"हिताहितं सुखं दुःखं, आयुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तं, आयुर्वेदः स उच्यते॥" (चरक संहिता)।
आयुर्वेद केवल रोग को ठीक करने की पद्धति नहीं है, अपितु यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। इसकी परंपरा दिव्य ज्ञान से आरंभ होकर वैज्ञानिक संहिताओं (चरक, सुश्रुत) और मध्यकालीन रस-शास्त्र (Rasa Shastra) तक विस्तृत है। प्रस्तुत शोधपरक सूची में हमने **100 ऐसे वैद्यों, आचार्यों और शोधकर्ताओं** को संकलित किया है, जिन्होंने मानव कल्याण के लिए जड़ी-बूटियों, शल्य चिकित्सा (Surgery) और निदान (Diagnosis) के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
| क्रम | आचार्य/वैद्य | प्रमुख योगदान/संहिता |
|---|---|---|
| 1 | अश्विनी कुमार | देवताओं के वैद्य (शल्य चिकित्सा के आदि प्रवर्तक)। |
| 2 | भगवान धन्वंतरि | आयुर्वेद के जनक (समुद्र मंथन, शल्य प्रधान)। |
| 3 | इन्द्र | ऋषियों को आयुर्वेद का ज्ञान देने वाले। |
| 4 | महर्षि भरद्वाज | इन्द्र से पृथ्वी पर आयुर्वेद लाने वाले प्रथम ऋषि। |
| 5 | आत्रेय पुनर्वसु | कायाचिकित्सा (Medicine) के आदि आचार्य। |
| 6 | अग्निवेश | 'अग्निवेश तंत्र' (चरक संहिता का मूल रूप)। |
| 7 | महर्षि सुश्रुत | 'सुश्रुत संहिता' (प्लास्टिक सर्जरी और शल्य के जनक)। |
| 8 | महर्षि चरक | 'चरक संहिता' (चिकित्सा के सबसे महान ग्रंथकर्ता)। |
| 9 | भेल (भेड) | 'भेल संहिता' (अग्निवेश के सहपाठी)। |
| 10 | जतुकर्ण | 'जतुकर्ण संहिता' (प्राचीन कायचिकित्सा)। |
| 11 | पाराशर | 'पाराशर संहिता' (विष विज्ञान और चिकित्सा)। |
| 12 | हारीत | 'हारीत संहिता' (रस शास्त्र के प्रारंभिक संकेत)। |
| 13 | क्षारपाणि | क्षारपाणि संहिता (कायचिकित्सा)। |
| 14 | महर्षि कश्यप | 'कश्यप संहिता' (बाल रोग/Pediatrics के जनक)। |
| 15 | दिवोदास (धन्वंतरि) | काशी के राजा और सुश्रुत के गुरु। |
| 16 | जीवक (कुमारभृत्य) | भगवान बुद्ध के निजी वैद्य (मस्तिष्क शल्य)। |
| 17 | दृढबल | चरक संहिता के पूरक (सिद्धि और कल्प स्थान)। |
| 18 | नागार्जुन (प्राचीन) | 'रस रत्नाकर' (धातुओं से औषधि निर्माण)। |
| 19 | निमि | नेत्र चिकित्सा (Ophthalmology) के आदि आचार्य। |
| 20 | कराल | नेत्र शल्य विशेषज्ञ। |
| 21 | औपधेनव | शलाक्य तंत्र (ENT) के आचार्य। |
| 22 | औरभ्र | सुश्रुत के सहपाठी (शल्य तंत्र)। |
| 23 | पौष्कलावत | शल्य तंत्र के प्राचीन आचार्य। |
| 24 | गोपुररक्षित | प्राचीन शल्य शास्त्री। |
| 25 | वैतरण | सुश्रुत संप्रदाय के आचार्य। |
| क्रम | आचार्य | प्रमुख ग्रंथ/टीका |
|---|---|---|
| 26 | वाग्भट (वृद्ध) | 'अष्टांग संग्रह' (गद्य और पद्य मिश्रित)। |
| 27 | वाग्भट (लघु) | 'अष्टांग हृदय' (आयुर्वेद का सबसे लोकप्रिय पद्य ग्रंथ)। |
| 28 | माधवकर | 'माधव निदान' (रोग निदान/Diagnosis में सर्वश्रेष्ठ)। |
| 29 | वृन्द | 'सिद्धयोग' (वृन्दमाधव)। |
| 30 | चक्रपाणि दत्त | 'आयुर्वेद दीपिका' (चरक संहिता की सर्वश्रेष्ठ टीका)। |
