भारतीय सभ्यता में 'धर्म' का अर्थ केवल उपासना नहीं, बल्कि समाज के नैतिक और विधिक नियमों का समुच्चय है। धर्मशास्त्र (Dharmashastra) वह विज्ञान है जो व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र के कर्तव्यों एवं अधिकारों को परिभाषित करता है। यह प्राचीन **धर्मसूत्रों** से आरंभ होकर **स्मृतियों** और बाद में उन पर लिखी गई **टीकाओं (Commentaries)** के माध्यम से विकसित हुआ।
प्रस्तुत सूची में हमने **100 ऐसे मनीषियों** को संकलित किया है जिन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था (Jurisprudence) की नींव रखी। जहाँ मनु ने आचार संहिता दी, वहीं याज्ञवल्क्य ने उसे विधिक स्पष्टता प्रदान की। मध्यकाल में विज्ञानेश्वर की 'मिताक्षरा' आज भी आधुनिक भारतीय कानून (हिंदू लॉ) का आधार बनी हुई है। यह सूची भारत के 'Rule of Law' की प्राचीनता का प्रमाण है।
| क्रम | आचार्य/स्मृतिकार | प्रमुख ग्रंथ/योगदान |
|---|---|---|
| 1 | गौतम ऋषि | 'गौतम धर्मसूत्र' (सबसे प्राचीन उपलब्ध धर्मसूत्र)। |
| 2 | बौधायन | 'बौधायन धर्मसूत्र' (विधि और अनुष्ठान)। |
| 3 | आपस्तम्ब | 'आपस्तम्ब धर्मसूत्र' (समाज और दंड व्यवस्था)। |
| 4 | वशिष्ठ | 'वशिष्ठ धर्मसूत्र' (उत्तराधिकार और विवाह नियम)। |
| 5 | विष्णु | 'विष्णु धर्मसूत्र' (वैष्णव धर्म और विधि)। |
| 6 | मनु (स्वायम्भुव) | 'मनुस्मृति' (विश्व की प्रथम व्यवस्थित विधि संहिता)। |
| 7 | याज्ञवल्क्य | 'याज्ञवल्क्य स्मृति' (व्यावहारिक विधिक प्रक्रिया)। |
| 8 | नारद | 'नारद स्मृति' (शुद्ध विधिक नियमों पर आधारित)। |
| 9 | पाराशर | 'पाराशर स्मृति' (कलियुग के लिए विहित धर्म)। |
| 10 | बृहस्पति | बृहस्पति स्मृति (दीवानी और फौजदारी कानून)। |
| 11 | कात्यायन | कात्यायन स्मृति (विधिक प्रक्रिया और स्त्रीधन)। |
| 12 | देवल ऋषि | 'देवल स्मृति' (समाज परिवर्तन और शुद्धि नियम)। |
| 13 | हारीत | हारीत स्मृति (ब्रह्मचर्य और समाज शास्त्र)। |
| 14 | अंगिरा | प्रायश्चित और नियम। |
| 15 | यम | यम स्मृति (दंड और सदाचार)। |
| 16 | अत्रि | अत्रि स्मृति (सामाजिक आचरण)। |
| 17 | शंख-लिखित | शंख-लिखित धर्मसूत्र (प्रशासनिक कानून)। |
| 18 | पुलस्त्य | पुलस्त्य स्मृति। |
| 19 | संवर्त | संवर्त स्मृति। |
| 20 | औशनस | राजनीति और धर्म का समन्वय। |
| 21 | प्रजापति | विवाह और कौटुम्बिक नियम। |
| 22 | कश्यप | कश्यप स्मृति। |
| 23 | दक्ष | दक्ष स्मृति (गृहस्थ धर्म)। |
| 24 | शातातप | प्रायश्चित और कर्म फल। |
| 25 | व्यास (स्मृति) | व्यास स्मृति (समाज व्यवस्था)। |
| क्रम | विद्वान/भाष्यकार | ग्रंथ/विशेष व्याख्या |
|---|---|---|
| 26 | असर्हाय | नारदस्मृति के प्राचीनतम भाष्यकार। |
| 27 | मेधातिथि | 'मनुभाष्य' (मनुस्मृति की सर्वश्रेष्ठ और तर्कसंगत व्याख्या)। |
| 28 | भारुचि | विष्णु और मनु स्मृतियों के टीकाकार। |
| 29 | विश्वरूप | 'बालक्रीड़ा' (याज्ञवल्क्य स्मृति की प्राचीन टीका)। |
| 30 | विज्ञानेश्वर | 'मिताक्षरा' (संपूर्ण भारत में मान्य उत्तराधिकार विधि)। |
