माइकल विट्जेल: वैदिक शाखाओं के भौगोलिक शोधकर्ता, हार्वर्ड के इंडोलॉजिस्ट और 'कुरु एकीकरण' के प्रतिपादक | Michael Witzel

Sooraj Krishna Shastri
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माइकल विट्जेल: वैदिक ग्रंथों के भौगोलिक और भाषाई विश्लेषक

माइकल विट्जेल: वैदिक शाखाओं के भौगोलिक शोधकर्ता और हार्वर्ड के शीर्ष इंडोलॉजिस्ट

एक विस्तृत अकादमिक और भाषावैज्ञानिक विश्लेषण: वह जर्मन-अमेरिकी विद्वान जिसने वेदों की 'भाषा' और 'भूगोल' का सूक्ष्म स्तरीकरण किया और इंडोलॉजी में 'कुरु एकीकरण' (Kuru Synthesis) का ऐतिहासिक सिद्धांत दिया (The Wales Professor of Sanskrit)

भारतीय विद्या (Indology) के आधुनिक पाश्चात्य विद्वानों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल विट्जेल (Michael Witzel) का नाम सबसे प्रमुख (और भारत में सबसे अधिक विवादास्पद) है। उनका शोध मुख्यतः इस बात पर केंद्रित है कि वैदिक साहित्य की रचना कब (Chronology) और कहाँ (Geography) हुई।

जहाँ पारंपरिक भारतीय विद्वान वेदों को 'अपौरुषेय' और 'अनादि' मानते हैं, वहीं विट्जेल ने शुद्ध 'भाषाविज्ञान' (Philology) और 'पाठ्य-आलोचना' (Textual Criticism) का प्रयोग करके वेदों के रचना-काल और उनकी विभिन्न शाखाओं (Shakhas) के भौगोलिक स्थानों का सटीक निर्धारण करने का प्रयास किया।

📌 माइकल विट्जेल: एक ऐतिहासिक प्रोफाइल
पूरा नाम माइकल विट्जेल (Michael Witzel)
जन्म 18 जुलाई 1943 (श्विबस, जर्मनी)
संस्थान हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University)
पद वेल्स प्रोफेसर ऑफ संस्कृत (Wales Professor of Sanskrit)
मुख्य शोध क्षेत्र वैदिक संस्कृत, वैदिक भूगोल, पौराणिक कथाएं, भाषाविज्ञान
प्रमुख सिद्धांत कुरु एकीकरण (Kuru Synthesis), वैदिक शाखाओं का भौगोलिक विभाजन
विवाद/रुख Out of India Theory (OIT) के घोर आलोचक, AMT के समर्थक

2. जीवन परिचय: जर्मनी से नेपाल और हार्वर्ड तक

माइकल विट्जेल का जन्म जर्मनी में हुआ था। उन्होंने जर्मनी के टूबिंगन (Tübingen) और एर्लांगेन (Erlangen) विश्वविद्यालयों में पॉल थीमे (Paul Thieme) जैसे महान इंडोलॉजिस्ट्स के अधीन इंडोलॉजी, इंडो-यूरोपीय अध्ययन और जापानी भाषा का अध्ययन किया।

नेपाल में कार्य: 1970 के दशक में उन्होंने काठमांडू (नेपाल) में 'नेपाल-जर्मन पांडुलिपि संरक्षण परियोजना' का नेतृत्व किया, जहाँ उन्होंने दुर्लभ वैदिक पांडुलिपियों का अध्ययन किया। 1987 में उन्हें हार्वर्ड विश्वविद्यालय में 'वेल्स प्रोफेसर ऑफ संस्कृत' नियुक्त किया गया, जो अमेरिका में संस्कृत का सबसे प्रतिष्ठित अकादमिक पद माना जाता है। वे हार्वर्ड ओरिएंटल सीरीज़ (Harvard Oriental Series) के मुख्य संपादक भी हैं।

3. वैदिक शाखाओं का भौगोलिक मानचित्रण (Tracing Vedic Dialects)

