गणेश चतुर्थी 2026: संपूर्ण महापर्व मार्गदर्शिका
गणेश स्थापना, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और चंद्र दर्शन का धार्मिक रहस्य
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी का पर्व सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह दिन भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें 'विघ्नहर्ता' और 'मंगलमूर्ति' कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह उत्सव अपनी पूर्ण दिव्यता के साथ सोमवार, 14 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है।
📅 तिथि और शुभ मुहूर्त 2026
शास्त्रों के अनुसार गणेश जी की पूजा 'मध्याह्न काल' (दोपहर) में श्रेष्ठ मानी जाती है, क्योंकि उनका जन्म इसी काल में हुआ था।
| विवरण | समय / तिथि |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 14 सितंबर 2026, सुबह 10:43 बजे से |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 15 सितंबर 2026, सुबह 08:31 बजे तक |
| गणेश पूजा मुहूर्त (मध्याह्न) | दोपहर 11:02 AM से 01:31 PM तक |
| शुभ चौघड़िया मुहूर्त | सुबह 09:12 AM से 10:44 AM (शुभ) |
14 सितंबर 2026 को सुबह 09:32 बजे से रात 09:14 बजे तक चंद्रमा देखने से बचें। इस दिन चंद्रमा देखने पर 'मिथ्या दोष' (झूठा आरोप) लगने का भय रहता है।
🛍️ संपूर्ण पूजन सामग्री सूची
पूजन की सात्विकता और पूर्णता के लिए इन सामग्रियों का होना अनिवार्य है:
- गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा
- लकड़ी की चौकी और लाल/पीला वस्त्र
- कलश, नारियल और आम के पत्ते
- गंगाजल और शुद्ध जल
- दूर्वा (21 गांठें अनिवार्य)
- लाल चंदन, सिंदूर और कुमकुम
- जनेऊ (यज्ञोपवीत) और मौली (कलावा)
- अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
- हल्दी और इत्र (Fragrance)
- मोदक या बेसन के लड्डू (21 नग)
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- ऋतु फल (केला, अनार आदि)
- पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची
🕉️ विस्तृत पूजन विधि (षोडशोपचार पूजा)
गणेश जी की स्थापना और पूजन अत्यंत सरल भाव से भी किया जा सकता है, किन्तु शास्त्रों के अनुसार निम्नलिखित विधि सर्वोत्तम है:
- शुद्धि और संकल्प: स्नान के बाद स्वयं पर गंगाजल छिड़कें। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत व पूजन का संकल्प लें।
- कलश स्थापना: चौकी के दाईं ओर अक्षत की ढेरी पर जल से भरा कलश रखें। उस पर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें।
- प्राण प्रतिष्ठा: मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। मंत्रों द्वारा गणेश जी का आवाहन करें कि वे इस मूर्ति में प्रतिष्ठित हों।
- अभिषेक: मूर्ति को जल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं (यदि मिट्टी की मूर्ति है तो केवल प्रतीकात्मक छिड़काव करें)।
- वस्त्र और श्रृंगार: वस्त्र अर्पित करें, जनेऊ पहनाएं और मस्तक पर सिंदूर का तिलक लगाएं।
- दूर्वा अर्पण: गणेश जी को 21 दूर्वा "ॐ गणाधिपतये नमः" कहते हुए चढ़ाएं।
- भोग और आरती: मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप दिखाएं और अंत में कपूर से सपरिवार आरती करें।
🌙 चतुर्थी को चंद्र दर्शन निषेध क्यों?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। अचानक मूषक के लड़खड़ाने से गणेश जी नीचे गिर गए। यह देखकर चंद्रमा (जिन्हें अपने रूप पर बहुत गर्व था) जोर-जोर से हंसने लगे और गणेश जी के गज-मुख का उपहास किया।
गणेश जी ने क्रोधित होकर चंद्रमा को श्राप दिया कि "जो कोई आज के दिन तुम्हें देखेगा, उसे समाज में अपमानित होना पड़ेगा और उस पर चोरी का झूठा आरोप (मिथ्या दोष) लगेगा।"
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने भी भूलवश इस दिन चंद्रमा देख लिया था, जिसके फलस्वरूप उन पर 'स्यमंतक मणि' चुराने का आरोप लगा। बाद में नारद जी के कहने पर उन्होंने गणेश चतुर्थी का व्रत किया और इस दोष से मुक्त हुए।
🛡️ दोष निवारण के उपाय
यदि अनजाने में चंद्रमा के दर्शन हो जाएं, तो घबराएं नहीं। निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करने से मिथ्या दोष समाप्त हो जाता है:
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥
🗓️ गणेशोत्सव 2026 का कार्यक्रम
| मुख्य दिवस | तारीख |
|---|---|
| गणेश चतुर्थी (मूर्ति स्थापना) | 14 सितंबर 2026 (सोमवार) |
| डेढ़ दिन का विसर्जन | 15 सितंबर 2026 |
| गौरी आवाहन | 18 सितंबर 2026 |
| गौरी विसर्जन (5वां दिन) | 19 सितंबर 2026 |
| 7वें दिन का विसर्जन | 20 सितंबर 2026 |
| अनंत चतुर्दशी (महा-विसर्जन) | 24 सितंबर 2026 (गुरुवार) |