| 31 | जीमूतवाहन | 'दायभाग' (बंगाल में प्रचलित उत्तराधिकार विधि)। |
| 32 | गोविन्दराज | मनुस्मृति की 'मनुटीका'। |
| 33 | कुल्लूक भट्ट | 'मन्वर्थमुक्तावली' (मनुस्मृति की सबसे लोकप्रिय टीका)। |
| 34 | अपरार्क | याज्ञवल्क्य स्मृति पर विस्तृत विधिक भाष्य। |
| 35 | देवणभट्ट | 'स्मृतिचन्द्रिका' (दक्षिण भारत का प्रामाणिक ग्रंथ)। |
| 36 | हेमाद्रि | 'चतुर्वर्गचिन्तामणि' (धर्मशास्त्र का महाकोश)। |
| 37 | लक्ष्मोधर | 'कृत्यकल्पतरु' (विशाल विधिक संग्रह)। |
| 38 | अनिरुद्ध भट्ट | 'हारलता' (बंगाल की धर्मशास्त्रीय परंपरा)। |
| 39 | बल्लाल सेन | 'दानसागर' और 'अद्भुतसागर' (राजा और विद्वान)। |
| 40 | हलायुध | 'ब्राह्मणसर्वस्व'। |
| 41 | चण्डेश्वर | 'राजनीतिरत्नाकर' (प्रशासन और कानून)। |
| 42 | माधवाचार्य | 'पराशर-माधवीय' (विजयनगर साम्राज्य का आधार)। |
| 43 | विश्वेश्वर भट्ट | 'मदनपारिजात' (विधिक संग्रह)। |
| 44 | शूलपाणि | 'दीपकलिका' (याज्ञवल्क्य टीका)। |
| 45 | वाचस्पति मिश्र (नव्य) | 'विवादचिन्तामणि' (मिथिला की कानूनी परंपरा)। |
| 46 | प्रतापरुद्र देव | 'सरस्वतीविलास' (उड़ीसा का राजकीय कानून)। |
| 47 | कमलाकर भट्ट | 'निर्णयसिन्धु' (आधुनिक समय में सर्वाधिक मान्य)। |
| 48 | नीलकण्ठ भट्ट | 'भगवन्तभास्कर' (विशेषकर 'व्यवहारमयूख')। |
| 49 | नन्दपण्डित | 'दत्तकमीमांसा' (गोद लेने संबंधी कानून का आधार)। |
| 50 | जगन्नाथ तर्कपञ्चानन | 'विवादभङ्गार्णव' (ब्रिटिश काल का आधार)। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 51 | कौटिल्य (चाणक्य) | 'अर्थशास्त्र' (प्रशासनिक और नागरिक कानून)। |
| 52 | शुक्राचार्य | 'शुक्रनीति' (राज व्यवस्था और दंड नीति)। |
| 53 | कामन्दक | 'नीतिसार' (चाणक्य परंपरा का विस्तार)। |
| 54 | सोमदेव सूरि | 'नीतिवाक्यामृत' (जैन नीतिशास्त्र)। |
| 55 | भोजराज | 'युक्तिकल्पतरु' (विधिक और तकनीकी वास्तु)। |
| 56 | टोडरमल | 'टोडरानन्द' (मुगल काल में धर्मशास्त्रीय संकलन)। |
| 57 | मित्र मिश्र | 'वीरमित्रोदय' (विशाल विधिक भाष्य)। |
| 58 | अनंतदेव | 'स्मृतिकौस्तुभ'। |
| 59 | काशीनाथ उपाध्याय | 'धर्मसिन्धु' (कर्मकांड और विधिक निर्णय)। |
| 60 | बालकृष्ण भट्ट | विधिक विमर्श। |
| 61 | नागेश भट्ट | 'वैयाकरणसिद्धान्त' के साथ विधिक व्याख्या। |
| 62 | बालशास्त्री जाम्भेकर | धर्मशास्त्र का आधुनिक अध्ययन। |
| 63 | वैद्यनाथ पायगुण्डे | टीकाकार। |
| 64 | राघवानन्द | मनुस्मृति टीकाकार। |
| 65 | नारायण भट्ट | 'त्रिस्थलीसेतु' (तीर्थ और समाज विधि)। |
| 66 | दिनकर भट्ट | 'दिनकरोद्योत'। |
| 67 | रघुनाथ शिरोमणि | न्याय और विधि का तार्किक समन्वय। |
| 68 | रुद्रधर | 'वर्षकृत्य' (मिथिला परंपरा)। |
| 69 | मदनपाल | 'मदनविनोद'। |
| 70 | दलपति | 'नृसिंहप्रसाद' (विशाल संकलन)। |
| 71 | केशव पंडित | शिवाजी महाराज के विधिक सलाहकार (दाण्डनीतिक)। |
| 72 | भास्कर राय | धर्म और तंत्र का समन्वय। |
| 73 | वैद्यनाथ तत्त्वनिधि | बंगाल की स्मृति परंपरा। |
