महर्षि मार्कंडेय (Maharishi Markandeya)

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
महर्षि मार्कंडेय: मृत्युंजय ऋषि और मार्कंडेय पुराण के प्रणेता

महर्षि मार्कंडेय: काल को जीतने वाले महामुनि और चिरंजीवी भक्त

पौराणिक और आध्यात्मिक विश्लेषण (The Conqueror of Death & Author of Markandeya Purana)

भारतीय सनातन परम्परा में महर्षि मार्कंडेय (Maharishi Markandeya) एक ऐसी अद्भुत विभूति हैं जिन्होंने अपनी भक्ति के बल पर स्वयं 'काल' (मृत्यु) को परास्त किया। वे भृगु ऋषि के वंशज और ऋषि मृकण्डु के पुत्र हैं। मार्कंडेय जी को **'चिरंजीवी'** (अमर) माना जाता है, जो आज भी सूक्ष्म रूप में विद्यमान रहकर धर्म की रक्षा कर रहे हैं। वे भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों के अनन्य प्रिय भक्त हैं। उन्होंने ही संसार को मार्कंडेय पुराण और शक्ति उपासना का परम ग्रंथ 'दुर्गा सप्तशती' प्रदान किया।

📌 महर्षि मार्कंडेय: एक दृष्टि में
पिता ऋषि मृकण्डु (Mrikandu)
माता मरुद्वती (Marudvati)
वंश / कुल भृगु वंश (Bhargava Clan)
मुख्य ग्रंथ मार्कंडेय पुराण, देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती)
विशेष सिद्धि अल्पायु (16 वर्ष) से चिरंजीवी होना
इष्ट देवता भगवान शिव (महामृत्युंजय स्वरूप)
⏳ काल निर्धारण एवं युग
युग
सतयुग से वर्तमान तक (चिरंजीवी)मार्कंडेय जी का जन्म सतयुग में हुआ था, किन्तु वे त्रेता (रामायण) और द्वापर (महाभारत) दोनों युगों में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।
ऐतिहासिक स्थिति
मन्वंतर के साक्षीपुराणों के अनुसार, वे सात मन्वंतरों के साक्षी हैं और महाप्रलय के समय भी जीवित रहते हैं।

1. मृत्यु पर विजय: यमराज और महादेव का युद्ध

मार्कंडेय जी के जन्म की कथा बड़ी मार्मिक है। उनके माता-पिता ने शिवजी से संतान मांगी थी। शिवजी ने विकल्प दिया— "गुणहीन दीर्घायु पुत्र या गुणवान अल्पायु (16 वर्ष) पुत्र?" उन्होंने गुणवान पुत्र चुना। जब मार्कंडेय 16 वर्ष के हुए, तो यमराज उनके प्राण लेने आए।

  • महामृत्युंजय साधना: मार्कंडेय जी शिवलिंग से चिपक गए और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने लगे। जब यमराज ने उन पर पाश फेंका, तो साक्षात् महादेव प्रकट हुए।
  • काल के काल: महादेव ने यमराज को दंडित किया और मार्कंडेय को 'मृकण्डु-सुत' के स्थान पर अपना पुत्र मानते हुए **अमरता** का वरदान दिया।
  • संदेश: यह घटना सिद्ध करती है कि दृढ़ विश्वास और भक्ति के सामने नियति (Fate) को भी अपना निर्णय बदलना पड़ता है।

2. मार्कंडेय पुराण और दुर्गा सप्तशती

मार्कंडेय ऋषि ने जिस पुराण की रचना की, वह 18 महापुराणों में सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पुराण की सबसे बड़ी विशेषता **'देवी महात्म्य'** है, जिसे हम दुर्गा सप्तशती के नाम से जानते हैं।

  • शक्ति की महिमा: उन्होंने ही संसार को बताया कि कैसे माँ दुर्गा ने महिषासुर और शुम्भ-निशुम्भ का वध किया।
  • प्रकृति और विज्ञान: इस पुराण में खगोल शास्त्र, भूगोल और प्राणी विज्ञान के रहस्यों का भी समावेश है।

3. प्रलय का दर्शन: बटवृक्ष पर नारायण

महाभारत के वन पर्व में मार्कंडेय जी ने पांडवों को अपनी उस यात्रा का वृत्तांत सुनाया जब उन्होंने 'महाप्रलय' का साक्षात्कार किया था। जब पूरी सृष्टि जलमग्न थी, तब मार्कंडेय जी उस महासागर में अकेले तैर रहे थे।

तभी उन्होंने एक विशाल **बटवृक्ष** (Banyan Tree) के पत्ते पर एक छोटे बालक को देखा, जो अपने पैर का अंगूठा चूस रहा था। वह साक्षात् **भगवान नारायण** थे। नारायण ने मार्कंडेय को अपने मुख के भीतर पूरे ब्रह्मांड का दर्शन कराया और फिर उन्हें बाहर निकालकर जीवनदान दिया।

4. निष्कर्ष

महर्षि मार्कंडेय का चरित्र हमें निर्भयता और अडिग भक्ति की शिक्षा देता है। वे एक ऐसे ऋषि हैं जिन्होंने केवल शास्त्रों को पढ़ा नहीं, बल्कि सत्य का अनुभव किया। उनके द्वारा रचित मंत्र और ग्रंथ आज भी करोड़ों लोगों को मृत्यु के भय से मुक्त कर आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। वे ज्ञान और भक्ति के संगम का जीवंत प्रतीक हैं।


संदर्भ ग्रंथ (References)

  • मार्कंडेय पुराण (देवी महात्म्य खंड)।
  • महाभारत (वन पर्व - मार्कंडेय समस्या पर्व)।
  • शिव पुराण (रुद्र संहिता - मृत्युंजय प्रसंग)।
  • श्रीमद्भागवत पुराण (द्वादश स्कन्ध)।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!