100 Major Indian Mathematics & Astronomy Scholars:भारतीय गणित और खगोल विज्ञान के 100 प्रमुख विद्वान

Sooraj Krishna Shastri
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भारतीय गणित और खगोल विज्ञान: शुल्बसूत्र से आधुनिक काल तक

"यथा शिखा मयूराणां, नागानां मणयो यथा। तद्वद् वेदांगशास्त्राणां, गणितं मूर्धनि स्थितम्॥" (जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि सर्वोच्च है, वैसे ही वेदांग शास्त्रों में गणित सर्वोच्च है—वेदांग ज्योतिष)।

भारत विश्व को शून्य (Zero), दशमलव प्रणाली और त्रिकोणमिति (Trigonometry) देने वाला देश है। प्राचीन शुल्बसूत्रों में छिपे रेखागणित (Geometry) से लेकर केरल स्कूल के 'कैलकुलस' तक, भारतीय विद्वानों ने विज्ञान की आधारशिला रखी। प्रस्तुत सूची में हमने **100 महान गणितज्ञों और खगोलविदों** को उनके कालक्रम के अनुसार संकलित किया है।

1. वैदिक, शुल्ब एवं वेदांग काल (1500 ई.पू. - 400 ई.)
क्रमआचार्य/गणितज्ञप्रमुख योगदान/ग्रंथ
1लगध ऋषि'वेदांग ज्योतिष' (खगोल विज्ञान का प्राचीनतम ग्रंथ)।
2बौधायन'शुल्ब सूत्र' (पाइथागोरस प्रमेय का सर्वप्रथम उल्लेख)।
3आपस्तम्बयज्ञ वेदियों का ज्यामितीय (Geometrical) निर्माण।
4कात्यायनशुल्ब सूत्र (ज्यामिति और गणित)।
5मानव'मानव शुल्ब सूत्र' (वृत्त और वर्ग का क्षेत्रफल)।
6मैत्रायणीयप्राचीन ज्यामितीय सूत्र।
7वाराह (प्राचीन)प्राचीन वाराह संहिता।
8वधूलवधूल शुल्ब सूत्र।
9हिरण्यकेशिनज्यामितीय मापन विधियां।
10गार्ग्य (ज्योतिष)नक्षत्र विज्ञान के प्राचीन आचार्य।
11पितामह'पितामह सिद्धांत' (सूर्य सिद्धांत की पूर्वपीठिका)।
12वसिष्ठ (सिद्धांत)प्राचीन खगोलीय सिद्धांत।
13पराशर (ज्योतिष)'वृहत्पराशर होराशास्त्र' (ज्योतिष गणित)।
14यतिवृषभ'तिलोयपण्णत्ति' (जैन ब्रह्मांड विज्ञान और गणित)।
15उमास्वातितत्वार्थसूत्र (अनंत और गणितीय दर्शन)।
16भद्रबाहु'सूर्यप्रज्ञप्ति' और 'चंद्रप्रज्ञप्ति' (जैन खगोल)।
17यवनाचार्य'यवनजातक' (भारतीय-ग्रीक ज्योतिष संवाद)।
18स्फुजिध्वजखगोलीय गणना।
19सत्यचार्यध्रुव नाड़ी और गणितीय ज्योतिष।
20शौनक (खगोल)कालगणना के प्राचीन आचार्य।
21पिंगलद्विआधारी संख्या (Binary Numbers) के आदि प्रवर्तक।
22मेधतिथिबड़ी संख्याओं (10^12 तक) की गणना।
23कुन्दकुन्दसमय और आकाश (Space-Time) की गणितीय व्याख्या।
24विष्णुगुप्त (चाणक्य)अर्थशास्त्र में सांख्यिकी (Statistics) का प्रयोग।
25सर्ववर्माकातंत्र (व्याकरण के साथ गणितीय प्रयोग)।
2. सिद्धांत शिरोमणि और स्वर्ण युग (400 ई. - 1200 ई.)
क्रमगणितज्ञ/खगोलविदप्रमुख आविष्कार/ग्रंथ
26आर्यभट प्रथम'आर्यभटीय' (पृथ्वी का घूर्णन, π का मान, बीजगणित)।
27वराहमिहिर'पंचसिद्धांतिका' और 'वृहत्संहिता' (विश्वकोश)।