| 74 | श्रीधर (स्मृति) | 'स्मृतिमुक्ताफल' (दक्षिण भारत)। |
| 75 | गंगाधर भट्ट | विधिक निबंध। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख शोध/कार्य |
|---|---|---|
| 76 | पाण्डुरंग वामन काणे | 'History of Dharmashastra' (भारत रत्न, 5 भाग)। |
| 77 | लक्ष्मणशास्त्री जोशी | 'धर्मकोश' (धर्मशास्त्र का आधुनिक संपादन)। |
| 78 | डॉ. बी.आर. अम्बेडकर | धर्मशास्त्र और कानून का आलोचनात्मक व विधिक अध्ययन। |
| 79 | गंगानाथ झा | मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद और विस्तृत शोध। |
| 80 | राजेन्द्रलाल मित्र | प्राचीन विधिक पांडुलिपियों की खोज। |
| 81 | एस. वरदाचारियार | 'The Hindu Judicial System'। |
| 82 | यू.सी. सरकार | 'Epochs in Hindu Legal History'। |
| 83 | जे.डी.एम. डरेट | हिंदू कानून और धर्मशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन। |
| 84 | लुडो रोचर | धर्मशास्त्र और स्मृतियों पर वैश्विक शोध। |
| 85 | रोबर्ट लिंगाट | 'The Classical Law of India'। |
| 86 | पी.वी. राजमन्नार | प्राचीन न्याय व्यवस्था पर विधिक विचार। |
| 87 | मृदुला मारुते | धर्मशास्त्र और महिला अधिकार। |
| 88 | पी.एन. सेन | 'Hindu Jurisprudence'। |
| 89 | के.पी. जायसवाल | 'Manu and Yajnavalkya' (विधिक तुलना)। |
| 90 | जी.डी. बनर्जी | 'Hindu Law of Marriage and Stridhana'। |
| 91 | डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | धर्म का दार्शनिक और विधिक पक्ष। |
| 92 | स्वामी दयानन्द सरस्वती | स्मृतियों की वैदिक कसौटी पर व्याख्या। |
| 93 | मदन मोहन मालवीय | धर्म और आधुनिक समाज का समन्वय। |
| 94 | गोविन्द दास | धर्मशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन। |
| 95 | नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य | प्राचीन विधिक संस्थाओं का इतिहास। |
| 96 | वी.आर. कृष्ण अय्यर | प्राचीन न्याय के विधिक मूल्य और आधुनिकता। |
| 97 | एस.डी. भारद्वाज | स्मृति शोध। |
| 98 | रामशरण शर्मा | प्राचीन भारत की राज व्यवस्था और न्याय। |
| 99 | अनंत सदाशिव अल्तेकर | प्राचीन भारत में राज्य और विधि। |
| 100 | पैट्रिक ओलिवेल | धर्मसूत्रों और मनुस्मृति का आधुनिक भाषावैज्ञानिक शोध। |
धर्मशास्त्र और न्यायशास्त्र के इन 100 विद्वानों की सूची यह सिद्ध करती है कि भारत में कानून की अवधारणा अत्यंत प्राचीन और परिष्कृत थी। 'न्याय' यहाँ केवल दंड नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की स्थापना का मार्ग था। ऋषियों की स्मृतियों से शुरू होकर यह यात्रा आधुनिक न्यायालयों के 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' तक अविच्छिन्न है।
**पाण्डुरंग वामन काणे** जैसे आधुनिक मनीषियों ने इस गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित कर दुनिया के सामने रखा। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास उन सभी विधिक ऋषियों को नमन है, जिन्होंने समाज को एक सूत्र में बांधने वाली न्याय व्यवस्था प्रदान की।

