100 Major Sanskrit Grammar Scholars:संस्कृत व्याकरण के 100 प्रमुख विद्वान

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
संस्कृत व्याकरण के 100 प्रमुख विद्वान: मुनित्रयी से नव्य-व्याकरण तक

संस्कृत व्याकरण (व्याकरण शास्त्र) को वेदांगों में 'मुख' कहा गया है। यह विश्व की सबसे वैज्ञानिक और व्यवस्थित भाषा प्रणाली है। इसकी नींव महेश्वर सूत्रों और पाणिनि की अष्टाध्यायी पर टिकी है। जहाँ प्राचीन आचार्यों ने भाषा के नियम बनाए, वहीं मध्यकालीन विद्वानों ने 'प्रक्रिया ग्रंथों' (कौमुदी परंपरा) के माध्यम से इसे सरल बनाया और आधुनिक विद्वानों ने इसका ऐतिहासिक व तुलनात्मक अध्ययन किया।

प्रस्तुत शोधपरक सूची में हमने व्याकरण शास्त्र के इतिहास को चार चरणों में विभाजित किया है: **प्राचीन एवं पाणिनीय काल**, **बौद्ध-जैन एवं तंत्र व्याकरण**, **मध्यकालीन टीकाकार**, और **आधुनिक व्याकरण मनीषी**। यह सूची शब्दब्रह्म के उन उपासकों का वंदन है जिन्होंने संस्कृत भाषा को अमरत्व प्रदान किया।

