खरगोश की थीसिस
गाइड की ताकत और जंगल का न्याय
एक जंगल में दोपहर के वक्त एक खोह के बाहर एक खरगोश जल्दी-जल्दी अपने टाइपराइटर से कुछ टाइप कर रहा था। तभी वहां एक लोमड़ी आई और उसने खरगोश से पूछा— "तुम क्या कर रहे हो?"
खरगोश: "मैं थीसिस लिख रहा हूं।"
लोमड़ी: "अच्छा! किस बारे में?"
खरगोश: "विषय है— 'खरगोश किस तरह लोमड़ी को मार के खा जाता है?'"
लोमड़ी: "क्या बकवास है यह? कोई मूर्ख भी बता देगा कि खरगोश कभी लोमड़ी को मार कर खा नहीं सकता..."
खरगोश: "आओ मैं तुम्हें प्रत्यक्ष दिखाता हूं।"
यह कह कर खरगोश लोमड़ी के साथ खोह में घुस गया और कुछ मिनट बाद लोमड़ी की हड्डियां लेकर वापस आ गया और दोबारा से टाइपिंग में व्यस्त हो गया।
थोड़ी देर बाद वहां एक भेड़िया आया और खरगोश से पूछा— "क्या कर रहे हो, इतने ध्यान से?"
खरगोश: "थीसिस लिख रहा हूं। विषय है— 'एक खरगोश किस तरह एक भेड़िये को खा गया?'"
भेड़िया: "मूर्ख! यह कभी हो नहीं सकता।"
खरगोश: "अच्छा! आओ सबूत देता हूं।"
खरगोश भेड़िये को भी उस खोह में ले गया और थोड़ी देर बाद उसकी हड्डियां लेकर बाहर आ गया।
तभी एक भालू वहां से गुजरा, उसने हड्डियों का ढेर देख कर पूछा— "ये हड्डियाँ कैसी पड़ी हैं? और तुम क्या लिख रहे हो?"
खरगोश: "एक खरगोश ने इन्हें मार दिया। मैं थीसिस लिख रहा हूं कि 'एक खरगोश ने एक भालू को कैसे मार के खा लिया?'"
भालू (हंसते हुए): "मजाक अच्छा करते हो। यह कभी नहीं हो सकता।"
खरगोश: "चलो दिखाता हूं..."
खरगोश भालू को भी खोह में ले गया...
🦁 गुफा के अंदर का सच
जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां एक विशालकाय शेर बैठा था, जो खरगोश का 'गाइड' था।
यह मायने नहीं रखता कि आपकी "थीसिस" कितनी बकवास या बेबुनियाद है... मायने रखता है कि आपका गाइड कितना शातिर है।
आजकल यही हो रहा है। इसलिए 'खरगोश मीडिया' से सावधान रहें और भ्रामक विज्ञापनों के झाँसे में न आएं।
🗳️ अपने मताधिकार का उपयोग अवश्य ही करें।
