100 Major Sanskrit Literature & Poetics Scholars:संस्कृत साहित्य और काव्यशास्त्र के 100 प्रमुख विद्वानों की कालक्रम सूची

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
संस्कृत साहित्य और काव्यशास्त्र: एक ऐतिहासिक एवं शोधपरक अनुशीलन

संस्कृत साहित्य न केवल भारत की, अपितु विश्व की प्राचीनतम और समृद्धतम ज्ञान परंपराओं में से एक है। जहाँ एक ओर महाकवि कालिदास, भारवि और माघ जैसे कवियों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा से महाकाव्यों और नाटकों का सृजन किया, वहीं दूसरी ओर भरतमुनि, मम्मट और विश्वनाथ जैसे आचार्यों ने 'काव्यशास्त्र' (Poetics) के माध्यम से सौंदर्य और रस के सिद्धांतों को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। यह सूची इन्हीं 100 कालजयी विद्वानों के योगदान को रेखांकित करती है।

इस शोधपरक सूची को कालक्रम के अनुसार चार प्रमुख युगों में विभाजित किया गया है: **आदिकाल और महाकाव्य काल**, **शास्त्रीय साहित्य का स्वर्ण युग**, **काव्यशास्त्र (अलंकार शास्त्र) का विकास काल**, और **आधुनिक संस्कृत साहित्य**। यह वर्गीकरण पाठकों को लौकिक संस्कृत के विकास और विभिन्न संप्रदायों (जैसे रस, अलंकार, ध्वनि, वक्रोक्ति) के उदय को समझने में सहायता करेगा।

