हनुमान जी और यमराज: अद्भुत मुठभेड़
जब महाकाल के स्वरूप ने मृत्यु के देवता पर विजय प्राप्त की
प्रस्तावना: लंका में हनुमान जी का पदार्पण
हनुमान जी की यम से मुठभेड़ तब होती है जब हनुमान जी माता सीता का पता लगाने के लिए लंका जाते हैं। माता सीता की खोज सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में मेघनाथ के द्वारा ब्रह्मास्त्र का मान रखते हुए खुद को बंदी बनने दिया। यह उनकी एक लीला थी ताकि वे स्वयं रावण के सम्मुख खड़े होकर उसे समझा सकें।
रावण का अहंकार और हनुमान जी की चेतावनी
बंदी बनाने के बाद हनुमान जी को रावण के दरबार में ले जाया गया जहाँ हनुमान जी ने रावण को धर्म की सीख दी और चेतावनी भी दी। किन्तु अहंकारी रावण ने सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और क्रोध में आकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगवा दी।
- अतुलित बलशाली: हनुमान जी तुरंत रावण के दरबार से निकल गए और उन्होंने पूरी लंका को जलाने का निर्णय लिया।
- हाहाकार: रावण के सैनिक हनुमान जी को पकड़ने में पूरी तरह विफल रहे। पूरी लंका नगरी में त्राहि-त्राहि मच गई।
The Climax: हनुमान जी बनाम यमराज
जब लंका जलने लगी और रावण की सेना असहाय हो गई, तब रावण ने हनुमान जी को पकड़ने के लिए मृत्यु के देवता **यमराज** को भेजा। रावण ने पहले ही रुद्र मंत्र के प्रभाव से यमराज को बंदी बनाकर अपनी कैद में रखा हुआ था।
अद्भुत घटना: यमराज का निगलना
यमराज का हनुमान जी से कोई मुकाबला नहीं था, क्योंकि हनुमान जी स्वयं **रुद्र (महाकाल)** के अवतार हैं। हनुमान जी ने अपना विराट रूप धारण किया और यमराज को पकड़कर निगल लिया।
देखते ही देखते पूरे ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच गया। चूँकि मृत्यु के देवता स्वयं हनुमान जी के उदर में समा गए थे, इसलिए संसार में किसी की मृत्यु ही नहीं हो रही थी। प्रकृति का चक्र रुक गया और सर्वत्र अव्यवस्था फैल गई।
ब्रह्मा जी का हस्तक्षेप और समझौता
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तब सृष्टि के रचयिता **ब्रह्मा जी** हनुमान जी के पास पहुँचे। उन्होंने हनुमान जी से विनम्र अनुरोध किया कि वे यमराज को मुक्त कर दें ताकि ब्रह्माण्ड का संतुलन पुनः स्थापित हो सके।
हनुमान जी यमराज को छोड़ने के लिए तैयार हुए, लेकिन उन्होंने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी:
| शर्त/वरदान | विवरण |
|---|---|
| हनुमान जी की शर्त | यमराज रावण के सिर पर बैठेंगे और शीघ्र ही उसके विनाश और मृत्यु का मार्ग प्रशस्त करेंगे। |
| यमराज का वरदान | यमराज ने हनुमान जी को वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी का अनन्य भक्त होगा, वह मृत्यु के भय पर विजय प्राप्त कर सकेगा। |
निष्कर्ष: भक्ति की शक्ति
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि हनुमान जी की भक्ति करने वाले को स्वयं मृत्यु के देवता का भी भय नहीं रहता। हनुमान जी यमराज के भी पूज्य हैं क्योंकि वे स्वयं भगवान शिव के अंश हैं। यमराज ने उनकी शर्त को स्वीकार किया और हनुमान जी ने उन्हें मुक्त कर दिया।

