100 Major Ayurveda & Medicine Scholars: आयुर्वेद और चिकित्सा के 100 प्रमुख विद्वान

Sooraj Krishna Shastri
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आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा: धन्वंतरि से आधुनिक शोध तक

"हिताहितं सुखं दुःखं, आयुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तं, आयुर्वेदः स उच्यते॥" (चरक संहिता)।

आयुर्वेद केवल रोग को ठीक करने की पद्धति नहीं है, अपितु यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। इसकी परंपरा दिव्य ज्ञान से आरंभ होकर वैज्ञानिक संहिताओं (चरक, सुश्रुत) और मध्यकालीन रस-शास्त्र (Rasa Shastra) तक विस्तृत है। प्रस्तुत शोधपरक सूची में हमने **100 ऐसे वैद्यों, आचार्यों और शोधकर्ताओं** को संकलित किया है, जिन्होंने मानव कल्याण के लिए जड़ी-बूटियों, शल्य चिकित्सा (Surgery) और निदान (Diagnosis) के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।

1. दिव्य युग एवं संहिता काल (वैदिक काल से 500 ई.पू.)
क्रमआचार्य/वैद्यप्रमुख योगदान/संहिता
1अश्विनी कुमारदेवताओं के वैद्य (शल्य चिकित्सा के आदि प्रवर्तक)।
2भगवान धन्वंतरिआयुर्वेद के जनक (समुद्र मंथन, शल्य प्रधान)।
3इन्द्रऋषियों को आयुर्वेद का ज्ञान देने वाले।
4महर्षि भरद्वाजइन्द्र से पृथ्वी पर आयुर्वेद लाने वाले प्रथम ऋषि।
5आत्रेय पुनर्वसुकायाचिकित्सा (Medicine) के आदि आचार्य।
6अग्निवेश'अग्निवेश तंत्र' (चरक संहिता का मूल रूप)।
7महर्षि सुश्रुत'सुश्रुत संहिता' (प्लास्टिक सर्जरी और शल्य के जनक)।
8महर्षि चरक'चरक संहिता' (चिकित्सा के सबसे महान ग्रंथकर्ता)।
9भेल (भेड)'भेल संहिता' (अग्निवेश के सहपाठी)।
10जतुकर्ण'जतुकर्ण संहिता' (प्राचीन कायचिकित्सा)।
11पाराशर'पाराशर संहिता' (विष विज्ञान और चिकित्सा)।
12हारीत'हारीत संहिता' (रस शास्त्र के प्रारंभिक संकेत)।
13क्षारपाणिक्षारपाणि संहिता (कायचिकित्सा)।
14महर्षि कश्यप'कश्यप संहिता' (बाल रोग/Pediatrics के जनक)।
15दिवोदास (धन्वंतरि)काशी के राजा और सुश्रुत के गुरु।
16जीवक (कुमारभृत्य)भगवान बुद्ध के निजी वैद्य (मस्तिष्क शल्य)।
17दृढबलचरक संहिता के पूरक (सिद्धि और कल्प स्थान)।
18नागार्जुन (प्राचीन)'रस रत्नाकर' (धातुओं से औषधि निर्माण)।
19निमिनेत्र चिकित्सा (Ophthalmology) के आदि आचार्य।
20करालनेत्र शल्य विशेषज्ञ।
21औपधेनवशलाक्य तंत्र (ENT) के आचार्य।
22औरभ्रसुश्रुत के सहपाठी (शल्य तंत्र)।
23पौष्कलावतशल्य तंत्र के प्राचीन आचार्य।
24गोपुररक्षितप्राचीन शल्य शास्त्री।
25वैतरणसुश्रुत संप्रदाय के आचार्य।
2. संग्रह काल एवं भाष्यकार (500 ई. - 1300 ई.)
क्रमआचार्यप्रमुख ग्रंथ/टीका
26वाग्भट (वृद्ध)'अष्टांग संग्रह' (गद्य और पद्य मिश्रित)।