विट्जेल का सबसे बड़ा अकादमिक योगदान उनका शोध पत्र "Tracing the Vedic Dialects" (1989) है। इसमें उन्होंने दिखाया कि चारों वेदों की विभिन्न 'शाखाएं' (Recensions) भारत के किन-किन विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित हुईं।

शाखाओं का भौगोलिक वितरण (Witzel's Mapping)

विट्जेल ने ग्रंथों में उल्लिखित नदियों, पहाड़ों, वनस्पतियों और जानवरों के आधार पर शाखाओं का स्थान तय किया:
1. ऋग्वेद (शाकल शाखा): ग्रेटर पंजाब (सप्तसिंधु क्षेत्र)।
2. मैत्रायणी संहिता (कृष्ण यजुर्वेद): कुरुक्षेत्र और हरियाणा।
3. कठ संहिता (कठ आरण्यक): पूर्वी पंजाब और बाद में कश्मीर।
4. तैत्तिरीय संहिता: पांचाल क्षेत्र (गंगा-यमुना दोआब)।
5. जैमिनीय ब्राह्मण (सामवेद): दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र (केरल/कर्नाटक की ओर)।

उन्होंने यह भी दिखाया कि कैसे वैदिक संस्कृति पश्चिम (पंजाब) से पूर्व (विदेह, बिहार) की ओर धीरे-धीरे विस्थापित हुई।

4. वैदिक साहित्य का कालानुक्रमिक स्तरीकरण (5 स्तर)

विट्जेल ने वैदिक संस्कृत भाषा के क्रमिक विकास के आधार पर वैदिक साहित्य को 5 अलग-अलग कालों (Strata) में विभाजित किया है:

  1. ऋग्वैदिक काल (ल. 1500-1200 ई.पू.): केवल ऋग्वेद (मंडल 2-7 सबसे पुराने)। यह सबसे प्राचीन 'काव्यात्मक' संस्कृत है।
  2. मंत्र काल (ल. 1200-1000 ई.पू.): अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद के मंत्र भाग। इसमें लोहे (श्याम अयस) का प्रारंभिक उल्लेख मिलता है।
  3. संहिता गद्य काल (ल. 1000-800 ई.पू.): यजुर्वेद का गद्य भाग (मैत्रायणी, तैत्तिरीय संहिता)। भाषा में परिवर्तन दिखता है।
  4. ब्राह्मण काल (ल. 800-600 ई.पू.): ऐतरेय, शतपथ आदि ब्राह्मण ग्रंथ। कुरु-पांचाल राज्य का उत्कर्ष।
  5. सूत्र काल (ल. 600-400 ई.पू.): श्रौत सूत्र, गृह्य सूत्र और प्रारंभिक उपनिषद। यह काल बौद्ध धर्म के उदय के समानांतर है।
  6. विट्जेल का तर्क है कि हम ब्राह्मण काल की घटना को ऋग्वेद काल में नहीं थोप सकते। दोनों का समाज और भाषा अलग-अलग है।

    5. विट्जेल का मास्टरस्ट्रोक: 'कुरु एकीकरण' (The Kuru Synthesis)

    विट्जेल का सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक सिद्धांत "The Development of the Vedic Canon and its Schools" (1997) में प्रस्तुत 'कुरु एकीकरण' (Kuru Synthesis) है।

    कुरु एकीकरण क्या है?

    विट्जेल के अनुसार, ऋग्वेद के मंत्र मूल रूप से अलग-अलग कबीलों (Tribes) के बिखरे हुए सूक्त थे। जब लौह युग (Iron Age) में कुरु वंश (राजा परीक्षित और जनमेजय) ने हरियाणा-पश्चिमी यूपी क्षेत्र में एक शक्तिशाली राज्य (State) की स्थापना की, तो उन्होंने अपनी सत्ता को धार्मिक वैधता देने के लिए:
    1. बिखरे हुए वैदिक मंत्रों को संकलित कराकर 'चार वेदों' का निश्चित स्वरूप (Canon) तय किया।
    2. जटिल 'श्रौत कर्मकांडों' (जैसे अश्वमेध, राजसूय) का आविष्कार किया जो केवल राजा ही कर सकता था।
    विट्जेल इसे प्राचीन भारत की सबसे बड़ी 'बौद्धिक और सामाजिक क्रांति' मानते हैं।

