मातामह्याः उपनेत्रम् (Matahmahya Upanetram) - Class 9 Sanskrit Chapter 2 Translation & Solutions

Sooraj Krishna Shastri
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मातामह्याः उपनेत्रम् - संस्कृत पाठ २ (कक्षा ९)

द्वितीयः पाठः - मातामह्याः उपनेत्रम्

कक्षा ९ | इरावती (NCERT) | गद्यांश, हिन्दी अनुवाद, शब्दार्थ एवं सम्पूर्ण अभ्यास कार्य

पाठ का सार: वस्तुओं को उनके निर्धारित स्थान पर रखना उचित है। कभी-कभी असावधानी के कारण जब आवश्यक वस्तु दिखाई नहीं देती, तब हम धैर्यपूर्वक उसे खोजते हैं और परिवार का सहयोग लेते हैं। इस हास्यपूर्ण कहानी में रमा अपनी नानी का चश्मा खोजती है।

मूल संस्कृत पाठ एवं पैराग्राफ-वाइज हिन्दी अनुवाद

एषा रमायाः मातामही अस्ति। रमायाः मातामही सर्वदा उपनेत्रं धारयति। मातामह्याः पुस्तकानां पठने अभिरुचिः अस्ति। मातामही प्रतिदिनं प्रातः वार्तापत्रं पठति।
अनुवाद: यह रमा की नानी हैं। रमा की नानी हमेशा चश्मा पहनती हैं। नानी की पुस्तकों को पढ़ने में रुचि है। नानी प्रतिदिन सुबह अखबार पढ़ती हैं।
एकस्मिन् दिने मातामही प्रातः एव रमाम् उत्थापयितुं प्रयासम् अकरोत्। मातामही उपनेत्रं न लभते स्म। उपनेत्रं विना मातामही कष्टम् अनुभवति स्म। सा आवश्यकानि वस्तूनि अन्वेष्टुं समर्था न आसीत्।
अनुवाद: एक दिन नानी ने सुबह-सुबह ही रमा को उठाने का प्रयास किया। नानी को चश्मा नहीं मिल रहा था। चश्मे के बिना नानी कष्ट (परेशानी) का अनुभव करती थीं। वह आवश्यक वस्तुओं को खोजने में समर्थ नहीं थीं।
रमा गाढनिद्रायाम् आसीत्। सा निद्रां न त्यजति स्म। मातामही रमाम् अति-स्नेहेन उत्थापितवती। सा रमाम् उपनेत्रम् अन्वेष्टुम् उक्तवती।
अनुवाद: रमा गहरी नींद में थी। वह नींद नहीं छोड़ रही थी (उठ नहीं रही थी)। नानी ने रमा को बहुत प्यार से उठाया। उन्होंने रमा को चश्मा खोजने के लिए कहा।
रमा निद्रायाम् एव उपनेत्रम् अन्वेष्टुम् आरभत। सा उपधानानाम् अधः उपनेत्रम् अन्विष्टवती। मातामही बहुवारं तत्र उपनेत्रं स्थापयति स्म। उपनेत्रम् उपधानानाम् अधः न लब्धम्।
अनुवाद: रमा ने नींद में ही चश्मा खोजना शुरू कर दिया। उसने तकियों के नीचे चश्मा खोजा। नानी कई बार वहाँ चश्मा रखती थीं। चश्मा तकियों के नीचे नहीं मिला।
मातामही रमां समयं पृच्छति स्म। रमा अवदत् लघुसूचिका पञ्चमे अङके दीर्घसूचिका षष्ठे अङ्के च अस्ति। प्रायशः सार्ध-पञ्चवादन-समयः आसीत्। मातामह्या वार्तापत्रं पठनीयम् आसीत्, भ्रमणाय च गन्तव्यम् आसीत्।
अनुवाद: नानी रमा से समय पूछ रही थीं। रमा ने कहा छोटी सुई पाँचवें अंक पर और बड़ी सुई छठे अंक पर है। लगभग साढ़े पाँच बजे का समय था। नानी को अखबार पढ़ना था, और घूमने के लिए जाना था।
रमा मातामह्याः उत्पीठिकायां पुस्तकानां मध्ये उपनेत्रम् अन्विष्टवती। मातामही उत्पीठिकायां स्थित्वा वार्तापत्रं पुस्तकानि च पठति। प्रायेण सा पुस्तकानां मध्ये उपनेत्रं त्यजति। उपनेत्रम् उत्पीठिकायां न आसीत्।
अनुवाद: रमा ने नानी की मेज पर पुस्तकों के बीच चश्मा खोजा। नानी मेज पर बैठकर अखबार और पुस्तकें पढ़ती हैं। प्रायः वह पुस्तकों के बीच चश्मा छोड़ देती हैं। चश्मा मेज पर नहीं था।
