Anvayagatavidyanam: Sanskrit Shloka on Heritage & Humility | खानदानी संस्कार और घमंड

Sooraj Krishna Shastri
By -
0

Anvayagatavidyanam: Sanskrit Shloka on Heritage & Humility | खानदानी संस्कार और घमंड

संस्कृत सुभाषित विश्लेषण

अन्वयागतविद्यानामन्वयागतसंपदाम् ।
विदुषां च प्रभूणां च हृदयं नाSवलिप्यते ।।
Anvayāgatavidyānām anvayāgatasampadām |
Viduṣāṁ ca prabhūṇāṁ ca hṛdayaṁ nāvalipyate ||

हिन्दी अनुवाद:
"जिन विद्वानों को विद्या वंश-परम्परा (विरासत) से प्राप्त हुई है और जिन धनवानों को संपत्ति पीढ़ियों से उत्तराधिकार में मिली है, उनका हृदय (गर्व से) लिप्त या मलिन नहीं होता।"

📖 शब्दार्थ (Word Analysis)

शब्द (Sanskrit) अर्थ (Hindi) English Meaning
अन्वय-आगत वंश/परम्परा से आया हुआ Inherited through lineage
विद्यानाम् विद्याओं (विद्वानों) का Of the learned ones
संपदाम् संपदाओं (धनवानों) का Of the wealthy ones
विदुषां च और विद्वानों का And of the scholars
प्रभूणां च और प्रभुओं (स्वामियों) का And of the lords/masters
हृदयम् नाऽवलिप्यते हृदय गर्व से मैला नहीं होता Heart is not tainted by pride

🧠 व्याकरण और आधुनिक सन्दर्भ

1. व्याकरण विशेष (Grammar):

  • अन्वयागतविद्यानाम्: यहाँ बहुव्रीहि समास है (जिनके पास वंश से आई हुई विद्या है)।
  • नाऽवलिप्यते: 'लिप्' धातु (To smear/coat) का प्रयोग है। भाव यह है कि अहंकार उनके मन पर 'लेप' की तरह नहीं चढ़ता।

2. आधुनिक सन्दर्भ (Modern Context):

आज के युग में यह "Old Money" (पुरानी रईसी) और "New Money" (नया धन) के अंतर को स्पष्ट करता है।

  • स्थायित्व (Stability): जिन्हें विरासत में संस्कार और साधन मिलते हैं, वे "दिखावे" (Show-off) में विश्वास नहीं रखते। वे जानते हैं कि धन/विद्या एक जिम्मेदारी है।
  • नया नशा: जिसे अचानक सफलता मिलती है (Overnight Success), उसमें अक्सर अहंकार का नशा जल्दी चढ़ता है क्योंकि उसने उस शक्ति को पचाना नहीं सीखा है।

🐢 संवादात्मक नीति कथा

🌳 पुराना बरगद और नई अमरबेल

एक घने जंगल में एक विशाल, सदियों पुराना बरगद का पेड़ (Banyan Tree) था। उसकी जड़ें गहरी थीं और वह शांत खड़ा रहता था। एक दिन बारिश के मौसम में उसके पास एक अमरबेल (Creeper vine) तेजी से उगी और कुछ ही दिनों में बरगद के ऊपर चढ़ गई।

अमरबेल (इतराते हुए): "अरे दादा! देखो मैं कितनी ऊँची हो गई हूँ। तुम सौ साल में जहाँ पहुँचे, मैं एक हफ्ते में वहाँ पहुँच गई। अब मैं तुमसे ऊपर हूँ!"

बरगद (मुस्कुराते हुए): "पुत्री! ऊँचाई पर होना और ऊँचाई को संभालना, दो अलग बातें हैं। मेरा बल मेरी जड़ों (Ancestral Roots) में है जो दिखाई नहीं देतीं।"

दो दिन बाद भीषण आंधी आई। अमरबेल, जिसकी कोई अपनी जड़ें नहीं थीं, टूटकर नीचे गिर गई और कीचड़ में सन गई। बरगद का पेड़ अपनी गहरी 'परम्परागत' जड़ों के कारण अडिग खड़ा रहा।

🎯 निष्कर्ष (Conclusion)

सच्ची विद्या और सच्ची समृद्धि वही है जो व्यक्ति को 'विनम्र' बनाए।
यदि प्राप्ति के साथ 'अहंकार' आ रहा है, तो समझिये कि जड़ें अभी गहरी नहीं हैं।
॥ इति शुभम् ॥

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!