    6. आर्यन प्रवासन सिद्धांत (AMT) के प्रखर रक्षक

    भारत में विट्जेल को मुख्य रूप से Indo-Aryan Migration Theory (AMT) के सबसे कड़े रक्षक के रूप में जाना जाता है।

    • विट्जेल का तर्क: वे 'आर्यन आक्रमण' (Invasion) को खारिज करते हैं, लेकिन 'प्रवासन' (Migration) का पुरजोर समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि इंडो-आर्यन भाषी लोग मध्य एशिया (Bactria-Margiana) से होते हुए कई लहरों में पंजाब आए।
    • भाषाई प्रमाण (Substratum): विट्जेल ने ऋग्वेद में लगभग 300 ऐसे शब्दों (जैसे कीकट, प्रमगन्द) की पहचान की है जो न तो इंडो-यूरोपीय हैं और न ही द्रविड़। उन्होंने इसे 'Language X' कहा है, जो सिद्ध करता है कि आर्य बाहर से आए और उन्होंने स्थानीय भाषाओं के शब्द अपनाए।
    • OIT का विरोध: उन्होंने श्रीकांत तलगेरी (Shrikant Talageri), कोएनराड एल्स्ट (Koenraad Elst) और राजाराम जैसे भारतीय विद्वानों के 'आउट ऑफ इंडिया थ्योरी' (OIT - आर्य भारत के ही मूल निवासी थे) का अकादमिक मंचों (जैसे EJVS) पर अत्यंत तीखा और तकनीकी खंडन किया है।

    7. कैलिफोर्निया पाठ्यपुस्तक विवाद और हिंदुत्व इतिहासलेखन का विरोध

    2005 में अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में इतिहास की पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक बड़ा विवाद हुआ। हिंदू अमेरिकी समूहों ने मांग की कि पाठ्यपुस्तकों से 'आर्यन माइग्रेशन' और 'जाति व्यवस्था की कठोरता' को हटाया जाए।

    माइकल विट्जेल ने 50 इंडोलॉजिस्ट्स के हस्ताक्षर वाला एक पत्र कैलिफोर्निया बोर्ड को लिखा और इन बदलावों को 'छद्म-इतिहास' (Pseudo-history) और 'हिंदुत्व राजनीति से प्रेरित' बताकर रुकवा दिया। इस घटना ने उन्हें भारतीय दक्षिणपंथी विचारकों के निशाने पर ला दिया। वे भारत के प्राचीन इतिहास में किसी भी प्रकार के 'अति-राष्ट्रवादी' (Ultra-nationalist) संपादन के घोर विरोधी हैं।

    8. निष्कर्ष: फिलोलॉजी के आधुनिक धुरंधर

    माइकल विट्जेल की इंडोलॉजी उनके आलोचकों और समर्थकों दोनों के लिए नज़रअंदाज़ करने योग्य नहीं है।

    आप उनके 'आर्यन प्रवासन' के निष्कर्षों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन वेदों के 'शब्दकोश', 'व्याकरण', और 'भौगोलिक विवरणों' (Philological Data) को जिस वैज्ञानिक बारीकी से उन्होंने छाना है, वह पश्चिमी इंडोलॉजी की महान जर्मन परंपरा (मैक्स मूलर, रॉट) का चरम विकास है। उन्होंने अपनी पुस्तक "Inside the Texts, Beyond the Texts" के माध्यम से यह सिखाया कि किसी प्राचीन ग्रंथ को समझने के लिए उसे उसी के युग और भाषा के संदर्भ में पढ़ना आवश्यक है, न कि बाद की पौराणिक आस्थाओं के चश्मे से।


    संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)

    • Tracing the Vedic Dialects - Michael Witzel (1989).
    • The Development of the Vedic Canon and its Schools: The Social and Political Milieu - Michael Witzel.
    • Inside the Texts, Beyond the Texts - Edited by M. Witzel (Harvard Oriental Series).
    • The Origins of the World's Mythologies - Michael Witzel (Oxford University Press, 2012).
    • Electronic Journal of Vedic Studies (EJVS) - Founder & Editor M. Witzel.

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