॥ सम्पूर्ण फलित ज्योतिष संग्रह ॥
ग्रह, नक्षत्र, योग, विवाह और उपायों का विशाल ज्ञानकोश
🪐 नवग्रह ज्ञान एवं सिद्धांत
- ग्रहों के वर्ण (जाति) और गुण (सत्त्व-रजस्-तमस्)
- ग्रहों का वर्ण, देवता एवं लिंगभाव
- ग्रहों का आत्मादि विभाग
- ग्रहों की संख्या, नाम और प्रकृति (शुभ/क्रूर)
- अवतारों की उत्पत्ति और ग्रहरूप स्वरूप
- नवग्रहों का शरीर, धातु और रसों से सम्बन्ध
- ग्रहों के बल और निर्धारण सूत्र
- नवग्रहों के वृक्ष और गुण
- नवग्रहों के वस्त्र, धातु और रंग
- ग्रहों की ऋतुएँ
- ग्रहों की संज्ञाएँ: धातु, मूल, जीव
- ग्रहों की उच्च-नीच राशियाँ
- मूलत्रिकोण स्थानों की व्याख्या
- ग्रहों की नैसर्गिक मैत्री
- ग्रहों की तात्कालिक मैत्री
- पंचधा मैत्री (पाँच प्रकार की मैत्री)
- ग्रहों की 12 विशिष्ट अवस्थाएँ
- शनि ग्रह परिचय
- शनिदेव: पौराणिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- काल पुरुष की कुंडली में शनि
📜 कुंडली, भाव और राशियाँ
- ग्रह, राशि, नक्षत्र एवं लग्न परिभाषा
- ज्योतिष के अधिकारी कौन?
- नक्षत्र परिचय
- ग्रहों के स्थान बल (Sthan Bala)
- अप्रकाशक उपग्रह (धूम, व्यतिपात आदि)
- गुलिक, काल, यमघण्ट परिचय
- होरा शास्त्र और राशिचक्र
- राशियों का अंगविभाग और त्रिदोष
- 12 राशियों का विस्तृत परिचय
- 12 भावों के नाम और कारकत्व
- भाव विचार सिद्धान्त (भाव, भावेश, कारक)
- भाव और नित्य कारक फल विचार
- राशियों की दृष्टि का विश्लेषण
- जैमिनि पद्धति: चर, स्थिर राशि दृष्टि
- भाव संख्या का रहस्य
- कारक, अकारक, मारक और बाधक ग्रह
- कुंडली में Paya विचार
- गण्डमूल नक्षत्र: प्रभाव और शांति
- सटीक कुण्डली कैसे पहचानें
- महादशा विचार
- राशियों का परिचय
💍 विवाह, संतान और परिवार
- मंगल दोष के परिणाम
- संतान उत्पत्ति (आयुर्वेद और ज्योतिष)
- पुत्र-पुत्री संतान विचार (पंचम भाव)
- पिता-पुत्र सम्बन्ध
- सुंदर और भाग्यशाली पत्नी के योग
- परस्त्रीगमन योग के कारण और उपाय
- स्त्री जातक: विवाह, तलाक और संतान योग
- कुंडली मिलान (मेलापक) के अपवाद
- विवाह में विलंब और तलाक के कारण
- सन्तान मृत्यु के कारण
- मंगल दोष के उपाय
- बीज और क्षेत्र: संतान प्राप्ति
💰 करियर, धन और शिक्षा
🏥 स्वास्थ्य, आयु और रोग
🕉️ उपाय, मंत्र और विविध
- नवग्रह मंत्र और लाभ
- तुलसी की जड़ के उपाय (Vastu)
- ज्योतिष के अपमान की चेतावनी
- प्रकीर्ण योग (Prakeerna Yoga)
- वृष्टियोग (Vrishti Yoga)
- गुरु-शनि सम्बन्ध: ज्ञान और कर्म
- पंचांगों में समयांतर (Date Difference) क्यों?
- दिशाशूल विचार
- 108 संख्या का महत्व
- रुद्राक्ष धारण लाभ और विधि
- शनि का राशि परिवर्तन प्रभाव
- ग्रहों की युति (Conjunction) फल
- पिप्पलाद मुनि स्तोत्र (शनि शांति)
- कर्म-कुकर्म और नवग्रह फल
- दिशाशूल और परिहार
- अक्षय तृतीया और विवाह उपाय
- शनि शांति का अचूक उपाय
- गुमशुदा वस्तु का ज्ञान
- चन्द्रमा ग्रह शांति मंत्र
- मंगल ग्रह शांति मंत्र
- बुध ग्रह शांति मंत्र
- बृहस्पति ग्रह शांति मंत्र
- शुक्र ग्रह शांति मंत्र
- शनि ग्रह शांति मंत्र
- राहु ग्रह शांति मंत्र
- केतु ग्रह शांति मंत्र
- शिव वास विचार
- एक आंख वाला कौवा (शकुन)
- दिन के आठ प्रहर
- शनिवार को वर्जित वस्तुएं
- साढेसाती या महादशा विचार
- रुद्राक्ष धारण विधि
- रुद्राक्ष और राशि का सम्बन्ध
- राशियों के अनुसार रत्न
- ज्योतिष के अद्भुत फलित सूत्र
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