्' का 'प्' होकर शुद्ध रूप 'लप्स्यते' (वह प्राप्त करेगा) बनता है।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लभताम्
लभेताम्
लभन्ताम्
मध्यम पुरुष
लभस्व
लभेथाम्
लभध्वम्
उत्तम पुरुष
लभै
लभावहै
लभामहै
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
अलभत
अलभेताम्
अलभन्त
मध्यम पुरुष
अलभथाः
अलभेथाम्
अलभध्वम्
उत्तम पुरुष
अलभे
अलभावहि
अलभामहि
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लभेत
लभेयाताम्
लभेरन्
मध्यम पुरुष
लभेथाः
लभेयाथाम्
लभेध्वम्
उत्तम पुरुष
लभेय
लभेवहि
लभेमहि
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लेभे
लेभाते
लेभिरे
मध्यम पुरुष
लेभिषे
लेभाथे
लेभिध्वे
उत्तम पुरुष
लेभे
लेभिवहे
लेभिमहे
💡 विशेष (लिट्): 'लभ्' धातु में 'एत्वाभ्यासलोप' के कारण अभ्यास का लोप और 'अ' का 'ए' होकर रूप 'लेभे' बनता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लब्धा
लब्धारौ
लब्धारः
मध्यम पुरुष
लब्धासे
लब्धासाथे
लब्धाध्वे
उत्तम पुरुष
लब्धाहे
लब्धास्वहे
लब्धास्महे
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
लप्सीष्ट
लप्सीयास्ताम्
लप्सीरन्
मध्यम पुरुष
लप्सीष्ठाः
लप्सीयाथाम्
लप्सीध्वम्
उत्तम पुरुष
लप्सीय
लप्सीवहि
लप्सीमहि
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम पुरुष
अलब्ध
अलप्साताम्
अलप्सत
मध्यम पुरुष
अलब्धाः
अलप्साथाम्
अलब्ध्वम्
उत्तम पुरुष
अलप्सि
अलप्स्वहि
अलप्स्महि
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण लकार है। अनिट् होने से 'सिच्' प्रत्यय लगता है, लेकिन झल् (भ्) के बाद झल् (त) आने से 'सिच्' (स्) का लोप हो जाता है। परिणामतः 'अ + लभ् + त' मिलकर 'अलब्ध' बनते हैं। 'अलभत' (लङ्) और 'अलब्ध' (लुङ्) के भेद को ध्यान में रखें।