महर्षि सनत्कुमार (Maharishi Sanatkumara)

Sooraj Krishna Shastri
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महर्षि सनत्कुमार: देवर्षि नारद के गुरु और 'भूमा विद्या' के महान उद्घोषक

महर्षि सनत्कुमार: देवर्षि नारद के गुरु और 'भूमा विद्या' के महान उद्घोषक

शोधपरक और दार्शनिक आलेख (The Great Teacher of Narada & Bhuma Vidya)

"यो वै भूमा तत्सुखं नाल्पे सुखमस्ति।" अर्थ: जो 'भूमा' (विराट/अनन्त) है, वही सुख है। अल्प (सीमित) में सुख नहीं है। — (सनत्कुमार, छान्दोग्य उपनिषद 7.23.1)

ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्रों (सनकादि ऋषियों) में महर्षि सनत्कुमार (Maharishi Sanatkumara) सबसे प्रखर और प्रभावशाली वक्ता माने जाते हैं। वे 'ब्रह्मविद्या' के साक्षात् स्वरूप हैं। जहाँ उनके भाई मौन और तपस्या में अधिक लीन रहते हैं, वहीं सनत्कुमार जिज्ञासुओं को उपदेश देने में अग्रणी हैं। उपनिषदों में उन्हें **देवर्षि नारद** का गुरु बताया गया है, जिन्होंने नारद को वेदों से परे 'आत्मज्ञान' का मार्ग दिखाया।

📌 महर्षि सनत्कुमार: एक दृष्टि में
पिता भगवान ब्रह्मा (मानस पुत्र)
समूह चतुःकुमार (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार)
प्रमुख शिष्य देवर्षि नारद, राजा पृथु
दार्शनिक सिद्धांत भूमा विद्या (Doctrine of the Infinite)
अवतार सम्बन्ध भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) का अवतार माने जाते हैं
निवास सनत्कुमार लोक (ब्रह्मलोक से भी ऊपर)
⏳ काल निर्धारण एवं युग
सृष्टि काल
आदि सृष्टि (Primordial Era)ये सृष्टि के सबसे प्राचीन ऋषियों में से हैं, जो कालगणना से परे हैं।
अवस्था
नित्य कुमार (Eternal Youth)ब्रह्मचर्य और पवित्रता के कारण ये सदैव बालक रूप में ही रहते हैं।

1. नारद और सनत्कुमार संवाद: 'भूमा' ही सुख है

छान्दोग्य उपनिषद (अध्याय 7) में सनत्कुमार और नारद का संवाद वेदांत का शिखर माना जाता है। नारद जी चारों वेदों, इतिहास और पुराणों के ज्ञाता थे, फिर भी उनका मन अशांत था। वे सनत्कुमार के पास आए और कहा—"मैं मंत्रों को जानता हूँ, पर आत्मा को नहीं।" (मन्त्रविद् एवास्मि नात्मविद्)।

सनत्कुमार ने उन्हें 'भूमा विद्या' (Knowledge of the Infinite) का उपदेश दिया:

  • अल्प में सुख नहीं: जो सीमित है (धन, पद, शरीर), उसमें सच्चा सुख नहीं मिल सकता क्योंकि वह नाशवान है।
  • भूमा क्या है? जहाँ न कुछ और दिखता है, न कुछ और सुनाई देता है, न कुछ और जाना जाता है—वही 'भूमा' (ब्रह्म) है।
  • आत्म-रति: जो इस भूमा को जान लेता है, वह 'स्वराट्' (Self-ruler) हो जाता है।

2. सनत्कुमार और कार्तिकेय (स्कन्द) का सम्बन्ध

पुराणों में एक बहुत ही रोचक मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) ही महर्षि सनत्कुमार के अवतार हैं।

  • छांदोग्य उपनिषद का साक्ष्य: उपनिषद के अंत में कहा गया है—"तम् स्कन्द इत्याचक्षते" (उन्हें ही लोग स्कन्द कहते हैं)।
  • ज्ञान शक्ति: जैसे सनत्कुमार 'ज्ञान' के अवतार हैं, वैसे ही कार्तिकेय 'ज्ञान-शक्ति' के देवता हैं। दोनों ही ब्रह्मचारी हैं और दोनों का स्वरूप कुमार (बालक) का है।
  • महाभारत: महाभारत में भी सनत्कुमार को सेनानी (स्कन्द) के रूप में वर्णित किया गया है जो अज्ञान रूपी असुरों का नाश करते हैं।

3. निष्कर्ष

महर्षि सनत्कुमार भारतीय दर्शन के उन विरले आचार्यों में से हैं जिन्होंने 'शब्द ज्ञान' (Bookish knowledge) को गौण और 'आत्म अनुभव' (Self-realization) को मुख्य बताया। नारद जैसे महान ऋषि का गुरु होना उनकी विद्वत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण है। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है—सच्चा सुख वस्तुओं में नहीं, बल्कि अनंत चेतना (भूमा) में है।


संदर्भ ग्रंथ (References)

  • छान्दोग्य उपनिषद (सप्तम अध्याय - भूमा विद्या)।
  • श्रीमद्भागवत पुराण (पृथु-सनत्कुमार संवाद)।
  • महाभारत (शांति पर्व)।
  • स्कन्द पुराण।

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