उभयपदी 'नी' धातु (ले जाना)
भ्वादि गण की प्रमुख धातु। यह उभयपदी है, अतः इसके रूप परस्मैपदी (नयति) और आत्मनेपदी (नयते) दोनों में चलते हैं। इसका प्रयोग 'ले जाना', 'प्राप्त करना' या 'मार्गदर्शन करना' अर्थ में होता है।
💡 'नी' ➔ 'नय्' बनने की प्रक्रिया (V.V.Imp)
• भ्वादि गण के 'शप्' (अ) विकरण के कारण 'नी' के इकार को गुण होकर 'ने' बन जाता है (सार्वधातुकार्धधातुकयोः सूत्र से)।
• तत्पश्चात् 'एच् + अ' होने पर 'एचोऽयवायावः' सूत्र से 'ने' के 'ए' को 'अय्' आदेश हो जाता है, जिससे मूल शब्द 'नय्' (नयति, नयते) बनता है।
• भविष्यत् काल (लृट्/लुट्) आदि आर्धधातुक लकारों में 'नी' को गुण 'ने' ही रहता है, इसलिए रूप नेष्यति और नेता बनते हैं (नयिष्यति नहीं)।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयति | नयतः | नयन्ति |
| मध्यम पुरुष | नयसि | नयथः | नयथ |
| उत्तम पुरुष | नयामि | नयावः | नयामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयते | नयेते | नयन्ते |
| मध्यम पुरुष | नयसे | नयेथे | नयध्वे |
| उत्तम पुरुष | नये | नयावहे | नयामहे |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नेष्यति | नेष्यतः | नेष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | नेष्यसि | नेष्यथः | नेष्यथ |
| उत्तम पुरुष | नेष्यामि | नेष्यावः | नेष्यामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नेष्यते | नेष्येते | नेष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | नेष्यसे | नेष्येथे | नेष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | नेष्ये | नेष्यावहे | नेष्यामहे |
💡 विशेष (लृट्): अनिट् धातु होने के कारण यहाँ 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता। 'नी' का गुण 'ने' होकर सीधे 'स्य' जुड़ता है जिससे 'नेष्यति' / 'नेष्यते' रूप बनते हैं।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयतु / नयतात् | नयताम् | नयन्तु |
| मध्यम पुरुष | नय / नयतात् | नयतम् | नयत |
| उत्तम पुरुष | नयानि | नयाव | नयाम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयताम् | नयेताम् | नयन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | नयस्व | नयेथाम् | नयध्वम् |
| उत्तम पुरुष | नयै | नयावहै | नयामहै |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनयत् | अनयताम् | अनयन् |
| मध्यम पुरुष | अनयः | अनयतम् | अनयत |
| उत्तम पुरुष | अनयम् | अनयाव | अनयाम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनयत | अनयेताम् | अनयन्त |
| मध्यम पुरुष | अनयथाः | अनयेथाम् | अनयध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अनये | अनयावहि | अनयामहि |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयेत् | नयेताम् | नयेयुः |
| मध्यम पुरुष | नयेः | नयेतम् | नयेत |
| उत्तम पुरुष | नयेयम् | नयेव | नयेम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नयेत | नयेयाताम् | नयेरन् |
| मध्यम पुरुष | नयेथाः | नयेयाथाम् | नयेध्वम् |
| उत्तम पुरुष | नयेय | नयेवहि | नयेमहि |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | निनाय | निन्यतुः | निन्युः |
| मध्यम पुरुष | निनेथ | निन्यथुः | निन्य |
| उत्तम पुरुष | निनाय / निनय | निन्यिव | निन्यिम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | निन्ये | निन्याते | निन्यिरे |
| मध्यम पुरुष | निन्यिषे | निन्याथे | निन्यिध्वे / निन्यिढ्वे |
| उत्तम पुरुष | निन्ये | निन्यिवहे | निन्यिमहे |
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन होकर (नी + नी) इकार को यण् सन्धि होकर 'निन्य' बन जाता है। परस्मैपदी प्रथम पुरुष एकवचन में वृद्धि होकर 'निनाय' तथा आत्मनेपदी में 'निन्ये' रूप निष्पन्न होता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नेता | नेतारौ | नेतारः |
| मध्यम पुरुष | नेतासि | नेतास्थः | नेतास्थ |
| उत्तम पुरुष | नेतास्मि | नेतास्वः | नेतास्मः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नेता | नेतारौ | नेतारः |
| मध्यम पुरुष | नेतासे | नेतासाथे | नेताध्वे |
| उत्तम पुरुष | नेताहे | नेतास्वहे | नेतास्महे |
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नीयात् | नीयास्ताम् | नीयासुः |
| मध्यम पुरुष | नीयाः | नीयास्तम् | नीयास्त |
| उत्तम पुरुष | नीयासम् | नीयास्व | नीयास्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | नेषीष्ट | नेषीयास्ताम् | नेषीरन् |
| मध्यम पुरुष | नेषीष्ठाः | नेषीयाथाम् | नेषीध्वम् |
| उत्तम पुरुष | नेषीय | नेषीवहि | नेषीमहि |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनैषीत् | अनैष्टाम् | अनैषुः |
| मध्यम पुरुष | अनैषीः | अनैष्टम् | अनैष्ट |
| उत्तम पुरुष | अनैषम् | अनैष्व | अनैष्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनेष्ट | अनेषाताम् | अनेषत |
| मध्यम पुरुष | अनेष्ठाः | अनेषाथाम् | अनेध्वम् / अनेढ्वम् |
| उत्तम पुरुष | अनेषि | अनेष्वहि | अनेष्महि |
💡 विशेष (लुङ्): लुङ् लकार में अडागम (अ) और सिच् प्रत्यय (ष्) होता है। परस्मैपदी में वृद्धि सन्धि होकर 'अनैषीत्' बनता है, जबकि आत्मनेपदी में केवल गुण होकर 'अनेष्ट' रूप सिद्ध होता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनेष्यत् | अनेष्यताम् | अनेष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अनेष्यः | अनेष्यतम् | अनेष्यत |
| उत्तम पुरुष | अनेष्यम् | अनेष्याव | अनेष्याम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अनेष्यत | अनेष्येताम् | अनेष्यन्त |
| मध्यम पुरुष | अनेष्यथाः | अनेष्येथाम् | अनेष्यध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अनेष्ये | अनेष्यावहि | अनेष्यामहि |