| 31 | डल्हण | 'निबंधसंग्रह' (सुश्रुत संहिता की मानक टीका)। |
| 32 | अरुणदत्त | 'सर्वांगसुंदरा' (अष्टांग हृदय की टीका)। |
| 33 | हेमाद्रि | 'आयुर्वेद रसायन' (अष्टांग हृदय टीका)। |
| 34 | गयदास | 'न्यायचंद्रिका' (सुश्रुत निदान स्थान टीका)। |
| 35 | जेज्जट | चरक संहिता के प्राचीन टीकाकार। |
| 36 | चन्द्रट | चिकित्सा कलिका के रचयिता। |
| 37 | तिसट | चिकित्सा कलिका (चन्द्रट के पिता)। |
| 38 | सोढल | 'गदनिग्रह' (विशाल औषधि संग्रह)। |
| 39 | वंगसेन | 'चिकित्सासार संग्रह' (वंगसेन संहिता)। |
| 40 | मिलण | 'चिकितिसामृत'। |
| 41 | इंदु | 'शशिलेखा' (अष्टांग संग्रह की एकमात्र टीका)। |
| 42 | भट्टार हरिश्चन्द्र | चरक के प्राचीनतम टीकाकार (भट्टार हरिश्चन्द्र संहिता)। |
| 43 | स्वामीकुमार | चरक पंजिका। |
| 44 | शिवदास सेन | 'तत्वचंद्रिका' (चक्रपाणि दत्त संग्रह टीका)। |
| 45 | निश्चल कर | 'रत्नप्रभा' (चक्रदत्त टीका)। |
| 46 | विजय रक्षित | 'मधुकोश' (माधव निदान की प्रसिद्ध टीका)। |
| 47 | श्रीकंठदत्त | 'मधुकोश' के सह-लेखक। |
| 48 | आढमल्ल | 'दीपिका' (शार्ङ्गधर संहिता टीका)। |
| 49 | काशीराम वैद्य | 'गूढार्थदीपिका' (शार्ङ्गधर टीका)। |
| 50 | बोपदेव | 'शताश्लोकी' और वैद्यक ग्रंथ। |
| क्रम | आचार्य | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 51 | शार्ङ्गधर | 'शार्ङ्गधर संहिता' (नाड़ी परीक्षा और अफीम का प्रथम वर्णन)। |
| 52 | भावमिश्र | 'भावप्रकाश' (लघुत्रयी का ग्रंथ, फिरंग रोग वर्णन)। |
| 53 | मदनपाल | 'मदनपाल निघण्टु' (औषधि शब्दकोश)। |
| 54 | नरहरि पंडित | 'राजनिघण्टु' (द्रव्यगुण विज्ञान)। |
| 55 | बसवरज | 'बसवरजीयम' (आंध्र की प्रसिद्ध चिकित्सा)। |
| 56 | नित्यनाथ | 'रसरत्नाकर' (रस शास्त्र और सिद्ध चिकित्सा)। |
| 57 | सोमदेव | 'रसेन्द्रचूडामणि' (पारा/Mercury शुद्धिकरण)। |
| 58 | यशोधर | 'रसप्रकाशसुधाकर' (रस शास्त्र)। |
| 59 | गोविंद भगवत्पाद | 'रसहृदयतंत्र' (शंकराचार्य के गुरु)। |
| 60 | लोलिम्बराज | 'वैद्यजीवन' (काव्यमय चिकित्सा ग्रंथ)। |
| 61 | त्रिम्मल भट्ट | 'योगतरंगिणी'। |
| 62 | दामोदर | 'आरोग्यचिंतामणि'। |
| 63 | रघुनाथ पंडित | 'भोजनकुतूहल' (आहार विज्ञान/Dietetics)। |
| 64 | हस्तिरुचि | 'वैद्यवल्लभ' (जैन वैद्य)। |
| 65 | हंसदेव | 'मृगपक्षिशास्त्र' (पशु चिकित्सा)। |
| 66 | नकुल | 'अश्वचिकित्सा' (घोड़ों की चिकित्सा)। |
| 67 | पालकाप्य | 'हस्त्यायुर्वेद' (हाथियों की चिकित्सा)। |
| 68 | सुरेश्वर | 'शब्दप्रदीप' (वृक्षायुर्वेद)। |
| 69 | शालिहोत्र | पशु चिकित्सा के आदि आचार्य। |
| 70 | इन्द्रकण्ठ वल्लभ | 'वैद्यचिंतामणि'। |
| 71 | गोविंद दास सेन | 'भैषज्य रत्नावली' (औषधि निर्माण का मानक ग्रंथ)। |
| 72 | बिन्दु | 'रसबिन्दु' (रस शास्त्र)। |
| 73 | माधव (रस) | 'रसकौमुदी'। |
| 74 | अनंतदेव | 'रसचिंतामणि'। |
