Arthaturanam Na Suhrunna Bandhuh: Shloka Meaning in Hindi & English | धन, चिंता और काम पर सुभाषित

Sooraj Krishna Shastri
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अर्थातुराणां न सुहृन्न बन्धुः
कामातुराणां न भयं न लज्जा।
चिन्तातुराणां न सुखं न निद्रा
क्षुधातुराणां न बलं न तेजः॥
Arthāturāṇāṃ na suhṛnna bandhuḥ
Kāmāturāṇāṃ na bhayaṃ na lajjā |
Cintāturāṇāṃ na sukhaṃ na nidrā
Kṣudhāturāṇāṃ na balaṃ na tejaḥ ||
📝 हिन्दी और अंग्रेजी अनुवाद
हिन्दी: धन के लोभ में अंधे (आतुर) व्यक्तियों का न कोई मित्र होता है और न ही कोई बन्धु। कामवासना में अंधे व्यक्तियों को न कोई भय होता है और न ही लज्जा। चिंता से ग्रस्त व्यक्तियों को न सुख मिलता है और न ही नींद। भूख से व्याकुल व्यक्तियों में न बल शेष रहता है और न ही तेज।

English: Those obsessed with wealth have neither friends nor relatives. Those blinded by lust/desire have neither fear nor shame. Those consumed by anxiety have neither happiness nor sleep. Those tormented by hunger have neither strength nor vitality.
🔍 शब्दार्थ (Word-for-Word Meaning)
शब्द (Sanskrit) अर्थ (Hindi) Meaning (English)
अर्थातुराणां धन के लिए व्याकुलों का Of those obsessed with wealth
सुहृत् + न न अच्छा मित्र No good friend
कामातुराणां वासना में अंधे लोगों का Of those blinded by lust
लज्जा शर्म/संकोच Shame/Modesty
चिन्तातुराणां चिंताग्रस्त लोगों का Of those afflicted by worry
क्षुधातुराणां भूख से पीड़ितों का Of those suffering from hunger
तेजः कान्ति/प्रभाव Radiance/Vigor
📚 व्याकरणात्मक विश्लेषण (Grammar)
1. समास (Compounds): इस श्लोक में 'आतुर' (Afflicted/Obsessed) शब्द का बार-बार प्रयोग हुआ है। यह तृतीया तत्पुरुष समास है।
उदा: अर्थेन आतुरः = अर्थातुरः
2. विभक्ति (Case): मुख्य पदों में षष्ठी विभक्ति, बहुवचन (Genitive Plural) का प्रयोग हुआ है (का/के/की)।
3. संधि (Sandhi): सुहृन्न = सुहृत् + न (व्यंजन संधि)।
🌍 आधुनिक संदर्भ (Modern Context)
  • कॉर्पोरेट लोभ: पैसे की दौड़ में लोग सामाजिक रूप से अकेले पड़ रहे हैं।
  • अपराध: वासना में अंधे अपराधी कानून (भय) और समाज (लज्जा) को नहीं मानते।
  • मानसिक स्वास्थ्य: चिंता (Anxiety) आज अनिद्रा का सबसे बड़ा कारण है।
🗣️ संवादात्मक नीति कथा

शीर्षक: चार प्रकार का अंधापन

शिष्य गुरुदेव! आँखें होते हुए भी मनुष्य अंधा कैसे हो सकता है?
गुरु वत्स! दृष्टि विवेक का विषय है। चार अंधे ऐसे हैं:
1. धन का लोभी: रिश्तों के प्रति अंधा।
2. काम में लिप्त: नैतिकता के प्रति अंधा।
3. चिंताग्रस्त: सुख के प्रति अंधा।
4. भूखा: ज्ञान के प्रति अंधा।
शिष्य तो सुखी कौन है?
गुरु जो 'संतोष' रखता है और चिंता को ईश्वर पर छोड़ कर्म करता है।

💡 निष्कर्ष

यह श्लोक संतुलन (Balance) का पाठ पढ़ाता है। अतिरेक (Excess) मनुष्य की क्षमताओं को नष्ट कर देता है।

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