1. आदिकाल एवं आरंभिक साहित्य (रामायण-महाभारत काल से 200 ई.पू.)
क्रमविद्वान/कविप्रमुख रचना/योगदान
1महर्षि वाल्मीकि'रामायण' (आदिकाव्य), लौकिक छंद के जनक।
2महर्षि वेदव्यास'महाभारत' (इतिहास काव्य) एवं पुराण संहिता।
3भरतमुनि'नाट्यशास्त्र' (काव्यशास्त्र एवं रस सिद्धांत के प्रवर्तक)।
4पाणिनि'जाम्बवती विजयम्' (काव्य), अष्टाध्यायी (व्याकरण)।
5कत्यायन (वररुचि)'स्वर्गारोहण' काव्य एवं वार्तिक।
6पतंजलि'महानंद काव्य' एवं महाभाष्य।
7पिंगल'छन्दःशास्त्र' (काव्य में लय और छंद का विज्ञान)।
8गुणाढ्य'वृहत्कथा' (पैशाची प्राकृत, कथा साहित्य का आधार)।
9भास'स्वप्नवासवदत्तम्' सहित 13 प्रसिद्ध नाटक।
10अश्वघोष'बुद्धचरित' एवं 'सौंदरनंद' (बौद्ध महाकाव्य)।
2. संस्कृत साहित्य का स्वर्ण युग (कालिदास से हर्ष काल तक)
क्रमविद्वान/कविप्रमुख रचना/योगदान
11महाकवि कालिदासअभिज्ञानशाकुंतलम्, रघुवंशम्, मेघदूतम् (उपमा अलंकार)।
12शूद्रक'मृच्छकटिकम्' (यथार्थवादी सामाजिक नाटक)।
13विशाखदत्त'मुद्राराक्षस' (राजनैतिक नाटक)।
14भारवि'किरातार्जुनीयम्' (अर्थगौरव के लिए प्रसिद्ध)।
15भट्टि'भट्टिकाव्य' (रावणवध) - व्याकरण आधारित महाकाव्य।
16कुमारदास'जानकीहरण' महाकाव्य।
17विष्णुशर्मा'पंचतंत्र' (नीति कथा साहित्य)।
18दण्डी'दशकुमारचरितम्' (गद्य) एवं काव्यादर्श (काव्यशास्त्र)।
19सुबंधु'वासवदत्ता' (श्लेष प्रधान गद्य काव्य)।
20बाणभट्ट'कादम्बरी' (विश्व का प्रथम उपन्यास) एवं हर्षचरित।
21मयूरभट्ट'सूर्यशतकम्' (बाणभट्ट के समकालीन)।
22माघ'शिशुपालवधम्' (उपमा, अर्थगौरव, पदलालित्य का संगम)।
23भवभूति'उत्तररामचरितम्' (करुण रस के सर्वश्रेष्ठ कवि)।
24अमरुक'अमरुकशतकम्' (शृंगार रस मुक्तक)।
25भर्तृहरि'नीतिशतक', 'शृंगारशतक', 'वैराग्यशतक'।
3. काव्यशास्त्र का विकास एवं मध्यकालीन आचार्य
क्रमआचार्य/विद्वानसिद्धांत/ग्रंथ (Theory/Work)
26भामह'काव्यालंकार' (अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक)।
27वामन'काव्यालंकारसूत्रवृत्ति' (रीति संप्रदाय, "रीतिरात्मा काव्यस्य")।
28उद्भट'काव्यालंकारसारसंग्रह' (अलंकारवादी आचार्य)।
29रुद्रटकाव्यालंकार (काव्य के भेद और शब्दालंकार)।
30आनंदवर्धन'ध्वन्यालोक' (ध्वनि संप्रदाय, काव्य की आत्मा 'ध्वनि')।
31राजशेखर'काव्यमीमांसा' एवं 'कर्पूरमंजरी' (सट्टक)।
32अभिनवगुप्त'ध्वन्यालोक लोचन' एवं 'अभिनवभारती' (रस सूत्र व्याख्या)।
33कुंतक'वक्रोक्तिजीवितम्' (वक्रोक्ति संप्रदाय के प्रवर्तक)।
34धनंजय'दशरूपक' (नाट्यशास्त्र का विवेचन)।
35महिमभट्ट'व्यक्तिविवेक' (अनुमितिवाद के समर्थक)।
36भोजराज'सरस्वतीकंठाभरण' एवं 'शृंगारप्रकाश'।
37क्षेमेन्द्र'औचित्यविचारचर्चा' (औचित्य संप्रदाय के प्रवर्तक)।
38मम्मट'काव्यप्रकाश' (काव्यशास्त्र का समन्वयात्मक मानक ग्रंथ)।
39रुय्यक'अलंकारसर्वस्व' (अलंकारों का सूक्ष्म विवेचन)।
40हेमचंद्र'काव्यानुशासन' (जैन आचार्य एवं व्याकरणविद)।
41श्रीहर्ष'नैषधीयचरितम्' (पंच महाकाव्यों में अंतिम)।
42जयदेव'गीतगोविंदम्' (गीति काव्य परंपरा)।
43जयदेव (पीयूषवर्ष)'चंद्रालोक' (अलंकार शास्त्र)।
44विश्वनाथ'साहित्यदर्पण' ("वाक्यं रसात्मकं काव्यम्")।
45पंडितराज जगन्नाथ'रसगंगाधर' (काव्यशास्त्र के अंतिम महान आचार्य)।
4. उत्तर-मध्यकाल एवं रीति काल (16वीं - 19वीं शताब्दी)
क्रमविद्वान/कविप्रमुख रचना/योगदान
46अप्पय दीक्षित'कुवलयानन्द' एवं 'चित्रमीमांसा' (अलंकार शास्त्र)।
47भट्टोजि दीक्षित'सिद्धान्तकौमुदी' (व्याकरण के माध्यम से साहित्य बोध)।
48नागेश भट्ट'रसगंगाधर' की टीका एवं व्याकरणिक शोध।
49नारायण पंडित'हितोपदेश' (नीति कथा साहित्य)।
50सोमदेव'कथासरित्सागर' (विश्व का विशालतम कथा संग्रह)।
51बिल्हण'विक्रमाङ्कदेवचरितम्' एवं चौरपञ्चाशिका।
52कल्हण'राजतरङ्गिणी' (संस्कृत में ऐतिहासिक लेखन की परंपरा)।
53गोवर्धनाचार्य'आर्यासप्तशती' (शृंगार प्रधान मुक्तक काव्य)।
54त्रिविक्रमभट्ट'नलचम्पू' (प्रथम चम्पू काव्य के प्रणेता)।
55हलायुध'कविरहस्यम्' (व्याकरण और काव्य का समन्वय)।
56कृष्णमिश्र'प्रबोधचन्द्रोदय' (दार्शनिक रूपक नाटक)।
57वेदान्त देशिक'यादवाभ्युदय' महाकाव्य एवं सुभाषित नीवी।
58रूप गोस्वामी'उज्ज्वलनीलमणि' (भक्ति रस का काव्यशास्त्रीय विवेचन)।
59जीव गोस्वामी'गोपालचम्पू' एवं भागवत संदर्भ।
60मधुसूदन सरस्वती'भक्तिरसायन' (भक्ति को स्वतंत्र रस के रूप में स्थापना)।