1. प्राचीन आचार्य एवं मुनित्रयी (वैदिक काल से 200 ई.पू.)
क्रमआचार्य/वैयाकरणप्रमुख योगदान/ग्रंथ
1भगवान शिव (महेश्वर)'महेश्वर सूत्र' (संस्कृत वर्णमाला के जनक)।
2बृहस्पतिइन्द्र को व्याकरण का प्रथम ज्ञान देने वाले (बार्हस्पत्य)।
3इन्द्र'ऐन्द्र व्याकरण' (पाणिनि से पूर्व का प्रमुख संप्रदाय)।
4भारद्वाजऋक्तंत्र और प्राचीन व्याकरण नियमों के प्रवर्तक।
5आपिशलिपाणिनि द्वारा उल्लिखित प्राचीन वैयाकरण।
6शाकटायन (प्राचीन)'धातु से ही सभी शब्द बने हैं' (नैरुक्त मत)।
7गार्ग्यनिघंटु और प्राचीन शब्द व्युत्पत्ति सिद्धांत।
8गालवपाणिनि पूर्व के वैयाकरण (स्वर विधि विशेषज्ञ)।
9शाकल्यऋग्वेद पदपाठ और संधि नियमों के आदि आचार्य।
10स्फोटायन'स्फोटवाद' (शब्द ब्रह्म) के आदि प्रवर्तक।
11यास्क'निरुक्त' (वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति)।
12महर्षि पाणिनि'अष्टाध्यायी' (व्याकरण शास्त्र के सर्वोच्च शिखर)।
13कात्यायन (वररुचि)'वार्तिक' (अष्टाध्यायी के पूरक नियम)।
14महर्षि पतंजलि'महाभाष्य' (व्याकरण दर्शन और इष्टि)।
15व्याडि'संग्रह' ग्रंथ (लक्ष्य-लक्षण का विशाल ग्रंथ)।
16कौत्सनिरुक्त और व्याकरण के प्राचीन आचार्य।
17चाक्रवर्मणपाणिनि द्वारा उल्लिखित आचार्य।
18भारद्वाज (वार्तिककार)कात्यायन से पूर्व के वार्तिक लेखक।
19सौनागप्राचीन वार्तिककार।
20कुणिअष्टाध्यायी के प्राचीन वृत्तिकार।
21माठरप्राचीन वृत्ति लेखक।
22सेनकरपाणिनि पूर्व आचार्य।
23कासकृत्स्न'कासकृत्स्न व्याकरण' (मीमांसा और व्याकरण)।
24शौनकऋक्प्रातिशाख्य (वैदिक व्याकरण)।
25पिंगलछन्दःसूत्र (व्याकरण आधारित पद्य नियम)।
2. पाणिनीतर संप्रदाय एवं मध्यकालीन टीकाकार (200 ई. - 1200 ई.)
क्रमविद्वानप्रमुख ग्रंथ/संप्रदाय
26शर्ववर्मा'कातन्त्र व्याकरण' (सरल संस्कृत शिक्षण)।
27चन्द्रगोमी'चान्द्र व्याकरण' (बौद्ध वैयाकरण, अष्टाध्यायी का संशोधन)।
28देवनन्दी (पूज्यपाद)'जैनेन्द्र व्याकरण' (दिगंबर जैन संप्रदाय)।
29भर्तृहरि'वाक्यपदीय' (व्याकरण दर्शन) एवं महाभाष्य दीपिका।
30वामन'काशिका वृत्ति' (अष्टाध्यायी की सर्वश्रेष्ठ टीका)।
31जयादित्य'काशिका वृत्ति' (वामन के सहयोगी)।
32जिनेन्द्रबुद्धि'काशिका विवरण पंजिका' (न्यास)।
33शाकटायन (पाल्यकीर्ति)'शाकटायन व्याकरण' (अमोघवर्ष के समय)।
34हेमचन्द्र सूरी'सिद्धहेमशब्दानुशासन' (प्राकृत और संस्कृत व्याकरण)।
35भोजराज'सरस्वतीकंठाभरण' (व्याकरण ग्रंथ)।
36क्रमदीश्वर'संक्षिप्तसार व्याकरण' (जौमार संप्रदाय)।
37अनुभूतिस्वरूपाचार्य'सारस्वत व्याकरण' (मध्यकाल में अत्यंत लोकप्रिय)।
38बोपदेव'मुग्धबोध व्याकरण' (बंगाल में प्रचलित)।
39कैयट'प्रदीप' (महाभाष्य की सबसे प्रामाणिक टीका)।
40हरदत्त मिश्र'पदमंजरी' (काशिका की टीका)।
41क्षीरस्वामी'क्षीरतरंगिणी' (धातुपाठ की व्याख्या)।
42हेलाराजवाक्यपदीय की टीका।
43पुण्यराजवाक्यपदीय टीकाकार।
44मैत्रेय रक्षित'तन्त्रप्रदीप' (न्यास की टीका)।
45शरणदेव'दुर्घटवृत्ति' (कठिन शब्दों की सिद्धि)।
46वर्धन'गणरत्नमहोदधि' (गणपाठ)।
47हलायुध'कविरहस्य' (धातु रूप)।
48पुरुषोत्तमदेव'भाषावृत्ति' (लघुपाणिनीय प्रयोग)।
49सीरदेव'परिभाषावृत्ति' (व्याकरण परिभाषाएँ)।
50पद्मनाभदत्त'सुपद्म व्याकरण' (मैथिल परंपरा)।
3. प्रक्रिया ग्रंथ एवं नव्य-व्याकरण (13वीं - 18वीं शताब्दी)
क्रमआचार्यप्रमुख ग्रंथ/योगदान
51धर्मकीर्ति'रूपावतार' (प्रक्रिया पद्धति के जनक)।
52रामचन्द्र'प्रक्रियाकौमुदी' (सिद्धांतकौमुदी की पूर्वपीठिका)।
53विट्ठल आचार्य'प्रसाद' (प्रक्रियाकौमुदी की टीका)।
54भट्टोजि दीक्षित'वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी' (व्याकरण का सर्वाधिक प्रचलित ग्रंथ)।
55वरदराज'लघुसिद्धान्तकौमुदी' (संस्कृत छात्रों का प्रथम ग्रंथ)।
56कौण्डभट्ट'वैयाकरणभूषणसार' (व्याकरण दर्शन)।
