महर्षि कपिल: सांख्य शास्त्र के प्रवर्तक, भगवान विष्णु के अवतार और प्रथम मनोवैज्ञानिक | Maharshi Kapila

Sooraj Krishna Shastri
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महर्षि कपिल: सांख्य योग के आदि-प्रवर्तक और सृष्टि विज्ञान के जनक

महर्षि कपिल: सांख्य दर्शन के प्रवर्तक, भगवान विष्णु के अवतार और प्रथम मनोवैज्ञानिक

एक विस्तृत दार्शनिक और पौराणिक विश्लेषण: जिन्होंने सबसे पहले 'प्रकृति' और 'पुरुष' के द्वैत को समझाया (The First Philosopher of India)

भारतीय चिंतन परंपरा में महर्षि कपिल (Maharshi Kapila) का स्थान अद्वितीय है। वे केवल एक ऋषि नहीं, बल्कि **'सांख्य शास्त्र'** (Samkhya Philosophy) के जनक हैं। सांख्य दर्शन भारत का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक दर्शन है, जिसने बाद में **योग**, **वेदांत**, **आयुर्वेद** और यहाँ तक कि **बौद्ध धर्म** की भी नींव रखी।

श्रीमद्भागवत पुराण में उन्हें **भगवान विष्णु का पाँचवा अवतार** (कुछ गणनाओं में भिन्न) माना गया है। भगवान कृष्ण गीता में स्वयं कहते हैं—"सिद्धानां कपिलो मुनिः" (सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ)। उनका योगदान यह है कि उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति को किसी 'जादू' के रूप में नहीं, बल्कि **'विकासवाद'** (Theory of Evolution) के रूप में समझाया। डार्विन से हजारों साल पहले कपिल ने बता दिया था कि यह ब्रह्मांड 'प्रकृति' के क्रमिक विकास का परिणाम है।

📌 महर्षि कपिल: एक दृष्टि में
स्वरूप भगवान विष्णु के अंशावतार (ज्ञान अवतार)
माता-पिता प्रजापति कर्दम (पिता) और देवहूति (माता)
जन्म स्थान बिंदु सरोवर (सिद्धपुर, गुजरात) / सरस्वती तट
दर्शन सांख्य दर्शन (Samkhya - Dualistic Realism)
प्रमुख ग्रंथ सांख्य सूत्र, तत्व समास, कपिल गीता (भागवत में)
शिष्य आसुरी, पंचशिख (परंपरागत)
तीर्थ स्थान गंगा सागर (पश्चिम बंगाल), कोलायत (राजस्थान)
मुख्य सिद्धांत प्रकृति-पुरुष विवेक, सत्कार्यवाद, त्रिगुण (सत्व, रज, तम)

2. पौराणिक जीवन: कर्दम और देवहूति के पुत्र

महर्षि कपिल का जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ था—संसार में लुप्त हो चुके 'आत्मज्ञान' को पुनः स्थापित करना।

माता-पिता का तप: स्वायम्भुव मनु की पुत्री **देवहूति** का विवाह प्रजापति **कर्दम** से हुआ था। कर्दम ऋषि ने शर्त रखी थी कि संतान होने के बाद वे संन्यास ले लेंगे। वर्षों तक विमान में विहार करने के बाद, देवहूति ने नौ कन्याओं को जन्म दिया। लेकिन पुत्र न होने के कारण वे दुखी थीं। तब भगवान विष्णु ने उन्हें वचन दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र रूप में आएंगे।

कपिल का प्राकट्य: समय आने पर भगवान कपिल का जन्म हुआ। उनके जन्म के साथ ही कर्दम ऋषि वन को चले गए। कपिल मुनि अपनी माता देवहूति के साथ 'बिंदु सरोवर' के तट पर रहे। उनका मुख्य कार्य अपनी माता को वह ज्ञान देना था जिससे वे संसार के बंधन (मोह) से मुक्त हो सकें।

