महर्षि कश्यप (Maharishi Kashyapa)

Sooraj Krishna Shastri
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महर्षि कश्यप: सृष्टि के प्रजापति और समस्त जीवों के आदि पुरुष

महर्षि कश्यप: सृष्टि के प्रजापति और समस्त जीव-जगत के जनक

एक विस्तृत शोधपरक और आध्यात्मिक विश्लेषण (The Progenitor of All Creation & Sage of Saptarishi)

"कश्यपः सर्वभूतानां पिता परमतपोधनः।" अर्थ: परम तपस्वी महर्षि कश्यप ही समस्त प्राणियों के पिता हैं।

भारतीय संस्कृति और पुराणों के अनुसार, महर्षि कश्यप (Maharishi Kashyapa) ब्रह्मा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र हैं। उन्हें 'प्रजापति' की उपाधि प्राप्त है क्योंकि सृष्टि के विस्तार में उनका योगदान अद्वितीय है। ऋग्वेद के नौवें मंडल के कई सूक्तों के दृष्टा कश्यप ऋषि ही हैं। माना जाता है कि "कश्यप" शब्द का अर्थ "दृष्टा" या "अमृत का पान करने वाला" होता है। संपूर्ण भारतवर्ष में प्रचलित 'कश्यप गोत्र' इन्हीं ऋषि की महान परंपरा का विस्तार है।

📌 महर्षि कश्यप: एक दृष्टि में
पिता महर्षि मरीचि (ब्रह्मा के मानस पुत्र)
माता कला (महर्षि कर्दम की पुत्री)
मुख्य पत्नियाँ अदिति, दिति, कद्रू, विनता, दनु आदि (दक्ष की पुत्रियाँ)
प्रसिद्ध पुत्र इंद्र, सूर्य (आदित्य), हिरण्यकशिपु, गरुड़
पद / पदवी प्रजापति, सप्तर्षि (वर्तमान मन्वंतर)
तपस्थली कश्मीर (कश्यप-मीर), हिमालय क्षेत्र
⏳ काल निर्धारण एवं युग
युग
सत्य युग (Satya Yuga)उनकी उपस्थिति सृष्टि के प्रारंभ से ही मानी जाती है।
मन्वंतर
वैवस्वत मन्वंतरवर्तमान सातवें मन्वंतर के सप्तर्षियों में उनका स्थान सर्वोपरि है।
ऐतिहासिक प्रभाव
माना जाता है कि कश्मीर घाटी का नाम उनके नाम पर 'कश्यप-मार' या 'कश्यप-मीर' पड़ा।

1. वंशावली: देव, दानव और नागों की उत्पत्ति

महर्षि कश्यप की सबसे बड़ी विशेषता उनकी व्यापक वंशावली है। उन्होंने दक्ष प्रजापति की 13 (कुछ ग्रंथों में 17) पुत्रियों से विवाह किया, जिनसे विभिन्न योनियों का जन्म हुआ:

  • अदिति: इनसे 12 आदित्यों (देवताओं) का जन्म हुआ, जिनमें इंद्र, सूर्य और भगवान विष्णु का 'वामन' अवतार शामिल है।
  • दिति: इनसे 'दैत्यों' का जन्म हुआ (जैसे हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष)।
  • कद्रू: इनसे समस्त 'नागों' (शेषनाग, वासुकि आदि) की उत्पत्ति हुई।
  • विनता: इनसे पक्षीराज 'गरुड़' और सूर्य के सारथी 'अरुण' का जन्म हुआ।
  • दनु: इनसे 'दानवों' का जन्म हुआ।

2. साहित्यिक एवं वैज्ञानिक योगदान

महर्षि कश्यप केवल एक प्रजापति ही नहीं, बल्कि एक महान विद्वान और आयुर्वेद के आचार्य भी थे।

  • कश्यप संहिता: आयुर्वेद में बाल रोग चिकित्सा (Pediatrics) के लिए 'कश्यप संहिता' को सबसे प्रमाणिक ग्रंथ माना जाता है।
  • स्मृति ग्रंथ: उन्होंने 'कश्यप स्मृति' की रचना की, जो धर्म और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • शिल्प शास्त्र: वास्तु और शिल्प कला के विकास में भी उनके सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है।

3. निष्कर्ष

महर्षि कश्यप का व्यक्तित्व भारतीय मनीषा का वह केंद्र है जहाँ देव और दानव, जड़ और चेतन, सब एक ही मूल से जुड़े प्रतीत होते हैं। वे "अद्वैत" की उस भावना के पोषक हैं जहाँ समस्त सृष्टि को एक ही परिवार (वसुधैव कुटुंबकम्) माना गया है। उनके द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी हमारे गोत्र, रीति-रिवाजों और आयुर्वेद के माध्यम से जीवित हैं।


संदर्भ ग्रंथ (References)

  • श्रीमद्भागवत पुराण (षष्ठ स्कन्ध)।
  • महाभारत (आदि पर्व - कश्यप वंशावली)।
  • कश्यप संहिता (कौमारभृत्य आयुर्वेद)।
  • विष्णु पुराण - मन्वंतर वर्णन।

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