100 Major Dharmashastra & Legal Scholars List: धर्मशास्त्र और न्यायशास्त्र के 100 प्रमुख विद्वान

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
धर्मशास्त्र और न्यायशास्त्र: भारतीय विधिक परंपरा का विकास

भारतीय सभ्यता में 'धर्म' का अर्थ केवल उपासना नहीं, बल्कि समाज के नैतिक और विधिक नियमों का समुच्चय है। धर्मशास्त्र (Dharmashastra) वह विज्ञान है जो व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र के कर्तव्यों एवं अधिकारों को परिभाषित करता है। यह प्राचीन **धर्मसूत्रों** से आरंभ होकर **स्मृतियों** और बाद में उन पर लिखी गई **टीकाओं (Commentaries)** के माध्यम से विकसित हुआ।

प्रस्तुत सूची में हमने **100 ऐसे मनीषियों** को संकलित किया है जिन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था (Jurisprudence) की नींव रखी। जहाँ मनु ने आचार संहिता दी, वहीं याज्ञवल्क्य ने उसे विधिक स्पष्टता प्रदान की। मध्यकाल में विज्ञानेश्वर की 'मिताक्षरा' आज भी आधुनिक भारतीय कानून (हिंदू लॉ) का आधार बनी हुई है। यह सूची भारत के 'Rule of Law' की प्राचीनता का प्रमाण है।