28भास्कर प्रथम'महाभास्करीय' (साइन फलन/Sin θ का सन्निकटन)।
29ब्रह्मगुप्त'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' (शून्य के नियम, चक्रीय चतुर्भुज)।
30लल्ल आचार्य'शिष्यधीवृद्धिद' (खगोलीय यंत्र)।
31वीरासेन'धवल टीका' (लघुगणक/Logarithms की अवधारणा)।
32महावीर आचार्य'गणितसारसंग्रह' (जैन गणित, ल.स.प/LCM)।
33श्रीधर आचार्य'पाटीगणित' (द्विघात समीकरण/Quadratic Formula)।
34पृथूदक स्वामीब्रह्मगुप्त के भाष्यकार (बीजगणित)।
35वटेश्वर'वटेश्वर सिद्धांत' (खगोल विज्ञान)।
36मंजुल (मुंजाल)'लघुमानस' (अयन चलन/Precession of Equinoxes)।
37आर्यभट द्वितीय'महासिद्धांत' (अंकगणित)।
38श्रीपति'सिद्धांतशेखर' और 'गणिततिलक'।
39नेमिचन्द्र सिद्धांतचक्रवर्ती'गोम्मटसार' (जीव और कर्म का गणित)।
40ब्रह्मदेव'करणप्रकाश' (त्रिकोणमिति का प्रयोग)।
41भास्कराचार्य (द्वितीय)'लीलावती' और 'सिद्धांतशिरोमणि' (गुरुत्वाकर्षण संकेत)।
42शतानंद'भास्वती' (सूर्य सिद्धांत पर आधारित)।
43सोमेश्वर'मानसोल्लास' (अंकगणित का उल्लेख)।
44हलायुध'मृतसंजीवनी' (पास्कल त्रिकोण/Meru Prastara)।
45उत्पल (भट्टोत्पल)वराहमिहिर के टीकाकार।
46जयदेव (गणित)चक्रीय विधि (Cyclic Method) का विकास।
47दशबलखगोलीय सारणियाँ।
48गोविंदस्वामीकेरल गणित परंपरा के आदि आचार्य।
49शङ्करनारायणखगोल प्रेक्षण।
50उदयदिवाकर'सुंदरी' टीका (लीलावती पर)।
3. मध्यकाल और केरल स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स (1200 ई. - 1800 ई.)
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान (Calculus & Series)
51नारायण पंडित'गणितकौमुदी' (क्रमचय-संचय/Permutation)।
52माधव (संगमग्राम)'अनंत श्रेणी' (Infinite Series - न्यूटन से पूर्व)।
53परमेश्वर'दृग्गणित' (खगोलीय प्रेक्षण प्रणाली)।
54नीलकंठ सोमयाजी'तंत्रसंग्रह' (ग्रहों का सटीक मॉडल)।
55ज्येष्ठदेव'युक्तिभाषा' (मलयालम में कैलकुलस का प्रथम ग्रंथ)।
56गणेश दैवज्ञ'ग्रहलाघव' (पंचांग निर्माण की सरल विधि)।
57मकरंद'मकरंद सारणी' (सूर्य सिद्धांत आधारित)।
58केशव दैवज्ञगणेश दैवज्ञ के पिता और गुरु।
59ज्ञानराज'सुंदरसिद्धांत'।
60सूर्य दैवज्ञलीलावती टीकाकार।
61रंगनाथ'गूढार्थप्रकाशिका' (सूर्यसिद्धांत टीका)।
62शंकर वारियरमाधव की श्रेणियों का विस्तार।
63चित्रभानुबीजगणित समीकरण।
64अच्युत पिषारटि'स्फुटनिर्णय' (ग्रहण गणना)।
65कमलाकर'सिद्धांततत्वविवेक' (इस्लामी और भारतीय खगोल समन्वय)।
66मुनीश्वर'सिद्धांतसार्वभौम' (भास्कराचार्य के विरोधी मत)।
67नित्यानन्द'सर्वसिद्धांतराज'।
68कृष्ण दैवज्ञबीजगणित के टीकाकार (जहांगीर के समय)।
69जगन्नाथ सम्राट'रेखागणित' (सवाई जयसिंह के दरबारी, यूक्लिड का अनुवाद)।