3. कपिल गीता: माता देवहूति को उपदेश

श्रीमद्भागवत पुराण के **तीसरे स्कंध** (Canto 3) में कपिल और देवहूति का संवाद वर्णित है, जिसे **'कपिल गीता'** कहा जाता है। यह सांख्य योग का सबसे भक्तिमय और सरल रूप है।

संवाद का सार

माता देवहूति पूछती हैं: "हे प्रभु! मैं अपनी इन्द्रियों के विषयों से थक गई हूँ और अज्ञान के अंधकार में फँसी हूँ। आप मेरी अज्ञान-ग्रंथि को काट दें।"

कपिल मुनि उत्तर देते हैं: "चेत: खल्वस्य बन्धाय मुक्तये चात्मनो मतम्।"
(मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। यदि मन विषयों (संसार) में आसक्त है, तो बंधन है; यदि वही मन ईश्वर में आसक्त है, तो मोक्ष है।)

उन्होंने माता को **अष्टांग योग**, **भक्ति योग** और **तत्व ज्ञान** का उपदेश दिया, जिससे देवहूति को इसी जन्म में सिद्धि प्राप्त हुई।

4. सांख्य दर्शन: 25 तत्वों का विज्ञान

'सांख्य' का अर्थ है—संख्या (Number) या सम्यक ख्याति (सही ज्ञान)। कपिल मुनि ने ब्रह्मांड की रचना को **25 तत्वों** (Elements) में बांटा।

सांख्य दर्शन **द्वैतवादी** (Dualist) है। इसके अनुसार संसार दो मूल सत्ताओं से बना है:

  1. पुरुष (Purusha): यह शुद्ध चेतना (Consciousness) है। यह न कुछ करता है, न बदलता है। यह केवल 'द्रष्टा' (Witness) है।
  2. प्रकृति (Prakriti): यह जड़ पदार्थ (Matter/Energy) है। यह त्रिगुणात्मक (सत्व, रज, तम) है। संसार का सारा खेल प्रकृति ही करती है।
विकास का क्रम (Evolution of Universe)

जब पुरुष का सान्निध्य प्रकृति को मिलता है, तो सृष्टि शुरू होती है:
1. प्रकृति (मूल कारण)
2. महत् (Cosmic Intelligence/बुद्धि)
3. अहंकार (Ego)
4-19. मन, 10 इन्द्रियां, 5 तन्मात्राएं
20-24. 5 महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश)
25. पुरुष (आत्मा - जो इन सबसे अलग है)

इस वर्गीकरण ने भारत के विज्ञान, चिकित्सा (आयुर्वेद) और मनोविज्ञान को आधार दिया।

5. प्रथम मनोवैज्ञानिक: मन, बुद्धि और अहंकार का विश्लेषण

आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) 'मन' को चेतना का हिस्सा मानता है, लेकिन कपिल मुनि ने हजारों साल पहले यह क्रांतिकारी विचार दिया कि **मन, बुद्धि और अहंकार 'चेतना' (आत्मा) नहीं हैं, बल्कि ये 'पदार्थ' (Matter/Prakriti) का ही सूक्ष्म रूप हैं।**

  • अंतःकरण: उन्होंने मन, बुद्धि और अहंकार को मिलाकर 'अंतःकरण' (Internal Instrument) कहा।
  • दुख का कारण: पुरुष (आत्मा) का दुख इसलिए है क्योंकि वह भूल से खुद को अंतःकरण (मन) मान लेता है।
  • कैवल्य: जब पुरुष समझ लेता है कि "मैं प्रकृति नहीं हूँ, मैं मन नहीं हूँ, मैं केवल साक्षी हूँ", तब उसे 'कैवल्य' (Isolation/Liberation) प्राप्त होता है।

