॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवत महापुराण: भगवान श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण द्वारका लीला
दशम और एकादश स्कंध पर आधारित विस्तृत कथा अनुक्रमणिका
- मथुरा का त्याग और अजेय द्वारका नगरी का निर्माण
- रुक्मिणी हरण और विवाह: प्रेम का सर्वोच्च शिखर
- स्यमन्तक मणि की कथा (सत्यभामा और जाम्बवती से विवाह)
- भौमासुर (नरकासुर) वध और 16,100 कन्याओं का उद्धार
- देवर्षि नारद का मोह और भगवान का गृहस्थ योग दर्शन
- सुदामा चरित्र (मित्रता की पराकाष्ठा) और पारिजात हरण लीला
दशम स्कंध (उत्तरार्ध)
- पौण्ड्रक वध: नकली वासुदेव कृष्ण का अंत
- राजा नृग का उद्धार (गिरगिट की अद्भुत कथा)
- बाणासुर से भयंकर युद्ध और हरि-हर (कृष्ण-शिव) मिलन
- जरासंध वध और 20,800 बंदी राजाओं की मुक्ति
दशम स्कंध (उत्तरार्ध)
- रुक्मिणी जी के साथ हास्य-विनोद (प्रणय-कलह)
- साम्ब का विवाह और बलराम जी (दाऊ भैया) का क्रोध
- शिशुपाल और दन्तवक्त्र का वध (जय-विजय की मुक्ति)
- मृत ब्राह्मण पुत्रों को वापस लाना और अर्जुन का गर्व-भंग
दशम स्कंध (उत्तरार्ध)
- प्रद्युम्न का जन्म और शम्बरासुर का वध
- शाल्व का मायावी 'सौभ विमान' और द्वारका पर आक्रमण
- बलराम जी की तीर्थयात्रा और सूतजी (रोमहर्षण) का उद्धार
- कुरुक्षेत्र का महा-मिलन: द्वारका और वृंदावन (गोपियों) का मिलन
दशम स्कंध (उत्तरार्ध)
- सुभद्रा हरण: अर्जुन और सुभद्रा का विवाह
- मिथिला यात्रा: राजा बहुलाश्व और ब्राह्मण श्रुतदेव पर समान कृपा
- महर्षि भृगु द्वारा त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की परीक्षा
- वृकासुर (भस्मासुर) से भगवान शिव की रक्षा
दशम स्कंध (उत्तरार्ध)

