लभ् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Labh Dhatu Roop in Sanskrit

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
लभ् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Labh Dhatu Roop in Sanskrit

आत्मनेपदी 'लभ्' धातु (प्राप्त करना / पाना)

भ्वादि गण की अत्यंत महत्वपूर्ण 'अनिट्' आत्मनेपदी धातु। इसके भविष्यत् और भूतकालिक रूपों (लप्स्यते, लब्धा, अलब्ध) में संधियों का अद्भुत प्रयोग देखने को मिलता है।

💡 अनिट् धातु होने का प्रभाव (V.V.Imp)

'लभ्' (डुलभष् प्राप्तौ) एक अनिट् धातु है, अर्थात् इसमें भविष्यत् आदि लकारों में 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता।
लृट् लकार: 'लभ् + स्यते' होने पर 'भ्' को 'प्' (चर्त्व सन्धि) होकर रूप 'लप्स्यते' बनता है ('लभिष्यते' अशुद्ध है)।
लुट्/लुङ् लकार: 'त' प्रत्यय के जुड़ने पर (लभ् + ता) जश्त्व और धत्व सन्धि के प्रभाव से 'भ् + त' मिलकर 'ब्ध' बन जाते हैं, जिससे रूप 'लब्धा' और 'अलब्ध' बनते हैं।

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलभतेलभेतेलभन्ते
मध्यम पुरुषलभसेलभेथेलभध्वे
उत्तम पुरुषलभेलभावहेलभामहे

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलप्स्यतेलप्स्येतेलप्स्यन्ते
मध्यम पुरुषलप्स्यसेलप्स्येथेलप्स्यध्वे
उत्तम पुरुषलप्स्येलप्स्यावहेलप्स्यामहे
💡 विशेष (लृट्): छात्र अक्सर 'लभिष्यते' लिखते हैं जो व्याकरण की दृष्टि से पूर्णतः गलत है। अनिट् होने से 'भ्' का 'प्' होकर शुद्ध रूप 'लप्स्यते' (वह प्राप्त करेगा) बनता है।

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलभताम्लभेताम्लभन्ताम्
मध्यम पुरुषलभस्वलभेथाम्लभध्वम्
उत्तम पुरुषलभैलभावहैलभामहै

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअलभतअलभेताम्अलभन्त
मध्यम पुरुषअलभथाःअलभेथाम्अलभध्वम्
उत्तम पुरुषअलभेअलभावहिअलभामहि

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलभेतलभेयाताम्लभेरन्
मध्यम पुरुषलभेथाःलभेयाथाम्लभेध्वम्
उत्तम पुरुषलभेयलभेवहिलभेमहि

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलेभेलेभातेलेभिरे
मध्यम पुरुषलेभिषेलेभाथेलेभिध्वे
उत्तम पुरुषलेभेलेभिवहेलेभिमहे
💡 विशेष (लिट्): 'लभ्' धातु में 'एत्वाभ्यासलोप' के कारण अभ्यास का लोप और 'अ' का 'ए' होकर रूप 'लेभे' बनता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलब्धालब्धारौलब्धारः
मध्यम पुरुषलब्धासेलब्धासाथेलब्धाध्वे
उत्तम पुरुषलब्धाहेलब्धास्वहेलब्धास्महे

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषलप्सीष्टलप्सीयास्ताम्लप्सीरन्
मध्यम पुरुषलप्सीष्ठाःलप्सीयाथाम्लप्सीध्वम्
उत्तम पुरुषलप्सीयलप्सीवहिलप्सीमहि

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअलब्धअलप्साताम्अलप्सत
मध्यम पुरुषअलब्धाःअलप्साथाम्अलब्ध्वम्
उत्तम पुरुषअलप्सिअलप्स्वहिअलप्स्महि
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण लकार है। अनिट् होने से 'सिच्' प्रत्यय लगता है, लेकिन झल् (भ्) के बाद झल् (त) आने से 'सिच्' (स्) का लोप हो जाता है। परिणामतः 'अ + लभ् + त' मिलकर 'अलब्ध' बनते हैं। 'अलभत' (लङ्) और 'अलब्ध' (लुङ्) के भेद को ध्यान में रखें।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअलप्स्यतअलप्स्येताम्अलप्स्यन्त
मध्यम पुरुषअलप्स्यथाःअलप्स्येथाम्अलप्स्यध्वम्
उत्तम पुरुषअलप्स्येअलप्स्यावहिअलप्स्यामहि

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!