अर्थातुराणां न सुहृन्न बन्धुः
कामातुराणां न भयं न लज्जा।
चिन्तातुराणां न सुखं न निद्रा
क्षुधातुराणां न बलं न तेजः॥
कामातुराणां न भयं न लज्जा।
चिन्तातुराणां न सुखं न निद्रा
क्षुधातुराणां न बलं न तेजः॥
Arthāturāṇāṃ na suhṛnna bandhuḥ
Kāmāturāṇāṃ na bhayaṃ na lajjā |
Cintāturāṇāṃ na sukhaṃ na nidrā
Kṣudhāturāṇāṃ na balaṃ na tejaḥ ||
Kāmāturāṇāṃ na bhayaṃ na lajjā |
Cintāturāṇāṃ na sukhaṃ na nidrā
Kṣudhāturāṇāṃ na balaṃ na tejaḥ ||
📝 हिन्दी और अंग्रेजी अनुवाद
हिन्दी: धन के लोभ में अंधे (आतुर) व्यक्तियों का न कोई मित्र होता है और न ही कोई बन्धु। कामवासना में अंधे व्यक्तियों को न कोई भय होता है और न ही लज्जा। चिंता से ग्रस्त व्यक्तियों को न सुख मिलता है और न ही नींद। भूख से व्याकुल व्यक्तियों में न बल शेष रहता है और न ही तेज।
English: Those obsessed with wealth have neither friends nor relatives. Those blinded by lust/desire have neither fear nor shame. Those consumed by anxiety have neither happiness nor sleep. Those tormented by hunger have neither strength nor vitality.
English: Those obsessed with wealth have neither friends nor relatives. Those blinded by lust/desire have neither fear nor shame. Those consumed by anxiety have neither happiness nor sleep. Those tormented by hunger have neither strength nor vitality.
🔍 शब्दार्थ (Word-for-Word Meaning)
| शब्द (Sanskrit) | अर्थ (Hindi) | Meaning (English) |
|---|---|---|
| अर्थातुराणां | धन के लिए व्याकुलों का | Of those obsessed with wealth |
| सुहृत् + न | न अच्छा मित्र | No good friend |
| कामातुराणां | वासना में अंधे लोगों का | Of those blinded by lust |
| लज्जा | शर्म/संकोच | Shame/Modesty |
| चिन्तातुराणां | चिंताग्रस्त लोगों का | Of those afflicted by worry |
| क्षुधातुराणां | भूख से पीड़ितों का | Of those suffering from hunger |
| तेजः | कान्ति/प्रभाव | Radiance/Vigor |
📚 व्याकरणात्मक विश्लेषण (Grammar)
1. समास (Compounds): इस श्लोक में 'आतुर' (Afflicted/Obsessed) शब्द का बार-बार प्रयोग हुआ है। यह तृतीया तत्पुरुष समास है।
उदा: अर्थेन आतुरः = अर्थातुरः
उदा: अर्थेन आतुरः = अर्थातुरः
2. विभक्ति (Case): मुख्य पदों में षष्ठी विभक्ति, बहुवचन (Genitive Plural) का प्रयोग हुआ है (का/के/की)।
3. संधि (Sandhi): सुहृन्न = सुहृत् + न (व्यंजन संधि)।
🌍 आधुनिक संदर्भ (Modern Context)
- कॉर्पोरेट लोभ: पैसे की दौड़ में लोग सामाजिक रूप से अकेले पड़ रहे हैं।
- अपराध: वासना में अंधे अपराधी कानून (भय) और समाज (लज्जा) को नहीं मानते।
- मानसिक स्वास्थ्य: चिंता (Anxiety) आज अनिद्रा का सबसे बड़ा कारण है।
🗣️ संवादात्मक नीति कथा
शीर्षक: चार प्रकार का अंधापन
शिष्य गुरुदेव! आँखें होते हुए भी मनुष्य अंधा कैसे हो सकता है?
गुरु वत्स! दृष्टि विवेक का विषय है। चार अंधे ऐसे हैं:
1. धन का लोभी: रिश्तों के प्रति अंधा।
2. काम में लिप्त: नैतिकता के प्रति अंधा।
3. चिंताग्रस्त: सुख के प्रति अंधा।
4. भूखा: ज्ञान के प्रति अंधा।
2. काम में लिप्त: नैतिकता के प्रति अंधा।
3. चिंताग्रस्त: सुख के प्रति अंधा।
4. भूखा: ज्ञान के प्रति अंधा।
शिष्य तो सुखी कौन है?
गुरु जो 'संतोष' रखता है और चिंता को ईश्वर पर छोड़ कर्म करता है।
💡 निष्कर्ष
यह श्लोक संतुलन (Balance) का पाठ पढ़ाता है। अतिरेक (Excess) मनुष्य की क्षमताओं को नष्ट कर देता है।

