अहंकार की सजा
"बड़े होने का अर्थ है- दूसरों के काम आना"
🌳 घमंड और विनम्रता
एक बहुत ही घना जंगल था। उस जंगल में पास-पास दो पेड़ खड़े थे—एक आम का पेड़ और एक पीपल का पेड़। एक दिन मधुमक्खियों का एक झुंड जंगल में रहने के लिए आया। उन्हें अपना छत्ता बनाने के लिए किसी घने और मजबूत पेड़ की तलाश थी।
रानी मधुमक्खी की नजर विशाल पीपल के पेड़ पर पड़ी। उसने विनम्रता से प्रार्थना की:
पीपल का पेड़ अपने आकार और छाया पर बहुत घमंड करता था। उसे किसी का भी आना पसंद नहीं था। उसने क्रोध में भरकर उत्तर दिया:
पास ही खड़ा आम का पेड़ यह सब देख रहा था। उसने पीपल को समझाने की कोशिश की:
लेकिन अहंकारी पीपल ने झिड़कते हुए कहा— "तुम अपना काम करो! अगर तुम्हें इतनी ही चिंता है, तो तुम ही इन्हें अपनी शाखा पर जगह क्यों नहीं दे देते?"
🐝 आम के पेड़ की उदारता
पीपल का रूखा व्यवहार देखकर आम के पेड़ ने रानी मधुमक्खी को आवाज दी और बड़े प्यार से कहा:
रानी मधुमक्खी ने आम के पेड़ का आभार व्यक्त किया और खुशी-खुशी अपना छत्ता आम के पेड़ पर बना लिया। समय बीतता गया, सब कुछ सामान्य चल रहा था।
🪓 संकट और अहंकार का अंत
कुछ दिनों बाद, जंगल में कुछ लकड़हारे (Woodcutters) आए। उनकी नजर हरे-भरे आम के पेड़ पर पड़ी।
वे अपनी कुल्हाड़ी लेकर आम के पेड़ की ओर बढ़े ही थे कि एक लकड़हारे की नजर ऊपर गई। उसने घबराकर साथी को रोका:
तभी उनकी नजर पास खड़े पीपल के पेड़ पर गई।
वे पीपल के पेड़ को काटने लगे। कुल्हाड़ी की चोट पड़ते ही पीपल दर्द से चिल्लाने लगा— "बचाओ... बचाओ...!"
🤝 मदद और प्रायश्चित
आम के पेड़ ने अपने पड़ोसी का दर्द सुना। उसने तुरंत अपनी शरण में रह रही मधुमक्खियों से कहा:
आम के पेड़ के आग्रह पर मधुमक्खियों ने तुरंत लकड़हारों पर धावा बोल दिया। मधुमक्खियों के हमले से घबराकर लकड़हारे अपनी कुल्हाड़ी छोड़कर जान बचाकर भाग गए।
जान बचने के बाद पीपल के पेड़ ने राहत की साँस ली। उसका सिर शर्म से झुक गया था। उसने मधुमक्खियों को धन्यवाद दिया।
अब पीपल का अहंकार पूरी तरह टूट चुका था। उसे समझ आ गया था कि जिसे उसने तुच्छ समझकर भगा दिया था, उसी की वजह से आज उसके प्राण बचे हैं।
💐 शिक्षा 💐
"हमें कभी अपने बल या धन का अहंकार नहीं करना चाहिए।"
जितना हो सके दूसरों के काम आना चाहिए। याद रखें, जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तभी वक्त पड़ने पर कुदरत किसी न किसी रूप में हमारी मदद करती है।