रमा उपनेत्रं स्नानागारे अन्विष्टवती। स्नानागारे बहूनि वस्त्राणि आसन्। मातामही यदा कदा उपनेत्रं स्नानागरे त्यजति स्म। उपनेत्रं स्नानागारे अपि न आसीत्।
अनुवाद: रमा ने चश्मा स्नानघर (बाथरूम) में खोजा। स्नानघर में बहुत से कपड़े थे। नानी कभी-कभी चश्मा स्नानघर में छोड़ देती थीं। चश्मा स्नानघर में भी नहीं था।
रमा उपनेत्रम् अङ्गणे अन्विष्टवती। अङ्गने बहूनि वस्तूनि आसन्। मातामही प्रायः अङ्गणे खट्वायाम् उपनेत्रं त्यजति स्म। उपनेत्रं खट्वायाम् अपि न लब्धम्।
अनुवाद: रमा ने चश्मा आँगन में खोजा। आँगन में बहुत सी वस्तुएँ थीं। नानी अक्सर आँगन में खाट पर चश्मा छोड़ देती थीं। चश्मा खाट पर भी नहीं मिला।
रमा मातामह्याः ऊर्ण-स्यूते उपनेत्रम् अन्विष्टवती। स्यूते ऊर्णायाः अनेकानि गोलकानि आसन्। तस्मिन् अर्ध-ऊतानि ऊर्ण-वस्त्राणि अपि आसन्। उपनेत्रं स्यूते अपि न आसीत्।
अनुवाद: रमा ने नानी के ऊन के थैले में चश्मा खोजा। थैले में ऊन के अनेक गोले थे। उसमें आधे बुने हुए ऊनी वस्त्र भी थे। चश्मा थैले में भी नहीं था।
रमा उपनेत्रं दर्पणस्य निकटे अन्विष्टवती। तत्र कङ्कतिकाः तैलकूप्यः च आसन्। मातामही प्रायः केशानां प्रसाधन-समये उपनेत्रम् अवतारयति स्म। उपनेत्रं दर्पणं निकषा अपि न आसीत्।
अनुवाद: रमा ने चश्मा शीशे (दर्पण) के पास खोजा। वहाँ कंघियां और तेल की बोतलें थीं। नानी अक्सर बाल बनाते समय चश्मा उतार देती थीं। चश्मा शीशे के पास भी नहीं था।
रमा उपनेत्रं कपाटिकायाम् अन्विष्टवती। कपाटिकायां मातामह्याः शाटिकाः आसन्। मातामही बहुवारम् उपनेत्रं कपाटिकायां त्यजति स्म। उपनेत्रं कपाटिकायाम् अपि न आसीत्।
अनुवाद: रमा ने चश्मा अलमारी में खोजा। अलमारी में नानी की साड़ियाँ थीं। नानी कई बार चश्मा अलमारी में छोड़ देती थीं। चश्मा अलमारी में भी नहीं था।
उपनेत्रम् अन्वेष्टुं रमा पर्यङ्कस्य अधः प्रविष्टा। पर्यङ्कस्य अधः मुनमुनः उपविष्टः आसीत्। मुनमुनस्य पादयोः मध्ये किमपि आसीत्। तत् सम्यक् न दृश्यते स्म।
अनुवाद: चश्मा खोजने के लिए रमा पलंग के नीचे घुसी। पलंग के नीचे मुनमुन (बिल्ली) बैठा था। मुनमुन के पैरों के बीच कुछ था। वह ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था।
रमा मुनमुनं बहिः अकरोत्। मुनमुनेन सह मातामह्याः उपनेत्रम् अपि आगतम्। रमा सत्वरम् उपनेत्रं गृहीतवती। सा उपनेत्रं गृहीत्वा मातामह्याः समीपम् अधावत्।
अनुवाद: रमा ने मुनमुन को बाहर किया। मुनमुन के साथ नानी का चश्मा भी आ गया। रमा ने तुरंत चश्मा ले लिया। वह चश्मा लेकर नानी के पास दौड़ी।
मातामही उपनेत्रं दृष्ट्वा अति-प्रसन्ना जाता। सा उपनेत्रं धारितवती। सा वार्तापत्रं पठितुम् उपविष्टवती। मातामही चिरं वार्तापत्रम् अपठत्। मातामही रमां भ्रमणाय आहूतवती।
अनुवाद: नानी चश्मा देखकर बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने चश्मा पहन लिया। वह अखबार पढ़ने बैठ गईं। नानी ने देर तक अखबार पढ़ा। नानी ने रमा को घूमने के लिए बुलाया।
रमा उपनेत्रं मुनमुनम् अधारयत्। मुनमुनः उपनेत्रं धृत्वा अति-शोभनः दृश्यते स्म। तदनन्तरं ताः तिस्रः भ्रमणाय निर्गताः।
अनुवाद: रमा ने चश्मा मुनमुन को पहना दिया। मुनमुन चश्मा पहनकर बहुत सुंदर दिख रहा था। उसके बाद वे तीनों घूमने के लिए निकल पड़े।

शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दः (Sanskrit) हिंदी अर्थ (Hindi) English Meaning
मातामहीनानीMaternal Grandmother
उपनेत्रम्चश्माSpectacles / Glasses
धारयतिपहनती हैWears
अभिरुचिःरुचिInterest
वार्तापत्रम्अखबारNewspaper
उत्थापयितुम्जगाने के लिएTo wake up
अन्वेष्टुम्खोजने के लिएTo search
गाढनिद्रायाम्गहरी नींद मेंIn deep sleep
उपधानानाम्तकियों केOf pillows
बहुवारम्कई बारMany times
उत्पीठिकायाम्मेज परOn the table
स्नानगृहेस्नानघर मेंIn the bathroom
अङ्गनेआँगन मेंIn the courtyard
खट्वायाम्खाट परOn the cot
ऊर्ण-स्यूतेऊन के थैले मेंIn the woollen bag
गोलकानिऊन के गोलेBalls of yarn
दर्पणस्यशीशे काOf the mirror
कपाटिकायाम्अलमारी मेंIn the cupboard
शाटिकाःसाड़ियाँSarees
पर्यङ्कस्यपलंग काOf the bed

अभ्यास कार्य (प्रश्न-उत्तर)

१. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर)

यथा- मातामही प्रतिदिनं किं पठति?
उत्तरम्: वार्तापत्रम्
क. कस्य अधः मुनमुनः उपविष्टाः आसीत्?
उत्तरम्: पर्यङ्कस्य
ख. प्रायशः कः समयः आसीत्?
उत्तरम्: सार्ध-पञ्चवादन-समयः (या सार्ध-पञ्चवादनम्)
ग. उपनेत्रं कस्य पादयोः मध्ये आसीत्?
उत्तरम्: मुनमुनस्य
घ. मातामही प्रतिदिनं कदा वार्तापत्रं पठति?
उत्तरम्: प्रातः
ङ. उपनेत्रं धृत्वा कः कः शोभनः दृश्यते स्म?
उत्तरम्: मुनमुनः

२. आम् / न (हाँ या ना) लिखत

क. उपनेत्रं विना मातामही कष्टम् अनुभवति स्म।
उत्तरम्: आम्
ख. रमा कपाटिकायाम् उपनेत्रं अन्विष्टवती।
उत्तरम्: आम्
ग. पर्यङ्कस्य अधः मुनमुनः उपविष्टः आसीत्।
उत्तरम्: आम्
घ. मुनमुनस्य पादयोः मध्ये उपनेत्रम् आसीत्।
उत्तरम्: आम्
ङ. रमा उपनेत्रं स्नानागारे अन्विष्टवती।
उत्तरम्: आम्
च. मातामही प्रतिदिनं प्रातः वार्तापत्रं न पठति।
उत्तरम्: न

३. मञ्जूषातः उचितं शब्दं चित्वा विलोमशब्दान् लिखत

(मञ्जूषा: दुःखिता, दूरम्, बहिः, उपरि, सत्वरम्)

शब्दः विलोमशब्दः
अधः (नीचे)उपरि (ऊपर)
अन्तः (अंदर)बहिः (बाहर)
समीपम् (पास)दूरम् (दूर)
मन्दम् (धीरे)सत्वरम् (जल्दी/तेजी से)
प्रसन्ना (खुश)दुःखिता (दुखी)

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