6. सगर पुत्रों की कथा और गंगा अवतरण

कपिल मुनि का संबंध प्रसिद्ध **गंगा अवतरण** की कथा से भी है।

राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया। इंद्र ने ईर्ष्यावश यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम (पाताल लोक/गंगा सागर के पास) में बांध दिया, जहाँ मुनि समाधि में थे। सगर के 60,000 पुत्र घोड़े को खोजते हुए वहां पहुंचे और कपिल मुनि को चोर समझकर अपमानित करने लगे।
जैसे ही कपिल मुनि ने अपनी आँखें खोलीं, उनके तप के तेज (क्रोध नहीं) से सगर के 60,000 पुत्र जलकर भस्म हो गए।

भागीरथ का प्रयास: इन पुत्रों की मुक्ति के लिए बाद में भागीरथ ने तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर उतारा। जहाँ गंगा ने सगर पुत्रों की राख को स्पर्श किया और समुद्र में मिलीं, वह स्थान आज **'गंगा सागर'** कहलाता है। मकर संक्रांति पर वहाँ लगने वाला मेला महर्षि कपिल की स्मृति में ही है।

7. प्रभाव: बौद्ध धर्म, गीता और आयुर्वेद पर छाप

कपिल मुनि के विचारों का प्रभाव भारतीय संस्कृति के हर क्षेत्र पर है:

  • श्रीमद्भगवद्गीता: गीता का दूसरा अध्याय (सांख्य योग) और गुण-विभाग पूरी तरह कपिल के दर्शन पर आधारित है। कृष्ण ने सांख्य को ज्ञान का सर्वोच्च रूप माना है।
  • बौद्ध धर्म: भगवान बुद्ध का जन्म **'कपिलवस्तु'** में हुआ था, जिसका नाम कपिल मुनि के नाम पर था। बुद्ध के प्रारंभिक गुरु (अलार कलाम) सांख्य दर्शन के विद्वान थे। बुद्ध का 'दुख' और 'निर्वाण' का सिद्धांत सांख्य के 'दुख-त्रय' और 'कैवल्य' से बहुत मिलता-जुलता है (ईश्वर को न मानना, लेकिन कर्म और मुक्ति को मानना)।
  • आयुर्वेद: चरक संहिता और सुश्रुत संहिता पूरी तरह सांख्य के 25 तत्वों और त्रिगुण (वात, पित्त, कफ) के सिद्धांत पर काम करती है।

8. निष्कर्ष: ज्ञान और भक्ति का समन्वय

महर्षि कपिल एक अनूठे ऋषि थे। एक ओर उन्होंने **'निरीश्वर सांख्य'** (Atheistic Samkhya - जो केवल तत्वों की बात करता है) का मार्ग प्रशस्त किया, तो दूसरी ओर भागवत पुराण में **'सेश्वर सांख्य'** (Theistic Samkhya - जो भक्ति प्रधान है) का उपदेश दिया।

उन्होंने मानव जाति को सिखाया कि आँख बंद करके विश्वास मत करो, बल्कि सृष्टि के तत्वों का विश्लेषण (Analysis) करो। विवेक (Discrimination between Self and Matter) ही मुक्ति का एकमात्र उपाय है।
आज भी, जब कोई वैज्ञानिक 'क्वांटम फिजिक्स' में 'ऑब्जर्वर' (Observer) और 'मैटर' (Matter) के संबंध की बात करता है, तो वह अनजाने में महर्षि कपिल के **'पुरुष'** और **'प्रकृति'** के सिद्धांत को ही दोहरा रहा होता है। कपिल मुनि भारत के ही नहीं, विश्व के प्रथम वैज्ञानिक दार्शनिक थे।


संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)

  • श्रीमद्भागवत पुराण (तृतीय स्कंध) - गीताप्रेस गोरखपुर।
  • सांख्य दर्शन - स्वामी विरजानन्द।
  • Indian Philosophy - Dr. S. Radhakrishnan (Vol II).
  • द प्रिंसिपल उपनिषड्स - सांख्य योग विवेचन।

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