27वाग्भट (लघु)'अष्टांग हृदय' (आयुर्वेद का सबसे लोकप्रिय पद्य ग्रंथ)।
28माधवकर'माधव निदान' (रोग निदान/Diagnosis में सर्वश्रेष्ठ)।
29वृन्द'सिद्धयोग' (वृन्दमाधव)।
30चक्रपाणि दत्त'आयुर्वेद दीपिका' (चरक संहिता की सर्वश्रेष्ठ टीका)।
31डल्हण'निबंधसंग्रह' (सुश्रुत संहिता की मानक टीका)।
32अरुणदत्त'सर्वांगसुंदरा' (अष्टांग हृदय की टीका)।
33हेमाद्रि'आयुर्वेद रसायन' (अष्टांग हृदय टीका)।
34गयदास'न्यायचंद्रिका' (सुश्रुत निदान स्थान टीका)।
35जेज्जटचरक संहिता के प्राचीन टीकाकार।
36चन्द्रटचिकित्सा कलिका के रचयिता।
37तिसटचिकित्सा कलिका (चन्द्रट के पिता)।
38सोढल'गदनिग्रह' (विशाल औषधि संग्रह)।
39वंगसेन'चिकित्सासार संग्रह' (वंगसेन संहिता)।
40मिलण'चिकितिसामृत'।
41इंदु'शशिलेखा' (अष्टांग संग्रह की एकमात्र टीका)।
42भट्टार हरिश्चन्द्रचरक के प्राचीनतम टीकाकार (भट्टार हरिश्चन्द्र संहिता)।
43स्वामीकुमारचरक पंजिका।
44शिवदास सेन'तत्वचंद्रिका' (चक्रपाणि दत्त संग्रह टीका)।
45निश्चल कर'रत्नप्रभा' (चक्रदत्त टीका)।
46विजय रक्षित'मधुकोश' (माधव निदान की प्रसिद्ध टीका)।
47श्रीकंठदत्त'मधुकोश' के सह-लेखक।
48आढमल्ल'दीपिका' (शार्ङ्गधर संहिता टीका)।
49काशीराम वैद्य'गूढार्थदीपिका' (शार्ङ्गधर टीका)।
50बोपदेव'शताश्लोकी' और वैद्यक ग्रंथ।
3. रस शास्त्र और निघण्टु काल (1300 ई. - 1800 ई.)
क्रमआचार्यप्रमुख योगदान
51शार्ङ्गधर'शार्ङ्गधर संहिता' (नाड़ी परीक्षा और अफीम का प्रथम वर्णन)।
52भावमिश्र'भावप्रकाश' (लघुत्रयी का ग्रंथ, फिरंग रोग वर्णन)।
53मदनपाल'मदनपाल निघण्टु' (औषधि शब्दकोश)।
54नरहरि पंडित'राजनिघण्टु' (द्रव्यगुण विज्ञान)।
55बसवरज'बसवरजीयम' (आंध्र की प्रसिद्ध चिकित्सा)।
56नित्यनाथ'रसरत्नाकर' (रस शास्त्र और सिद्ध चिकित्सा)।
57सोमदेव'रसेन्द्रचूडामणि' (पारा/Mercury शुद्धिकरण)।
58यशोधर'रसप्रकाशसुधाकर' (रस शास्त्र)।
59गोविंद भगवत्पाद'रसहृदयतंत्र' (शंकराचार्य के गुरु)।
60लोलिम्बराज'वैद्यजीवन' (काव्यमय चिकित्सा ग्रंथ)।
61त्रिम्मल भट्ट'योगतरंगिणी'।
62दामोदर'आरोग्यचिंतामणि'।
63रघुनाथ पंडित'भोजनकुतूहल' (आहार विज्ञान/Dietetics)।
64हस्तिरुचि'वैद्यवल्लभ' (जैन वैद्य)।
65हंसदेव'मृगपक्षिशास्त्र' (पशु चिकित्सा)।
66नकुल'अश्वचिकित्सा' (घोड़ों की चिकित्सा)।
67पालकाप्य'हस्त्यायुर्वेद' (हाथियों की चिकित्सा)।
68सुरेश्वर'शब्दप्रदीप' (वृक्षायुर्वेद)।
69शालिहोत्रपशु चिकित्सा के आदि आचार्य।
70इन्द्रकण्ठ वल्लभ'वैद्यचिंतामणि'।
71गोविंद दास सेन'भैषज्य रत्नावली' (औषधि निर्माण का मानक ग्रंथ)।
72बिन्दु'रसबिन्दु' (रस शास्त्र)।
73माधव (रस)'रसकौमुदी'।
74अनंतदेव'रसचिंतामणि'।
75कैयादेव'कैयादेव निघण्टु' (पथ्य-अपथ्य विचार)।
4. आधुनिक युग एवं पुनरुद्धारक (19वीं शताब्दी से वर्तमान)
