डॉ. रघुवीर: पारिभाषिक शब्दावली के महान निर्माता और भाषाई स्वाधीनता के योद्धा
एक विस्तृत अकादमिक और ऐतिहासिक विश्लेषण: वह बहुभाषी विद्वान जिसने सिद्ध किया कि 'संस्कृत' ही वह एकमात्र आधार है जिस पर आधुनिक विज्ञान और प्रशासन के लिए भारतीय भाषाओं की इमारत खड़ी की जा सकती है (The Pioneer of Linguistic Independence)
- 1. प्रस्तावना: भाषाई दासता से मुक्ति का शंखनाद
- 2. जीवन परिचय: रावलपिंडी से यूरोप तक की ज्ञान यात्रा
- 3. पारिभाषिक शब्दावली का निर्माण: एक भगीरथ प्रयास
- 4. शब्द-निर्माण की वैज्ञानिक पद्धति: 'संस्कृत' का आधार
- 5. भारतीय संविधान का हिंदी अनुवाद
- 6. 'शत-पिटक' श्रृंखला: एशियाई संस्कृति का पुनरुद्धार
- 7. आलोचना और उत्तर: क्लिष्टता बनाम शुद्धता
- 8. निष्कर्ष: आधुनिक भारत के शब्द-शिल्पी
भारत को 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन बौद्धिक, वैज्ञानिक और प्रशासनिक कार्यों में अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व बदस्तूर जारी था। कई लोगों का तर्क था कि "हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में आधुनिक विज्ञान और कानून को व्यक्त करने के लिए शब्द ही नहीं हैं।" इस चुनौती को जिस महामानव ने स्वीकार किया, वे थे—डॉ. रघुवीर (Dr. Raghuvira)।
उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 1.5 लाख (1,50,000) नए पारिभाषिक शब्दों (Technical Terms) का निर्माण किया। उन्होंने दिखाया कि जिस प्रकार यूरोप की सभी भाषाएं विज्ञान के शब्दों के लिए 'लैटिन' (Latin) और 'ग्रीक' (Greek) पर निर्भर हैं, उसी प्रकार भारत की सभी भाषाएं 'संस्कृत' (Sanskrit) के अथाह महासागर से नए शब्द गढ़ सकती हैं।
| पूरा नाम | आचार्य डॉ. रघुवीर |
| काल | 30 दिसंबर 1902 – 14 मई 1963 |
| जन्म स्थान | रावलपिंडी (अविभाजित भारत, वर्तमान पाकिस्तान) |
| संस्थापक | इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन कल्चर (International Academy of Indian Culture) |
| महानतम कृति | आंग्ल-हिन्दी पारिभाषिक शब्दकोश (Comprehensive English-Hindi Dictionary) |
| भाषा ज्ञान | हिंदी, संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेजी, जर्मन, डच, तिब्बती, मंगोलियाई सहित दर्जनों भाषाएं। |
| राजनीतिक योगदान | संविधान सभा के सदस्य, भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष (1962-63) |
2. जीवन परिचय: रावलपिंडी से यूरोप तक की ज्ञान यात्रा
डॉ. रघुवीर का जन्म रावलपिंडी में हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए. किया और उसके बाद यूरोप चले गए। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. (Ph.D.) और नीदरलैंड्स के लीडेन विश्वविद्यालय से डी.लिट. (D.Litt.) की उपाधि प्राप्त की।
यूरोप में रहते हुए उन्होंने देखा कि यूरोपीय देशों ने किस प्रकार अपनी मातृभाषाओं में विज्ञान और तकनीक का विकास किया है। भारत लौटने पर वे लाहौर के सनातन धर्म कॉलेज में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष बने। बाद में उन्होंने नागपुर और अंततः दिल्ली को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी थे और मानते थे कि "भाषाई उपनिवेशवाद (Linguistic Colonialism) राजनीतिक उपनिवेशवाद से अधिक खतरनाक है।"
3. पारिभाषिक शब्दावली का निर्माण: एक भगीरथ प्रयास
विज्ञान, कानून और प्रशासन के लिए सटीक शब्दों की आवश्यकता होती है, जिन्हें 'पारिभाषिक शब्द' (Technical Terms) कहा जाता है। पारिभाषिक शब्द वह होता है जिसका प्रयोग किसी विशेष अर्थ में निश्चित सीमा (Definition) के भीतर होता है।
डॉ. रघुवीर ने "A Comprehensive English-Hindi Dictionary of Governmental and Educational Words and Phrases" का निर्माण किया।
- यह एक ऐसा विशाल ग्रंथ था जिसमें अर्थशास्त्र, राजनीति, चिकित्सा, रसायन विज्ञान, भौतिकी और गणित के हजारों अंग्रेजी शब्दों के लिए हिंदी प्रतिशब्द (Equivalents) बनाए गए।