70नयनसुख उपाध्याय'उकर ग्रंथ' (Spherical Geometry)।
71पुतुमन सोमयाजी'करणपद्धति' (गणितीय सूत्र)।
72शंकर वर्मन'सद्रत्नमाला' (केरल स्कूल के अंतिम आचार्य)।
73महेंद्र सूरी'यंत्रराज' (एस्ट्रोलेब यंत्र)।
74मलयेंदु सूरीयंत्र निर्माण।
75पद्मनाभबीजगणित और यंत्र।
4. आधुनिक काल और गणित इतिहासकार (1800 ई. - वर्तमान)
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान
76बापूदेव शास्त्रीप्राचीन गणित का आधुनिक संपादन।
77सुधाकर द्विवेदी'दीर्घवृत्तलक्षणम्' और भारतीय गणित इतिहास।
78शंकर बालकृष्ण दीक्षित'भारतीय ज्योतिष' (खगोल का मानक इतिहास)।
79रामानुजन (श्रीनिवास)'अनंत की खोज' (आधुनिक भारत के महानतम गणितज्ञ)।
80स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ'वैदिक गणित' (16 सूत्र)।
81विभूतिभूषण दत्त'History of Hindu Mathematics'।
82अवधेश नारायण सिंहभारतीय गणित इतिहास के सह-लेखक।
83के.एस. शुक्लआर्यभटीय और महाभास्करीय का संपादन।
84के.वी. सरमाकेरल स्कूल की पांडुलिपियों की खोज और प्रकाशन।
85टी.ए. सरस्वती अम्मा'Geometry in Ancient and Medieval India'।
86सी.एन. श्रीनिवासनभारतीय गणित का इतिहास।
87एस. बालाचंद्र रावभारतीय खगोल विज्ञान पर आधुनिक शोध।
88सुभाष काकवैदिक खगोल विज्ञान और कोड।
89आर.सी. गुप्त'गणित भारती' (जर्नल) के संस्थापक।
90टी.एस. कुप्पन्ना शास्त्रीवेदांग ज्योतिष और सूर्यसिद्धांत शोध।
91सतीश चन्द्र विद्याभूषणभारतीय तर्कशास्त्र और विज्ञान।
92पी.सी. सेनगुप्ताप्राचीन भारतीय काल गणना।
93ए.के. बागभारत में गणित और विज्ञान।
94एस.आर. शर्मासंस्कृत खगोलीय यंत्रों पर शोध।
95मंजुला दवेलीलावती का आधुनिक अध्ययन।
96के. रामासुब्रमण्यमकेरल स्कूल और तंत्रसंग्रह पर आईआईटी शोध।
97एम.एस. श्रीरामभारतीय खगोल विज्ञान का आधुनिक प्रमाणीकरण।
98एम.डी. श्रीनिवासभारतीय विज्ञान परंपरा।
99अनुपम जैनजैन गणित पर विशद शोध।
100चंद्रकांत राजूकैलकुलस के भारतीय मूल (Cultural Foundations of Math)।
निष्कर्ष: भारत - गणित की जन्मभूमि

उपरोक्त 100 विद्वानों की सूची यह सिद्ध करती है कि भारत केवल अध्यात्म की भूमि नहीं, अपितु तर्क और विज्ञान की भी भूमि है। जब विश्व गणना करना सीख रहा था, तब **आर्यभट** पृथ्वी की परिधि माप रहे थे और **ब्रह्मगुप्त** शून्य के नियम लिख रहे थे।

मध्यकाल में जब नालंदा जैसे विश्वविद्यालय नष्ट हुए, तब भी दक्षिण भारत के **केरल स्कूल** ने **माधव** के नेतृत्व में गणित की मशाल जलाए रखी, जिससे आगे चलकर 'कैलकुलस' का विकास हुआ। **भगवत दर्शन** का यह संकलन उन अज्ञात और विख्यात वैज्ञानिक ऋषियों को नमन है, जिन्होंने मानवता को विज्ञान की दृष्टि दी।

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