मूल गीत एवं हिन्दी अनुवाद
१. अहं नमामि मातरम्, गुरुं नमामि सादरम् ॥
अनुवाद: मैं माता को प्रणाम करता/करती हूँ और आदर के साथ गुरु को प्रणाम करता/करती हूँ।
२. स्वयं पठामि सर्वदा, प्रियं वदामि सर्वदा ॥
अनुवाद: मैं हमेशा स्वयं (अपने आप) पढ़ता/पढ़ती हूँ और हमेशा प्रिय (मीठा) बोलता/बोलती हूँ।
३. हितं करोमि सर्वदा, शुभं करोमि सर्वदा ॥
अनुवाद: मैं हमेशा (सबका) भला करता/करती हूँ और हमेशा शुभ (कल्याणकारी) कार्य करता/करती हूँ।
४. हरिं नमामि सादरम्, गुरुं नमामि सादरम् ॥
अनुवाद: मैं आदर के साथ हरि (ईश्वर) को प्रणाम करता/करती हूँ और आदर के साथ गुरु को प्रणाम करता/करती हूँ।
५. चलामि नीति-सत्पथे, हरामि मातृभू-व्यथाम् ॥
अनुवाद: मैं नीति और सत्य के मार्ग पर चलता/चलती हूँ और अपनी मातृभूमि की व्यथा (पीड़ा) को दूर करता/करती हूँ।
६. दधामि साधुताव्रतम्, सृजामि कीर्तिसत्कथाम् ॥
अनुवाद: मैं सज्जनता के व्रत को धारण करता/करती हूँ और यश की सच्ची (सुन्दर) कहानी की रचना करता/करती हूँ।
७. प्रभुं जपामि सादरम्, अहं नमामि मातरम् ॥
अनुवाद: मैं आदर सहित प्रभु का नाम जपता/जपती हूँ और मैं माता को प्रणाम करता/करती हूँ।
अभ्यास कार्य (प्रश्न-उत्तर)
• रिक्तस्थान पूर्ति
क. गुरुं नमामि सादरम् ।
ख. हितं करोमि सर्वदा ।
ग. चलामि नीति-सत्पथे ।
घ. दधामि साधुता व्रतम् ।
ङ. सृजामि कीर्तिसत्कथाम् ।
१. एकशब्देन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर)
यथा- अहं कां नमामि?
उत्तरम्: मातरम्
क. अहं किं करोमि सर्वदा?
उत्तरम्: हितं / शुभं
ख. अहं प्रभुं कथं जपामि?
उत्तरम्: सादरम्
ग. अहं कां हरामि?
उत्तरम्: मातृभू-व्यथाम्
घ. अहं किं दधामि?
उत्तरम्: साधुताव्रतम्
ङ. अहं कां सृजामि?
उत्तरम्: कीर्तिसत्कथाम्
२. प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर)
यथा- त्वं किं दधासि?
उत्तरम्: अहं साधुताव्रतम् दधामि।
क. त्वं नित्यं कां नमसि?
उत्तरम्: अहं नित्यं मातरम् (गुरुं च) नमामि।
ख. त्वं स्वयं किं किं करोषि?
उत्तरम्: अहं स्वयं सर्वदा पठामि, प्रियं वदामि, हितं शुभं च करोमि।
ग. त्वं कस्याः व्यथां हरसि?
उत्तरम्: अहं मातृभूमेः (मातृभू-) व्यथां हरामि।
घ. त्वं किं धरसि?
उत्तरम्: अहं साधुताव्रतम् दधामि।
ङ. त्वं कां सृजसि?
उत्तरम्: अहं कीर्तिसत्कथाम् सृजामि।
३. क्रियापदैः वाक्य निर्माण
| क्रियापद | निर्मित वाक्य |
|---|---|
| नमामि | अहं सादरं गुरुं नमामि। |
| चलामि | अहं नीति-सत्पथे चलामि। |
| पठामि | अहं स्वयं सर्वदा पठामि। |
| सृजामि | अहं कीर्तिसत्कथाम् सृजामि। |
| जपामि | अहं सादरं प्रभुं जपामि। |

