Ahankar Ki Saza: घमंडी पीपल और दयालु आम के पेड़ की कहानी | Moral Story in Hindi

Sooraj Krishna Shastri
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अहंकार की सजा

"बड़े होने का अर्थ है- दूसरों के काम आना"

🌳 घमंड और विनम्रता

एक बहुत ही घना जंगल था। उस जंगल में पास-पास दो पेड़ खड़े थे—एक आम का पेड़ और एक पीपल का पेड़। एक दिन मधुमक्खियों का एक झुंड जंगल में रहने के लिए आया। उन्हें अपना छत्ता बनाने के लिए किसी घने और मजबूत पेड़ की तलाश थी।

रानी मधुमक्खी की नजर विशाल पीपल के पेड़ पर पड़ी। उसने विनम्रता से प्रार्थना की:

"हे पीपल भाई! क्या मैं आपके इस घने पेड़ की एक शाखा पर अपने परिवार का छत्ता बना लूँ?"

पीपल का पेड़ अपने आकार और छाया पर बहुत घमंड करता था। उसे किसी का भी आना पसंद नहीं था। उसने क्रोध में भरकर उत्तर दिया:

😡 पीपल का पेड़: "हटो यहाँ से! जाकर कहीं और अपना छत्ता बना लो। मुझे परेशान मत करो, मुझे अपनी शाखाओं पर किसी का बोझ पसंद नहीं।"

पास ही खड़ा आम का पेड़ यह सब देख रहा था। उसने पीपल को समझाने की कोशिश की:

🥭 आम का पेड़: "पीपल भाई! इन्हें छत्ता बना लेने दो। ये तुम्हारी शरण में आई हैं और तुम्हारी शाखाओं में सुरक्षित रहेंगी।"

लेकिन अहंकारी पीपल ने झिड़कते हुए कहा— "तुम अपना काम करो! अगर तुम्हें इतनी ही चिंता है, तो तुम ही इन्हें अपनी शाखा पर जगह क्यों नहीं दे देते?"

🐝 आम के पेड़ की उदारता

पीपल का रूखा व्यवहार देखकर आम के पेड़ ने रानी मधुमक्खी को आवाज दी और बड़े प्यार से कहा:

🥭 आम का पेड़: "हे रानी मक्खी! अगर तुम चाहो तो मेरी शाखा पर अपना छत्ता बना लो। यहाँ तुम और तुम्हारा परिवार सुरक्षित रहेगा।"

रानी मधुमक्खी ने आम के पेड़ का आभार व्यक्त किया और खुशी-खुशी अपना छत्ता आम के पेड़ पर बना लिया। समय बीतता गया, सब कुछ सामान्य चल रहा था।

🪓 संकट और अहंकार का अंत

कुछ दिनों बाद, जंगल में कुछ लकड़हारे (Woodcutters) आए। उनकी नजर हरे-भरे आम के पेड़ पर पड़ी।

लकड़हारा 1: "देखो! यह आम का पेड़ कितना बढ़िया है। चलो, इसे काटकर लकड़ियाँ ले चलते हैं।"

वे अपनी कुल्हाड़ी लेकर आम के पेड़ की ओर बढ़े ही थे कि एक लकड़हारे की नजर ऊपर गई। उसने घबराकर साथी को रोका:

लकड़हारा 2: "रुको! इसे मत काटो। इस पेड़ पर तो मधुमक्खियों का विशाल छत्ता है। अगर हमने इसे छेड़ा, तो ये हम पर हमला कर देंगी और हमारा बचना मुश्किल हो जाएगा।"

तभी उनकी नजर पास खड़े पीपल के पेड़ पर गई।

लकड़हारा 1: "तो फिर क्यों न हम इस पीपल के पेड़ को ही काट लें? इसमें लकड़ियाँ भी ज्यादा मिलेंगी और इस पर कोई खतरा (छत्ता) भी नहीं है।"

वे पीपल के पेड़ को काटने लगे। कुल्हाड़ी की चोट पड़ते ही पीपल दर्द से चिल्लाने लगा— "बचाओ... बचाओ...!"

🤝 मदद और प्रायश्चित

आम के पेड़ ने अपने पड़ोसी का दर्द सुना। उसने तुरंत अपनी शरण में रह रही मधुमक्खियों से कहा:

🥭 आम का पेड़: "मधुमक्खी बहन! हमें पीपल के प्राण बचाने चाहिए। कृपया इनकी मदद करो।"

आम के पेड़ के आग्रह पर मधुमक्खियों ने तुरंत लकड़हारों पर धावा बोल दिया। मधुमक्खियों के हमले से घबराकर लकड़हारे अपनी कुल्हाड़ी छोड़कर जान बचाकर भाग गए।

जान बचने के बाद पीपल के पेड़ ने राहत की साँस ली। उसका सिर शर्म से झुक गया था। उसने मधुमक्खियों को धन्यवाद दिया।

"धन्यवाद हमें नहीं, इस दयालु आम के पेड़ को दो। इन्होंने ही आपकी जान बचाई है। इन्होंने हमें सिखाया है कि 'अगर कोई हमारे साथ बुरा करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि हम भी उसके साथ वैसा ही करें।'"

अब पीपल का अहंकार पूरी तरह टूट चुका था। उसे समझ आ गया था कि जिसे उसने तुच्छ समझकर भगा दिया था, उसी की वजह से आज उसके प्राण बचे हैं।

💐 शिक्षा 💐

"हमें कभी अपने बल या धन का अहंकार नहीं करना चाहिए।"

जितना हो सके दूसरों के काम आना चाहिए। याद रखें, जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तभी वक्त पड़ने पर कुदरत किसी न किसी रूप में हमारी मदद करती है।

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