1 से 14 मुखी रुद्राक्ष: Benefits, Mantra और सही धारण विधि (Complete Guide)

Sooraj Krishna Shastri
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रुद्राक्ष: महत्व, लाभ और धारण विधि

भगवान शिव का आशीर्वाद और ग्रहों की शांति का महा उपाय

Introduction 

सनातन धर्म में Rudraksha का विशेष महत्व है। भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न रुद्राक्ष न केवल Health और Mental Peace देता है, बल्कि ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी दूर करता है। इस लेख में जानें 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे (1 to 14 Mukhi Rudraksha Benefits) और उनकी धारण विधि (Wearing Method)।

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1 से 14 मुखी रुद्राक्ष: Benefits, Mantra और सही धारण विधि (Complete Guide)


"रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करने से वह अपार गुणशाली होता है। यह भूतबाधा, प्रेतबाधा, ग्रहबाधा और मानसिक रोगों का निवारण करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सशक्त करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।"

रुद्राक्ष के प्रकार और लाभ

एक मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: सूर्य देवता: शिव

इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है और लक्ष्मी की कृपा होती है।

"एकवक्त्रः शिवः साक्षात् ब्रह्महत्या व्यपोहति।"

दो मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: चन्द्र देवता: अर्धनारीश्वर

यह शिव और शक्ति का प्रतीक है। फेफड़े, गुर्दे और आंखों के रोग से बचाता है। माता-पिता के लिए शुभ है।

"द्विवक्त्रो देव देवशो गौवधं ना नाशयेद्ध्रुवुम्।"

तीन मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: मंगल देवता: अग्नि

रक्त विकार, रक्तचाप, कमजोरी और मासिक धर्म में लाभप्रद। आज्ञा चक्र जागरण में विशेष महत्व।

"त्रिवक्त्रोऽग्नेर्विज्ञेयः स्त्री हत्या च व्यपोहति।"

चार मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: बुध देवता: ब्रह्मा

वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए विशेष। मानसिक रोग, बुखार और पक्षाघात में लाभकारी।

"चतुर्वक्त्रः स्वयं ब्रह्मा नरहत्या व्यपोहति।"

पांच मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: बृहस्पति देवता: कालाग्नि रुद्र

यह साक्षात शिव का प्रसाद है। मधुमेह, ब्लडप्रेशर, नाक, कान, गुर्दा की बीमारी में लाभकारी।

"पंचवक्त्रः स्वयं रुद्रः कालाग्निर्नाम नामतः।"

छ: मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: शुक्र देवता: कार्तिकेय

शरीर के विकारों को दूर करता है, उत्तम सोच देता है और राजदरबार में सम्मान दिलाता है।

"षड्वक्त्रः कार्तिकेयस्तु धारयेत् दक्षिणे भुजे।"

सात मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: शनि देवता: महालक्ष्मी

लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। हड्डी के रोग और मस्तिष्क संबंधी रोगों में लाभकारी।

"सप्तवक्त्रो महासेन अनन्तो नाम नामतः।"

आठ मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: राहू देवता: भैरव/गणेश

विजय प्राप्त होती है। त्वचा और नेत्र रोग से छुटकारा। प्रेत बाधा का भय समाप्त होता है।

"अष्टवक्त्रो महासेन साक्षात् देवो विनायकः।"

नौ मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: केतु देवता: नवदुर्गा

नवग्रहों के उत्पात से रक्षा और दरिद्रता नाशक। लगभग सभी रोगों से मुक्ति का मार्ग देता है।

"नव मुखी भैरवं नाम कापिलं मुक्तिदं स्मृतम्।"

दस मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: नवग्रह शांति देवता: विष्णु

पवित्र विचार बनते हैं। उदर और नेत्र रोग दूर होते हैं। अन्याय से रक्षा होती है।

"दशवक्त्रो महासेन साक्षाद् देवो जनार्दनः।"

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: - देवता: रुद्र (हनुमान)

धर्म और तीर्थयात्रा का मार्ग प्रशस्त होता है। अश्वमेघ यज्ञ समान पुण्य मिलता है।

"एकादशास्यो रुद्रो हि रूद्राश्चैकादशा: स्मृताः।"

बारह मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: सूर्य देवता: आदित्य

बारह ज्योतिर्लिंगों का प्रतीक। ज्ञानचक्षु खुलते हैं और ब्रेन (मस्तिष्क) के कष्ट दूर होते हैं।

"द्वादशास्यो हि रुद्राक्षो साक्षाद् देवः प्रभाकरः।"

तेरह मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: शुक्र देवता: इन्द्र/कामदेव

सांसारिक सुख और सौभाग्य देता है। दरिद्रता का विनाश और हड्डी/जोड़ दर्द में लाभकारी।

"त्रयोदशास्यं रुद्राक्षं... सर्वान्कामानावाप्नोति।"

चौदह मुखी रुद्राक्ष

ग्रह: शनि देवता: हनुमान/शिव

शनि के प्रकोप को दूर करता है। त्वचा और बालों के रोग में लाभकारी। शिव पद की प्राप्ति।

"चतुर्दशास्यो रुद्राक्षो साक्षाद् देवो हनुमतः।"

रुद्राक्ष धारण विधि एवं नियम

शुद्धिकरण प्रक्रिया

  • रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व 5 से 7 दिनों तक सरसों के तेल में भिगोकर रखें।
  • शुद्ध लाल धागे में माला तैयार करें।
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और गंगाजल मिश्रित पंचगव्य से स्नान कराएं।
  • पूजन के समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
  • चंदन, बिल्वपत्र, लाल पुष्प, धूप, दीप द्वारा पूजन करें।

अभिमंत्रण मंत्र

108 बार निम्न मंत्र का जाप कर अभिमंत्रित करें:

“ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात्”

माला में दानों की संख्या का महत्व

उद्देश्य दानों की संख्या
तनाव से मुक्ति 100 दाने
अच्छी सेहत एवं आरोग्य 140 दाने
अर्थ (धन) प्राप्ति 62 दाने
सभी कामनाओं की पूर्ति (जाप हेतु) 108 दाने
अभीष्ट प्राप्ति 50 दाने

शरीर पर धारण के नियम (शिव पुराण अनुसार)

मस्तक पर: 26 दाने | हृदय पर: 50 दाने | भुजा पर: 16 दाने | मणिबंध (कलाई) पर: 12 दाने

सावधानियां ⚠️

  • रुद्राक्ष धारण करने वाले को तामसिक पदार्थों (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का त्याग करना चाहिए।
  • जिस माला से जप करते हैं, उसे धारण न करें।
  • जो माला धारण की है, उससे जप न करें।
  • दूसरों द्वारा उपयोग में लाए गए रुद्राक्ष को न पहनें।
  • शुभ मुहूर्त: पूर्णिमा, ग्रहण, संक्रांति या अमावस्या।

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