Introduction
सनातन धर्म में Rudraksha का विशेष महत्व है। भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न रुद्राक्ष न केवल Health और Mental Peace देता है, बल्कि ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी दूर करता है। इस लेख में जानें 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे (1 to 14 Mukhi Rudraksha Benefits) और उनकी धारण विधि (Wearing Method)।
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| 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष: Benefits, Mantra और सही धारण विधि (Complete Guide) |
"रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करने से वह अपार गुणशाली होता है। यह भूतबाधा, प्रेतबाधा, ग्रहबाधा और मानसिक रोगों का निवारण करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सशक्त करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।"
रुद्राक्ष के प्रकार और लाभ
एक मुखी रुद्राक्ष
इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है और लक्ष्मी की कृपा होती है।
दो मुखी रुद्राक्ष
यह शिव और शक्ति का प्रतीक है। फेफड़े, गुर्दे और आंखों के रोग से बचाता है। माता-पिता के लिए शुभ है।
तीन मुखी रुद्राक्ष
रक्त विकार, रक्तचाप, कमजोरी और मासिक धर्म में लाभप्रद। आज्ञा चक्र जागरण में विशेष महत्व।
चार मुखी रुद्राक्ष
वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए विशेष। मानसिक रोग, बुखार और पक्षाघात में लाभकारी।
पांच मुखी रुद्राक्ष
यह साक्षात शिव का प्रसाद है। मधुमेह, ब्लडप्रेशर, नाक, कान, गुर्दा की बीमारी में लाभकारी।
छ: मुखी रुद्राक्ष
शरीर के विकारों को दूर करता है, उत्तम सोच देता है और राजदरबार में सम्मान दिलाता है।
सात मुखी रुद्राक्ष
लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। हड्डी के रोग और मस्तिष्क संबंधी रोगों में लाभकारी।
आठ मुखी रुद्राक्ष
विजय प्राप्त होती है। त्वचा और नेत्र रोग से छुटकारा। प्रेत बाधा का भय समाप्त होता है।
नौ मुखी रुद्राक्ष
नवग्रहों के उत्पात से रक्षा और दरिद्रता नाशक। लगभग सभी रोगों से मुक्ति का मार्ग देता है।
दस मुखी रुद्राक्ष
पवित्र विचार बनते हैं। उदर और नेत्र रोग दूर होते हैं। अन्याय से रक्षा होती है।
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
धर्म और तीर्थयात्रा का मार्ग प्रशस्त होता है। अश्वमेघ यज्ञ समान पुण्य मिलता है।
बारह मुखी रुद्राक्ष
बारह ज्योतिर्लिंगों का प्रतीक। ज्ञानचक्षु खुलते हैं और ब्रेन (मस्तिष्क) के कष्ट दूर होते हैं।
तेरह मुखी रुद्राक्ष
सांसारिक सुख और सौभाग्य देता है। दरिद्रता का विनाश और हड्डी/जोड़ दर्द में लाभकारी।
चौदह मुखी रुद्राक्ष
शनि के प्रकोप को दूर करता है। त्वचा और बालों के रोग में लाभकारी। शिव पद की प्राप्ति।
रुद्राक्ष धारण विधि एवं नियम
शुद्धिकरण प्रक्रिया
- रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व 5 से 7 दिनों तक सरसों के तेल में भिगोकर रखें।
- शुद्ध लाल धागे में माला तैयार करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और गंगाजल मिश्रित पंचगव्य से स्नान कराएं।
- पूजन के समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
- चंदन, बिल्वपत्र, लाल पुष्प, धूप, दीप द्वारा पूजन करें।
अभिमंत्रण मंत्र
108 बार निम्न मंत्र का जाप कर अभिमंत्रित करें:
माला में दानों की संख्या का महत्व
| उद्देश्य | दानों की संख्या |
|---|---|
| तनाव से मुक्ति | 100 दाने |
| अच्छी सेहत एवं आरोग्य | 140 दाने |
| अर्थ (धन) प्राप्ति | 62 दाने |
| सभी कामनाओं की पूर्ति (जाप हेतु) | 108 दाने |
| अभीष्ट प्राप्ति | 50 दाने |
शरीर पर धारण के नियम (शिव पुराण अनुसार)
मस्तक पर: 26 दाने | हृदय पर: 50 दाने | भुजा पर: 16 दाने | मणिबंध (कलाई) पर: 12 दाने
सावधानियां ⚠️
- रुद्राक्ष धारण करने वाले को तामसिक पदार्थों (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का त्याग करना चाहिए।
- जिस माला से जप करते हैं, उसे धारण न करें।
- जो माला धारण की है, उससे जप न करें।
- दूसरों द्वारा उपयोग में लाए गए रुद्राक्ष को न पहनें।
- शुभ मुहूर्त: पूर्णिमा, ग्रहण, संक्रांति या अमावस्या।