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान
76गंगाधर राय कविराज'जल्पकल्पतरु' (चरक की वृहद् टीका)।
77यौगींद्रनाथ सेनचरकोपस्कार टीका।
78गणनाथ सेन'प्रत्यक्षशारीरम्' (आधुनिक एनॉटमी और आयुर्वेद का समन्वय)।
79यादवजी त्रिकमजी आचार्य'सिद्धयोग संग्रह' और संहिताओं का प्रामाणिक संपादन।
80पी.एस. वारियरकोट्टक्कल आर्य वैद्यशाला के संस्थापक (केरल आयुर्वेद)।
81कविराज हरनामदासवेद में आयुर्वेद के शोधकर्ता।
82रवि दत्त शास्त्रीसुश्रुत संहिता का आधुनिक भाष्य।
83बापालाल वैद्य'निघण्टु आदर्श' (वनस्पति विज्ञान शोध)।
84प्रियव्रत शर्मा'द्रव्यगुण विज्ञान' और आयुर्वेद का इतिहास।
85शिव शर्माआयुर्वेद को वैश्विक मान्यता दिलाने वाले (पद्म भूषण)।
86बृहस्पति देव त्रिगुणानाड़ी परीक्षा के विश्वविख्यात विशेषज्ञ (पद्म विभूषण)।
87विश्वनाथ द्विवेदीभारतीय रस शास्त्र और वनस्पति विज्ञान।
88अत्रिदेव विद्यालंकारआयुर्वेद का सांस्कृतिक इतिहास।
89रामनिवास शर्मासहस्रयोग और दक्षिण भारतीय योगों का अनुवाद।
90सत्यनारायण शास्त्रीचरक संहिता के विद्वान व्याख्याकार।
91भगवान दासतिब्बती चिकित्सा और आयुर्वेद का तुलनात्मक अध्ययन।
92वी.जे. ठाकरआयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों पर शोध।
93बनवारी लाल गौड़आयुर्वेद के क्रिया शरीर (Physiology) पर कार्य।
94आर.एच. सिंहकायाचिकित्सा और पंचकर्म का वैज्ञानिक मानकीकरण।
95एम.एस. वलियाथन'The Legacy of Caraka/Sushruta' (कार्डियक सर्जन और आयुर्वेद शोध)।
96अशोक मजूमदारआयुर्वेद में आधुनिक निदान विधियाँ।
97के.आर. श्रीकांत मूर्तिसंहिताओं का अंग्रेजी अनुवाद और प्रसार।
98दामोदर शर्मा गौड़आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष के व्याख्याता।
99रघुवीर प्रसाद त्रिवेदीआधुनिक शरीर विज्ञान और आयुर्वेद।
100बलराज महर्षिनाड़ी विज्ञान और जड़ी-बूटी शोध।
निष्कर्ष: सर्वे सन्तु निरामयाः (सब रोगमुक्त हों)

आयुर्वेद की यह परंपरा हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल "रोग का न होना" नहीं है, बल्कि प्रसन्न आत्मेन्द्रियमनाः (आत्मा, इन्द्रियों और मन की प्रसन्नता) है।

**चरक** और **सुश्रुत** ने सहस्रों वर्ष पूर्व जो शल्य और चिकित्सा के सिद्धांत दिए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। **नागार्जुन** ने रस-औषधियों (Mineral Medicines) से क्रांति ला दी और **भावमिश्र** ने विदेशी जड़ी-बूटियों (जैसे चोपचीनी) को भी आयुर्वेद में अपनाया। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास इन महान जीवन-दाताओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिन्होंने मानवता को **अमरत्व और आरोग्य** का मार्ग दिखाया।

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