- उन्होंने यह कार्य बिना किसी विशाल सरकारी सहायता के, अपने सहयोगियों के साथ दिन-रात एक करके किया।
4. शब्द-निर्माण की वैज्ञानिक पद्धति: 'संस्कृत' का आधार
डॉ. रघुवीर की शब्द निर्माण पद्धति 'मनमानी' नहीं थी; वह पूरी तरह से व्याकरण और धातु-विज्ञान (Root Science) पर आधारित थी।
- संस्कृत की जननी भूमिका: उन्होंने तर्क दिया कि केवल संस्कृत में 2000 से अधिक मूल धातुएं (Roots) और अनगिनत उपसर्ग (Prefixes) एवं प्रत्यय (Suffixes) हैं। इनसे गणितीय रूप से लाखों नए शब्द गढ़े जा सकते हैं।
- अखिल भारतीय स्वीकार्यता: उन्होंने उर्दू या फारसी के बजाय संस्कृतनिष्ठ शब्दों को प्राथमिकता दी, क्योंकि संस्कृत-आधारित शब्द तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, बंगाली और उड़िया बोलने वाले आसानी से समझ और अपना सकते हैं। इससे भारत में भाषाई एकता (Linguistic Integration) आएगी।
उदाहरण: 'Director' के लिए 'निदेशक', 'Secretary' के लिए 'सचिव', 'Republic' के लिए 'गणतंत्र' जैसे शब्द आज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।
5. भारतीय संविधान का हिंदी अनुवाद
1948 में, संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने डॉ. रघुवीर और उनकी टीम को भारतीय संविधान के अंग्रेजी प्रारूप का हिंदी में अनुवाद करने का ऐतिहासिक कार्य सौंपा।
संविधान में प्रयुक्त अधिकांश हिंदी कानूनी शब्दावली डॉ. रघुवीर की ही देन है।
6. 'शत-पिटक' श्रृंखला: एशियाई संस्कृति का पुनरुद्धार
शब्दकोशों के अलावा, उनका दूसरा महान स्वप्न था—पूरे एशिया (तिब्बत, मंगोलिया, चीन, इंडोनेशिया, कंबोडिया) में फैले भारतीय ज्ञान और ग्रंथों को वापस लाना।
उन्होंने "इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन कल्चर" की स्थापना की और 'शत-पिटक श्रृंखला' (Sata-Pitaka Series) प्रारंभ की। इस श्रृंखला के तहत उन्होंने बौद्ध और हिंदू ग्रंथों की दुर्लभ पांडुलिपियों को खोजा और प्रकाशित किया। उनके सुपुत्र डॉ. लोकेश चंद्र ने बाद में इस श्रृंखला को कई सौ खंडों तक पहुँचाया।
7. आलोचना और उत्तर: क्लिष्टता बनाम शुद्धता
डॉ. रघुवीर के कार्य की जहाँ अत्यधिक प्रशंसा हुई, वहीं उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।
- आलोचना: कुछ लोगों (जैसे हिंदुस्तानी भाषा के समर्थकों) ने कहा कि उनके गढ़े गए शब्द बहुत 'क्लिष्ट' (कठिन) और 'अव्यावहारिक' हैं, जिन्हें आम आदमी नहीं समझ सकता (जैसे 'सिग्नल' के लिए 'अग्निरथ-गमन-आगमन-सूचक...' हालांकि यह एक अतिशयोक्तिपूर्ण मिथक था)।
- डॉ. रघुवीर का उत्तर: उन्होंने स्पष्ट किया कि "पारिभाषिक शब्द आम बोलचाल के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और कानून के विशिष्ट उपयोग के लिए होते हैं। जब कोई छात्र अपनी मातृभाषा में विज्ञान पढ़ेगा, तो बचपन से ही वे शब्द उसके लिए सहज हो जाएंगे। 'Oxygen' या 'Gravitation' भी अंग्रेजी के आम शब्द नहीं हैं, उन्हें भी लैटिन से गढ़ा गया है।"
8. निष्कर्ष: आधुनिक भारत के शब्द-शिल्पी
14 मई 1963 को एक कार दुर्घटना में डॉ. रघुवीर का आकस्मिक निधन हो गया, जिसने भारत को एक महान मेधा से वंचित कर दिया।
आज भारत सरकार का 'वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग' (CSTT) जिस आधार पर कार्य कर रहा है, उसकी मजबूत नींव डॉ. रघुवीर ने ही रखी थी। उन्होंने हमें सिखाया कि हिंदी और भारतीय भाषाएं किसी भी विदेशी भाषा की मोहताज नहीं हैं; हमारी अपनी जड़ों में ब्रह्मांड के हर ज्ञान को व्यक्त करने की अनंत क्षमता है। वे आधुनिक भारत के 'शब्द-शिल्पी' (Word-Architect) थे।
संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)
- Comprehensive English-Hindi Dictionary - Dr. Raghuvira.
- पारिभाषिक शब्दावली के निर्माण के सिद्धान्त - डॉ. रघुवीर।
- Sata-Pitaka Series - International Academy of Indian Culture.
- भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली के निर्माण की समस्याएँ (शोध प्रबंध)।