1. धर्मसूत्र एवं स्मृतिकार (प्राचीन काल से 500 ई. तक)
क्रमआचार्य/स्मृतिकारप्रमुख ग्रंथ/योगदान
1गौतम ऋषि'गौतम धर्मसूत्र' (सबसे प्राचीन उपलब्ध धर्मसूत्र)।
2बौधायन'बौधायन धर्मसूत्र' (विधि और अनुष्ठान)।
3आपस्तम्ब'आपस्तम्ब धर्मसूत्र' (समाज और दंड व्यवस्था)।
4वशिष्ठ'वशिष्ठ धर्मसूत्र' (उत्तराधिकार और विवाह नियम)।
5विष्णु'विष्णु धर्मसूत्र' (वैष्णव धर्म और विधि)।
6मनु (स्वायम्भुव)'मनुस्मृति' (विश्व की प्रथम व्यवस्थित विधि संहिता)।
7याज्ञवल्क्य'याज्ञवल्क्य स्मृति' (व्यावहारिक विधिक प्रक्रिया)।
8नारद'नारद स्मृति' (शुद्ध विधिक नियमों पर आधारित)।
9पाराशर'पाराशर स्मृति' (कलियुग के लिए विहित धर्म)।
10बृहस्पतिबृहस्पति स्मृति (दीवानी और फौजदारी कानून)।
11कात्यायनकात्यायन स्मृति (विधिक प्रक्रिया और स्त्रीधन)।
12देवल ऋषि'देवल स्मृति' (समाज परिवर्तन और शुद्धि नियम)।
13हारीतहारीत स्मृति (ब्रह्मचर्य और समाज शास्त्र)।
14अंगिराप्रायश्चित और नियम।
15यमयम स्मृति (दंड और सदाचार)।
16अत्रिअत्रि स्मृति (सामाजिक आचरण)।
17शंख-लिखितशंख-लिखित धर्मसूत्र (प्रशासनिक कानून)।
18पुलस्त्यपुलस्त्य स्मृति।
19संवर्तसंवर्त स्मृति।
20औशनसराजनीति और धर्म का समन्वय।
21प्रजापतिविवाह और कौटुम्बिक नियम।
22कश्यपकश्यप स्मृति।
23दक्षदक्ष स्मृति (गृहस्थ धर्म)।
24शातातपप्रायश्चित और कर्म फल।
25व्यास (स्मृति)व्यास स्मृति (समाज व्यवस्था)।
2. भाष्यकार एवं विधिक व्याख्याता (600 ई. - 1300 ई.)
क्रमविद्वान/भाष्यकारग्रंथ/विशेष व्याख्या
26असर्हायनारदस्मृति के प्राचीनतम भाष्यकार।
27मेधातिथि'मनुभाष्य' (मनुस्मृति की सर्वश्रेष्ठ और तर्कसंगत व्याख्या)।
28भारुचिविष्णु और मनु स्मृतियों के टीकाकार।
29विश्वरूप'बालक्रीड़ा' (याज्ञवल्क्य स्मृति की प्राचीन टीका)।
30विज्ञानेश्वर'मिताक्षरा' (संपूर्ण भारत में मान्य उत्तराधिकार विधि)।
31जीमूतवाहन'दायभाग' (बंगाल में प्रचलित उत्तराधिकार विधि)।
32गोविन्दराजमनुस्मृति की 'मनुटीका'।
33कुल्लूक भट्ट'मन्वर्थमुक्तावली' (मनुस्मृति की सबसे लोकप्रिय टीका)।
34अपरार्कयाज्ञवल्क्य स्मृति पर विस्तृत विधिक भाष्य।
35देवणभट्ट'स्मृतिचन्द्रिका' (दक्षिण भारत का प्रामाणिक ग्रंथ)।
36हेमाद्रि'चतुर्वर्गचिन्तामणि' (धर्मशास्त्र का महाकोश)।
37लक्ष्मोधर'कृत्यकल्पतरु' (विशाल विधिक संग्रह)।
38अनिरुद्ध भट्ट'हारलता' (बंगाल की धर्मशास्त्रीय परंपरा)।
39बल्लाल सेन'दानसागर' और 'अद्भुतसागर' (राजा और विद्वान)।
40हलायुध'ब्राह्मणसर्वस्व'।
41चण्डेश्वर'राजनीतिरत्नाकर' (प्रशासन और कानून)।
42माधवाचार्य'पराशर-माधवीय' (विजयनगर साम्राज्य का आधार)।
43विश्वेश्वर भट्ट'मदनपारिजात' (विधिक संग्रह)।
44शूलपाणि'दीपकलिका' (याज्ञवल्क्य टीका)।
45वाचस्पति मिश्र (नव्य)'विवादचिन्तामणि' (मिथिला की कानूनी परंपरा)।
46प्रतापरुद्र देव'सरस्वतीविलास' (उड़ीसा का राजकीय कानून)।
47कमलाकर भट्ट'निर्णयसिन्धु' (आधुनिक समय में सर्वाधिक मान्य)।
48नीलकण्ठ भट्ट'भगवन्तभास्कर' (विशेषकर 'व्यवहारमयूख')।
49नन्दपण्डित'दत्तकमीमांसा' (गोद लेने संबंधी कानून का आधार)।
50जगन्नाथ तर्कपञ्चानन'विवादभङ्गार्णव' (ब्रिटिश काल का आधार)।
3. राजनीति, न्याय और उत्तर-मध्यकाल (1400 ई. - 1900 ई.)
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान
51कौटिल्य (चाणक्य)'अर्थशास्त्र' (प्रशासनिक और नागरिक कानून)।
52शुक्राचार्य'शुक्रनीति' (राज व्यवस्था और दंड नीति)।
53कामन्दक'नीतिसार' (चाणक्य परंपरा का विस्तार)।
54सोमदेव सूरि'नीतिवाक्यामृत' (जैन नीतिशास्त्र)।
55भोजराज'युक्तिकल्पतरु' (विधिक और तकनीकी वास्तु)।
56टोडरमल'टोडरानन्द' (मुगल काल में धर्मशास्त्रीय संकलन)।