61नीलकण्ठ दीक्षित'शिवलीलार्णव' एवं 'अन्यरपदेशशतक'।
62वेङ्कटाध्वरि'विश्वगुणादर्शचम्पू' (यात्रा वृत्तांत शैली का काव्य)।
63विश्वेश्वर पाण्डेय'आर्या सप्तशती' एवं व्याकरण ग्रंथ।
64अम्बिकादत्त व्यास'शिवराजविजयम्' (संस्कृत का प्रथम आधुनिक उपन्यास)।
65अप्पाशास्त्री राशिवडेकरसंस्कृत पत्रकारिता एवं आधुनिक गद्य लेखन।
66पण्डिता क्षमा राव'सत्याग्रहगीता' एवं आधुनिक कथा साहित्य।
67सी.डी. देशमुख'गांधीसूक्तिमुक्तावली' एवं संस्कृत काव्य रचना।
68डॉ. वी. राघवन'भोज शृंगार प्रकाश' शोध एवं आधुनिक संस्कृत नाटक।
69जानकी वल्लभ शास्त्री'राधा' (गीति काव्य) एवं आधुनिक संस्कृत कविता।
70रेवाप्रसाद द्विवेदी'स्वातंत्र्यसंभवम्' महाकाव्य एवं अलंकार शास्त्र।
71रामावतार शर्मा'परमार्थदर्शनम्' एवं आधुनिक संस्कृत विमर्श।
72भट्टमथुरनाथ शास्त्री'जयपुर वैभवम्' एवं नवीन गीति छंदों का आविष्कार।
73श्रीधर भास्कर वर्णेकर'शिवराज्योदयम्' महाकाव्य एवं संस्कृत साहित्य कोश।
74सत्यव्रत शास्त्री'रामकीर्तिमहाकाव्यम्' (ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित)।
75रामकरण शर्मा'पाथेयम्' एवं आधुनिक संस्कृत कविता।
5. आधुनिक एवं समकालीन विद्वान (20वीं शताब्दी से वर्तमान)
क्रमविद्वान/कविप्रमुख रचना/योगदान
76राधावल्लभ त्रिपाठी'अभिनवकव्यालङ्कारसूत्रम्' एवं नाट्यशास्त्र शोध।
77अभिराज राजेन्द्र मिश्र'इक्षुगन्धा' (कथा संग्रह) एवं 'जानकीजीवनम्'।
78रसिक बिहारी जोशी'श्रीकृष्णचरितम्' एवं दार्शनिक संस्कृत काव्य।
79हरिनारायण दीक्षित'भीष्मचरितम्' एवं आधुनिक संस्कृत महाकाव्य।
80प्रभुनाथ द्विवेदी'कनकलोचनम्' (साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता)।
81केशव चन्द्र दासआधुनिक संस्कृत कथा एवं उपन्यासों पर शोध।
82भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी'वाग्योग' एवं संस्कृत भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन।
83जगन्नाथ पाठक'कपिशायनी' एवं आधुनिक संस्कृत गजलों के जनक।
84कलानाथ शास्त्रीआधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास एवं अनुवाद।
85हर्षदेव माधव'निशिगन्धा' (जापानी हाइकु शैली का संस्कृत में प्रयोग)।
86रामजी उपाध्यायसंस्कृत साहित्य का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शोध।
87शिवदत्त शर्माआधुनिक संस्कृत छंद और काव्य सृजन।
88श्रीनिवास रथ'तदेवागगनं सैवा धरा' (गीति काव्य)।
89इच्छा राम द्विवेदीआधुनिक संस्कृत कविता और छन्दोबद्ध रचनाएँ।
90बचूलाल अवस्थी'प्रतिभानम्' एवं आधुनिक काव्यशास्त्रीय चिंतन।
91पुल्लेल श्रीरामचंद्रुडुकाव्यशास्त्र का तेलुगु और हिंदी में व्याख्यात्मक शोध।
92हरिदत्त शर्मा'लसल्लतिका' (आधुनिक गीति काव्य)।
93रामकौशल किशोरआधुनिक महाकाव्य और संस्कृत नाट्य लेखन।
94एम.एन. करंदीकरसंस्कृत साहित्य और छंद शास्त्र पर तुलनात्मक शोध।
95ब्रह्मानंद शर्माआधुनिक संस्कृत काव्यशास्त्र और आलोचना।
96वासुदेव द्विवेद शास्त्रीसंस्कृत प्रचार और सुगम भाषा पद्धति के विकासक।
97रमाकान्त शुक्ल'भाति मे भारतम्' एवं संस्कृत पत्रकारिता।
98विद्यानिवास मिश्रसंस्कृत साहित्य के सांस्कृतिक प्रतीकों पर शोध।
99गोविन्द चन्द्र पाण्डे'भक्तिदर्शनम्' एवं काव्यशास्त्रीय सौंदर्यमीमांसा।
100राजेन्द्र नानवटीसंस्कृत महाकाव्यों का संरचनात्मक और सौंदर्यपरक शोध।
निष्कर्ष: संस्कृत साहित्य की कालजयी यात्रा

उपरोक्त 100 विद्वानों की सूची यह सिद्ध करती है कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं, अपितु यह मानवीय भावनाओं, सौंदर्य और दर्शन की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। वाल्मीकि की करुणा से लेकर कालिदास के शृंगार तक, और मम्मट के शास्त्र से लेकर आधुनिक युग में सत्यव्रत शास्त्री के चिंतन तक, यह धारा अविरल बह रही है।

जहाँ प्राचीन आचार्यों ने 'रस' और 'ध्वनि' जैसे सिद्धांतों की स्थापना कर विश्व साहित्य को आलोचना (Criticism) की नई दृष्टि दी, वहीं आधुनिक कवियों ने संस्कृत को समसामयिक विषयों से जोड़कर इसे जीवंत रखा। इस सूची में शामिल प्रत्येक नाम ने भारतीय ज्ञान परंपरा के उस विशाल भवन में एक ईंट जोड़ी है, जो आज भी संपूर्ण विश्व को प्रकाशित कर रहा है। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक विनम्र अनुष्ठान है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!