57नागेश भट्ट'लघुशब्देन्दुशेखर', 'परिभाषेन्दुशेखर' (नव्य व्याकरण के युगपुरूष)।
58ज्ञानेन्द्र सरस्वती'तत्त्वबोधिनी' (सिद्धांतकौमुदी की टीका)।
59वासुदेव दीक्षित'बालमनोरमा' (सिद्धांतकौमुदी की सरल टीका)।
60हरि दीक्षित'शब्दरत्न' (प्रौढ़मनोरमा की व्याख्या)।
61रंगोजि भट्टभट्टोजि दीक्षित के भ्राता एवं टीकाकार।
62अप्पय दीक्षितव्याकरण और मीमांसा के समन्वयकर्ता।
63नारायण भट्ट'प्रक्रियासर्वस्व' (केरल व्याकरण परंपरा)।
64नीलकंठ वाजपेयीपरिभाषावृत्ति टीकाकार।
65वैद्यनाथ पायगुंडेनागेश भट्ट के शिष्य (गदा टीका)।
66भैरव मिश्र'भैरवी' टीका (लघुशब्देन्दुशेखर)।
67राघवन्द्रान्दाचार्य'विषमी' टीका।
68सदाशिव भट्टनागेश परंपरा के विद्वान।
69कृष्णमित्र'रत्नार्णव' टीका।
70शेष श्रीकृष्णप्रक्रिया परंपरा के आचार्य।
71रामशरण तर्करत्नव्याकरण में न्याय शैली का प्रयोग।
72जयकृष्ण मौनीविभक्त्यर्थ निर्णय।
73मदाध्वरिव्याकरण दीपिका।
74अन्नंभट्टव्याकरण मिताक्षरा (पाणिनीय सूत्रों पर)।
75विश्वेश्वर पाण्डेयव्याकरण सिद्धांत सुधानिधि।
4. आधुनिक युग एवं शोधकर्ता (19वीं शताब्दी से वर्तमान)
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान
76फ्रेडरिक कीलहॉर्नमहाभाष्य का वैज्ञानिक संपादन।
77पं. गुरुपद हालदारव्याकरण दर्शन का इतिहास।
78श्रीपाद दामोदर सातवलेकरवैदिक व्याकरण का सरल प्रस्तुतीकरण।
79चारुदेव शास्त्री'व्याकरण चन्द्रोदय' एवं 'शब्दअपशब्दविवेक'।
80पं. युधिष्ठिर मीमांसक'संस्कृत व्याकरण शास्त्र का इतिहास' (3 भाग)।
81के.वी. अभ्यंकर'Dictionary of Sanskrit Grammar' (मानक संदर्भ)।
82स्वामी दयानंद सरस्वती'वेदांगप्रकाश' (अष्टाध्यायी का पुनरुद्धार)।
83पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासुअष्टाध्यायी भाष्य (हिंदी में विस्तृत व्याख्या)।
84कपिल देव द्विवेदी'रचनानुवादकौमुदी' (अनुवाद के माध्यम से व्याकरण)।
85सत्यव्रत शास्त्रीव्याकरण और काव्य का समन्वय।
86राम नाथ वेदालंकारअष्टाध्यायी के गूढ़ सूत्रों पर शोध।
87रघुवीर वेदालंकारव्याकरण महाभाष्य का हिंदी अनुवाद।
88भीमसेन शास्त्री'लघुसिद्धान्तकौमुदी' की भैमी व्याख्या (सर्वश्रेष्ठ हिंदी टीका)।
89पुष्पा दीक्षित'अष्टाध्यायी सहज बोध' (पाणिनि को सिखाने की नवीन विधि)।
90एस.डी. जोशीमहाभाष्य का अंग्रेजी अनुवाद और शोध।
91जॉर्ज कार्डोना'Panini: His Work and its Traditions' (वैश्विक शोध)।
92विश्वनाथ झाव्याकरण दर्शन पर शोध।
93दीप्ति त्रिपाठीव्याकरण और भाषाविज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन।
94राममूर्ति शर्मावाक्यपदीय पर आधुनिक विमर्श।
95अशोक आकलुजकरभर्तृहरि और व्याकरण दर्शन पर वैश्विक कार्य।
96जानकी प्रसाद द्विवेदकातंत्र व्याकरण शोध।
97रेवाप्रसाद द्विवेदीकालिदास की नन्दिनी टीका (व्याकरण सम्मत)।
98भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी'धातुार्थनिर्देश' (धातुओं का वैज्ञानिक अर्थ)।
99गोविंद चंद्र पांडेव्याकरण और संस्कृति संबंध।
100वशिष्ठ त्रिपाठीनव्य व्याकरण और न्याय का समन्वय।
निष्कर्ष: शब्द-साधना की अनवरत यात्रा

व्याकरण केवल भाषा को शुद्ध करने का साधन नहीं, अपितु यह मोक्ष का द्वार (अपवर्गस्य सोपानम्) है। भगवान शिव के डमरू से निकले 14 सूत्रों से लेकर पुष्पा दीक्षित की आधुनिक शिक्षण पद्धति तक—यह यात्रा भारत की बौद्धिक संपदा का प्रमाण है।

उपरोक्त 100 विद्वानों की सूची यह दर्शाती है कि किस प्रकार एक सूत्र (Rule) को समझाने के लिए सहस्त्रों वर्षों तक चिंतन चलता रहा। पाणिनि ने जो बीज बोया, उसे पतंजलि ने वृक्ष बनाया और भट्टोजि दीक्षितनागेश ने उसे फलदार बनाया। **भगवत दर्शन** का यह संकलन उन सभी साधकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है जिन्होंने संस्कृत को विश्व की सबसे परिष्कृत भाषा बनाए रखा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!