श्चुत्व सन्धि | Schutva Sandhi

Sooraj Krishna Shastri
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श्चुत्व सन्धि (Ścutva Sandhi)

व्यंजन (हल्) सन्धि का प्रवेश द्वार: 'स्तोः श्चुना श्चुः' सूत्र, नियम, अपवाद और महत्त्वपूर्ण उदाहरणों का विस्तृत विवेचन।

परिचय: श्चुत्व सन्धि व्यंजन सन्धि (हल् सन्धि) का सबसे पहला और महत्त्वपूर्ण भाग है। इसमें दन्त्य वर्णों (स्, तवर्ग) का तालव्य वर्णों (श्, चवर्ग) के साथ सम्पर्क होने पर रूप परिवर्तन होता है।

१. सन्धि विधायक मुख्य सूत्र

सूत्र: स्तोः श्चुना श्चुः (८.४.४०)

सूत्र विच्छेद: स्तोः + श्चुना + श्चुः।
अर्थ (नियम): यदि सकार (स्) या तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के पहले या बाद में शकार (श्) या चवर्ग (च्, छ्, ज्, झ्, ञ्) का योग (सम्पर्क) हो जाए, तो सकार (स्) और तवर्ग के स्थान पर क्रमशः शकार (श्) और चवर्ग हो जाता है।
परिवर्तन का क्रम (क्या किसमें बदलता है?):
  • स् ➔ श्
  • त् ➔ च्
  • थ् ➔ छ्
  • द् ➔ ज्
  • ध् ➔ झ्
  • न् ➔ ञ्

(नोट: 'श्' या 'चवर्ग' आगे हो या पीछे, परिवर्तन हमेशा 'स्' या 'तवर्ग' में ही होगा।)

२. महत्त्वपूर्ण उदाहरण (V.V.Imp)

(क) स् ➔ श् के उदाहरण:
रामस् + शेते = रामश्शेते (राम सोता है)। (यहाँ 'स्' के बाद 'श्' आया, अतः 'स्' को 'श्' हो गया)।
रामस् + चिनोति = रामश्चिनोति (राम चुनता है)।
हरिस् + शेते = हरिश्शेते।
(ख) तवर्ग ➔ चवर्ग के उदाहरण:
सत् + चित् = सच्चित् (त् ➔ च्)।
उद् + ज्वलः = उज्ज्वलः (द् ➔ ज्)। (ध्यान दें: यहाँ पहले 'द्' जश्त्व से बनता है, फिर श्चुत्व होकर 'ज्' बनता है। यह परीक्षा में बहुत पूछा जाता है।)
सत् + जनः = सज्जनः (त् ➔ च् ➔ ज्)।
जगत् + जननी = जगज्जननी।
उद् + चारणम् = उच्चारणम्।
(ग) न् ➔ ञ् के उदाहरण (अत्यंत महत्त्वपूर्ण):
शार्ङ्गिन् + जय = शार्ङ्गिञ्जय (हे विष्णु! जय हो)। (यहाँ 'न्' के बाद 'ज्' आया है, अतः 'न्' अपने वर्ग के पञ्चमाक्षर 'ञ्' में बदल गया)।
यज् + नः = यज्ञः। (यहाँ 'ज्' (चवर्ग) पहले है और 'न्' (तवर्ग) बाद में है। सम्पर्क होने के कारण 'न्' बदल कर 'ञ्' हो गया। ज् + ञ् = ज्ञ बनता है)।
याच् + ना = याञ्चा (याचना/माँगना)।

३. श्चुत्व सन्धि का अपवाद (Exceptions)

हर नियम का एक अपवाद होता है। श्चुत्व सन्धि को रोकने के लिए महर्षि पाणिनि ने एक विशेष सूत्र दिया है, जहाँ से परीक्षाओं में निश्चित रूप से प्रश्न आते हैं।

अपवाद सूत्र: शात् (८.४.४४)

अर्थ: यदि शकार (श्) के ठीक बाद तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) आए, तो वहाँ श्चुत्व सन्धि (तवर्ग का चवर्ग) नहीं होती है।
अपवाद के उदाहरण:
विश् + नः = विश्नः। (यहाँ 'श्' के बाद 'न्' आया है। सामान्य नियम 'स्तोः श्चुना श्चुः' से 'न्' को 'ञ्' होना चाहिए था, परन्तु 'शात्' सूत्र ने रोक दिया। अतः कोई बदलाव नहीं हुआ)।
प्रश् + नः = प्रश्नः। (प्रश्न)। यहाँ भी 'श्' के बाद 'न्' है, अतः श्चुत्व नहीं हुआ।
🌺 परीक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण सार (Summary):
  • मुख्य सूत्र: स्तोः श्चुना श्चुः (८.४.४०)।
  • नियम: स्/तवर्ग का श्/चवर्ग से योग होने पर स्/तवर्ग ➔ श्/चवर्ग में बदल जाते हैं।
  • पहचान: शब्द के बीच में श्च्, श्श, ञ्ज, ज्ञ, च्च, ज्ज जैसे संयुक्त वर्ण दिखाई देते हैं। (सच्चित्, उज्ज्वलः, रामश्चिनोति)।
  • अपवाद: 'शात्' सूत्र — यदि 'श्' के बाद तवर्ग हो, तो सन्धि नहीं होगी (विश्नः, प्रश्नः)।
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