| 75 | कैयादेव | 'कैयादेव निघण्टु' (पथ्य-अपथ्य विचार)। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 76 | गंगाधर राय कविराज | 'जल्पकल्पतरु' (चरक की वृहद् टीका)। |
| 77 | यौगींद्रनाथ सेन | चरकोपस्कार टीका। |
| 78 | गणनाथ सेन | 'प्रत्यक्षशारीरम्' (आधुनिक एनॉटमी और आयुर्वेद का समन्वय)। |
| 79 | यादवजी त्रिकमजी आचार्य | 'सिद्धयोग संग्रह' और संहिताओं का प्रामाणिक संपादन। |
| 80 | पी.एस. वारियर | कोट्टक्कल आर्य वैद्यशाला के संस्थापक (केरल आयुर्वेद)। |
| 81 | कविराज हरनामदास | वेद में आयुर्वेद के शोधकर्ता। |
| 82 | रवि दत्त शास्त्री | सुश्रुत संहिता का आधुनिक भाष्य। |
| 83 | बापालाल वैद्य | 'निघण्टु आदर्श' (वनस्पति विज्ञान शोध)। |
| 84 | प्रियव्रत शर्मा | 'द्रव्यगुण विज्ञान' और आयुर्वेद का इतिहास। |
| 85 | शिव शर्मा | आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता दिलाने वाले (पद्म भूषण)। |
| 86 | बृहस्पति देव त्रिगुणा | नाड़ी परीक्षा के विश्वविख्यात विशेषज्ञ (पद्म विभूषण)। |
| 87 | विश्वनाथ द्विवेदी | भारतीय रस शास्त्र और वनस्पति विज्ञान। |
| 88 | अत्रिदेव विद्यालंकार | आयुर्वेद का सांस्कृतिक इतिहास। |
| 89 | रामनिवास शर्मा | सहस्रयोग और दक्षिण भारतीय योगों का अनुवाद। |
| 90 | सत्यनारायण शास्त्री | चरक संहिता के विद्वान व्याख्याकार। |
| 91 | भगवान दास | तिब्बती चिकित्सा और आयुर्वेद का तुलनात्मक अध्ययन। |
| 92 | वी.जे. ठाकर | आयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों पर शोध। |
| 93 | बनवारी लाल गौड़ | आयुर्वेद के क्रिया शरीर (Physiology) पर कार्य। |
| 94 | आर.एच. सिंह | कायाचिकित्सा और पंचकर्म का वैज्ञानिक मानकीकरण। |
| 95 | एम.एस. वलियाथन | 'The Legacy of Caraka/Sushruta' (कार्डियक सर्जन और आयुर्वेद शोध)। |
| 96 | अशोक मजूमदार | आयुर्वेद में आधुनिक निदान विधियाँ। |
| 97 | के.आर. श्रीकांत मूर्ति | संहिताओं का अंग्रेजी अनुवाद और प्रसार। |
| 98 | दामोदर शर्मा गौड़ | आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष के व्याख्याता। |
| 99 | रघुवीर प्रसाद त्रिवेदी | आधुनिक शरीर विज्ञान और आयुर्वेद। |
| 100 | बलराज महर्षि | नाड़ी विज्ञान और जड़ी-बूटी शोध। |
आयुर्वेद की यह परंपरा हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल "रोग का न होना" नहीं है, बल्कि प्रसन्न आत्मेन्द्रियमनाः (आत्मा, इन्द्रियों और मन की प्रसन्नता) है।
**चरक** और **सुश्रुत** ने सहस्रों वर्ष पूर्व जो शल्य और चिकित्सा के सिद्धांत दिए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। **नागार्जुन** ने रस-औषधियों (Mineral Medicines) से क्रांति ला दी और **भावमिश्र** ने विदेशी जड़ी-बूटियों (जैसे चोपचीनी) को भी आयुर्वेद में अपनाया। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास इन महान जीवन-दाताओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिन्होंने मानवता को **अमरत्व और आरोग्य** का मार्ग दिखाया।

