Laddoo Mar Holi Barsana: बृज की विश्वप्रसिद्ध लड्डू मार होली का रहस्य और इतिहास

Sooraj Krishna Shastri
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बृज की दिव्य लड्डू मार होली

राधारानी के बरसाने में जब बरसते हैं लड्डू और भक्ति का रंग

ब्रज मंडल में होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि श्री राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम, भक्ति, आस्था और श्रद्धा की एक जीवंत प्रतीक है। फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से शुरू होने वाला यह उत्सव पूरे विश्व में अपनी दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ रंग नहीं, बल्कि प्रेम बरसता है और भक्त श्री राधा-कृष्ण की भक्ति के सागर में सराबोर हो जाते हैं।

होली का निमंत्रण और स्वागत

इस अद्भुत परंपरा का आरंभ बरसाना से होता है। फाल्गुन मास की अष्टमी को राधा रानी के गाँव **बरसाना** से श्रीकृष्ण के **नंदगाँव** में होली खेलने का निमंत्रण भेजा जाता है।

  • निमंत्रण यात्रा: बरसाना से एक गोपी इत्र, गुलाल और विशेष प्रसाद लेकर नंदगाँव पहुँचती है।
  • भव्य स्वागत: नंदगाँव में राधा रानी की सखी का स्वागत अत्यंत उत्साह और आदर के साथ किया जाता है।
  • स्वीकृति संदेश: शाम को नंदगाँव से एक 'पांडा' स्वीकृति का संदेश लेकर राधा रानी के मंदिर पहुँचता है, जिसे वहाँ स्वागत स्वरूप लड्डू खिलाए जाते हैं।
📜 द्वापर युग की वह अनोखी कथा

माना जाता है कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। एक बार जब नंद बाबा ने होली निमंत्रण की स्वीकृति का संदेश एक पांडा के माध्यम से वृषभान जी को भिजवाया, तो वृषभान जी ने उस पांडे को खाने के लिए ढेर सारे लड्डू दिए। उसी समय चंचल गोपियों ने पांडे के मुँह पर गुलाल लगा दिया। पांडे के पास उस वक्त गुलाल नहीं था, तो उन्होंने मज़ाक और प्रेम में अपने पास रखे लड्डुओं को ही गोपियों पर फेंकना शुरू कर दिया। तभी से यह मधुर परंपरा 'लड्डू मार होली' के रूप में अमर हो गई।

टन भर लड्डुओं की वर्षा

बरसाना के राधा रानी मंदिर में आज भी कई टन लड्डू लुटाए जाते हैं। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु इस दिव्य प्रसाद को पाकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। यह आनंद का वह क्षण है जहाँ हर कोई 'राधे-राधे' के जयकारों के साथ भक्ति के लड्डू ग्रहण करता है।

ब्रज की होली का संपूर्ण कालक्रम

लड्डू मार होली तो केवल शुरुआत है, इसके बाद ब्रज में उत्सव का एक क्रम चलता है:

  • लड्डू मार होली: बरसाना (प्रथम दिन)
  • लट्ठमार होली: बरसाना (अगले दिन)
  • नंदगाँव लट्ठमार होली: बरसाना के अगले दिन नंदगाँव में उत्सव।
  • मथुरा होली: रंगभरी एकादशी पर मथुरा के प्रसिद्ध मंदिरों में।
  • फालेन गांव: प्रह्लाद की भक्ति का प्रतीक होलिका दहन।
  • दाऊजी का हुरंगा: बलदेव में देवर-भाभी की अनोखी होली।
  • रंगपंचमी: रंगनाथ मंदिर में रंगोत्सव का समापन।

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