॥ राजनीति एवं नीति सार ॥
सफल जीवन और शासन का सूत्र
निषेवेतात्मवांल्लोके न स व्यसनमाप्नुयात्॥
Niṣevetātmavāṃlloke na sa vyasanamāpnuyāt ||
हिन्दी अनुवाद
विस्तृत शब्दार्थ (Word Meanings)
| काले (Kāle) | उचित समय पर (At the right time) |
| धर्म-अर्थ-कामान् | जीवन के तीन पुरुषार्थ (Duty, Wealth, Desire) |
| संमन्त्र्य (Sammantrya) | परामर्श करके (After consulting) |
| सचिवैः सह | मंत्रियों या सलाहकारों के साथ |
| निषेवेत (Niṣeveta) | आचरण में लाना या सेवन करना |
| आत्मवान् (Ātmavān) | संयमी या बुद्धिमान व्यक्ति |
| व्यसनम् (Vyasanam) | विपत्ति, संकट या बुरी लत (Calamity/Evil habit) |
व्याकरण विश्लेषण
1. संमन्त्र्य: 'सम्' उपसर्ग + 'मन्त्र्' धातु + 'ल्यप्' प्रत्यय। इसका अर्थ है 'भली-भांति मंत्रणा करके' ।
2. सचिवैः सह: यहाँ 'सह' के योग में 'सचिव' शब्द में तृतीया विभक्ति (बहुवचन) का प्रयोग हुआ है।
3. निषेवेत: 'नि' उपसर्ग + 'सेव्' धातु, विधिलिङ् लकार (Potential Mood), प्रथम पुरुष, एकवचन।
आधुनिक सन्दर्भ (Modern Insight)
• धर्म: आपकी Ethics और कंपनी की Value।
• अर्थ: Profit और Revenue।
• काम: संतुष्टि और व्यक्तिगत इच्छाएं।
जो लीडर अपनी टीम (सचिवों) से सलाह लेकर सही समय पर इन तीनों के बीच संतुलन बनाता है, उसकी कंपनी या प्रोजेक्ट कभी विफल (Vyasanam) नहीं होता।
संवादात्मक नीति कथा: राजा और अनुभवी मंत्री
एक बार एक युवा राजा ने जोश में आकर पड़ोसी राज्य पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। सेना तैयार थी, लेकिन उसके वृद्ध मंत्री ने उसे रोकते हुए कहा— "महाराज, समय (काल) अनुकूल नहीं है, अभी वर्षा ऋतु आने वाली है।"
राजा ने मंत्रियों के साथ सभा की (संमन्त्र्य)। चर्चा में पता चला कि सेना की रसद (Supply) बारिश में कट जाएगी। राजा ने अपना निर्णय बदल दिया और सही समय की प्रतीक्षा की। परिणाम यह हुआ कि बाद में उन्होंने बिना किसी बड़ी हानि के जीत हासिल की।
शिक्षा: अकेला व्यक्ति चाहे कितना भी बुद्धिमान हो, परामर्श और सही समय का बोध ही उसे बड़े संकटों से बचाता है।