57मित्र मिश्र'वीरमित्रोदय' (विशाल विधिक भाष्य)।
58अनंतदेव'स्मृतिकौस्तुभ'।
59काशीनाथ उपाध्याय'धर्मसिन्धु' (कर्मकांड और विधिक निर्णय)।
60बालकृष्ण भट्टविधिक विमर्श।
61नागेश भट्ट'वैयाकरणसिद्धान्त' के साथ विधिक व्याख्या।
62बालशास्त्री जाम्भेकरधर्मशास्त्र का आधुनिक अध्ययन।
63वैद्यनाथ पायगुण्डेटीकाकार।
64राघवानन्दमनुस्मृति टीकाकार।
65नारायण भट्ट'त्रिस्थलीसेतु' (तीर्थ और समाज विधि)।
66दिनकर भट्ट'दिनकरोद्योत'।
67रघुनाथ शिरोमणिन्याय और विधि का तार्किक समन्वय।
68रुद्रधर'वर्षकृत्य' (मिथिला परंपरा)।
69मदनपाल'मदनविनोद'।
70दलपति'नृसिंहप्रसाद' (विशाल संकलन)।
71केशव पंडितशिवाजी महाराज के विधिक सलाहकार (दाण्डनीतिक)।
72भास्कर रायधर्म और तंत्र का समन्वय।
73वैद्यनाथ तत्त्वनिधिबंगाल की स्मृति परंपरा।
74श्रीधर (स्मृति)'स्मृतिमुक्ताफल' (दक्षिण भारत)।
75गंगाधर भट्टविधिक निबंध।
4. आधुनिक शोध एवं विधिक इतिहासकार (1900 ई. - वर्तमान)
क्रमविद्वानप्रमुख शोध/कार्य
76पाण्डुरंग वामन काणे'History of Dharmashastra' (भारत रत्न, 5 भाग)।
77लक्ष्मणशास्त्री जोशी'धर्मकोश' (धर्मशास्त्र का आधुनिक संपादन)।
78डॉ. बी.आर. अम्बेडकरधर्मशास्त्र और कानून का आलोचनात्मक व विधिक अध्ययन।
79गंगानाथ झामनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद और विस्तृत शोध।
80राजेन्द्रलाल मित्रप्राचीन विधिक पांडुलिपियों की खोज।
81एस. वरदाचारियार'The Hindu Judicial System'।
82यू.सी. सरकार'Epochs in Hindu Legal History'।
83जे.डी.एम. डरेटहिंदू कानून और धर्मशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन।
84लुडो रोचरधर्मशास्त्र और स्मृतियों पर वैश्विक शोध।
85रोबर्ट लिंगाट'The Classical Law of India'।
86पी.वी. राजमन्नारप्राचीन न्याय व्यवस्था पर विधिक विचार।
87मृदुला मारुतेधर्मशास्त्र और महिला अधिकार।
88पी.एन. सेन'Hindu Jurisprudence'।
89के.पी. जायसवाल'Manu and Yajnavalkya' (विधिक तुलना)।
90जी.डी. बनर्जी'Hindu Law of Marriage and Stridhana'।
91डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनधर्म का दार्शनिक और विधिक पक्ष।
92स्वामी दयानन्द सरस्वतीस्मृतियों की वैदिक कसौटी पर व्याख्या।
93मदन मोहन मालवीयधर्म और आधुनिक समाज का समन्वय।
94गोविन्द दासधर्मशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन।
95नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्यप्राचीन विधिक संस्थाओं का इतिहास।
96वी.आर. कृष्ण अय्यरप्राचीन न्याय के विधिक मूल्य और आधुनिकता।
97एस.डी. भारद्वाजस्मृति शोध।
98रामशरण शर्माप्राचीन भारत की राज व्यवस्था और न्याय।
99अनंत सदाशिव अल्तेकरप्राचीन भारत में राज्य और विधि।
100पैट्रिक ओलिवेलधर्मसूत्रों और मनुस्मृति का आधुनिक भाषावैज्ञानिक शोध।
निष्कर्ष: न्याय की शाश्वत विरासत

धर्मशास्त्र और न्यायशास्त्र के इन 100 विद्वानों की सूची यह सिद्ध करती है कि भारत में कानून की अवधारणा अत्यंत प्राचीन और परिष्कृत थी। 'न्याय' यहाँ केवल दंड नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की स्थापना का मार्ग था। ऋषियों की स्मृतियों से शुरू होकर यह यात्रा आधुनिक न्यायालयों के 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' तक अविच्छिन्न है।

**पाण्डुरंग वामन काणे** जैसे आधुनिक मनीषियों ने इस गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित कर दुनिया के सामने रखा। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास उन सभी विधिक ऋषियों को नमन है, जिन्होंने समाज को एक सूत्र में बांधने वाली न्याय व्यवस्था प्रदान की।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!