12 Sankranti Daan aur Bhojan List: Kab kya Daan karein aur kya Khayein?

Sooraj Krishna Shastri
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हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में Sankranti का विशेष महत्व है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। वर्ष भर में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। प्रत्येक संक्रांति पर Surya Gochar (सूर्य के राशि परिवर्तन) के अनुसार विशेष वस्तुओं का Daan (Donation) और विशेष भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।

नीचे दिए गए Sankranti Chart में हमने विस्तार से बताया है कि मकर संक्रांति से लेकर धनु संक्रांति तक, आपको किस वस्तु का दान करना चाहिए और स्वास्थ्य व पुण्य लाभ के लिए क्या भोजन करना चाहिए।

12 संक्रांति: दान और भोजन चार्ट (Sankranti Donation & Food Chart)

क्रम संक्रांति सूर्य का गोचर दान करने योग्य वस्तुएँ क्या भोजन करें
1 मकर संक्रांति धनु → मकर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, घी तिल-गुड़, खिचड़ी
2 कुंभ संक्रांति मकर → कुंभ काले तिल, कंबल, जल पात्र तिल मिश्रित भोजन
3 मीन संक्रांति कुंभ → मीन अन्न, वस्त्र, नमक खीर, हल्का भोजन
4 मेष संक्रांति मीन → मेष गुड़, सत्तू, तांबा सत्तू, चना
5 वृष संक्रांति मेष → वृष दूध, दही, वस्त्र दही-भात, दुग्ध पदार्थ
6 मिथुन संक्रांति वृष → मिथुन जल घड़ा, पंखा, वस्त्र फल, छाछ
7 कर्क संक्रांति मिथुन → कर्क चावल, दूध, श्वेत वस्त्र चावल, दूध-खीर
8 सिंह संक्रांति कर्क → सिंह गेहूं, लाल वस्त्र, तांबा गेहूं के पदार्थ
9 कन्या संक्रांति सिंह → कन्या हरी सब्जी, मूंग दाल सब्जी, मूंग दाल
10 तुला संक्रांति कन्या → तुला घी, तिल, दीपक घी युक्त भोजन
11 वृश्चिक संक्रांति तुला → वृश्चिक तिल, तेल, वस्त्र तिल युक्त भोजन
12 धनु संक्रांति वृश्चिक → धनु पीली दाल, पीले वस्त्र, गुड़ पीली दाल

बारह संक्रांति: अवधी लोक वर्णन (12 Sankranti Avadhi Poem)

संक्रांति (Sankranti) वर्णन (Description)
मेष संक्रान्ति मेष मास सूरज जब आयो, धरती तपन बढ़ाय।
सत्तू-गुड़ खाय पीय जल, तन मन शीतल पाय॥
वृष संक्रान्ति वृष मास घाम बढ़ि जाला, आम पना सुख देय।
दही-चावल, सत्तू संग, तन की आग हरेय॥
मिथुन संक्रान्ति मिथुन मास बरखा निकट, दही भात रस खाय।
फल अरु शर्बत पीय के, रोग दूर भगाय॥
कर्क संक्रान्ति कर्क मास में हरियर छाँह, दूध-खीर सुख देय।
सादा भोजन, साग-सब्जी, मन पावन कर लेय॥
सिंह संक्रान्ति सिंह मास तेज बढ़ाय के, तिल-चावल शुभ जान।
दही सहित जो भोग धरें, पावें पुण्य महान॥
कन्या संक्रान्ति कन्या मास हरियर खेत, दाल-साग रस देय।
मूँग-उड़द भोजन करि, तन बल पुष्ट करेय॥
तुला संक्रान्ति तुला मास दिन-रात सम, गुड़-चावल खाय।
दूध-दही अरु तिल सहित, धर्म करम बढ़ाय॥
वृश्चिक संक्रान्ति वृश्चिक मास ठंडा लगे, घी-दूध भोग लगाय।
तिल-खिचड़ी भोजन करि, देह बलिष्ठ बनाय॥
धनु संक्रान्ति धनु मास में शीत बढ़े, खिचड़ी उत्तम मान।
गुड़-तिल संग खाय जो, मिटे रोग-अज्ञान॥
मकर संक्रान्ति मकर मास महापुन्य, तिल-गुड़ महिमा पाय।
लड्डू, गजक, खिचड़ी, खाय दान कर जाय॥
कुंभ संक्रान्ति कुंभ मास स्नान दान, खिचड़ी भोग बनाय।
तिल अरु गुड़ सेवन करि, जनम सफल कहाय॥
मीन संक्रान्ति मीन मास बरखा पूर्व, गुड़-भात शुभ मान।
ब्राह्मन भोजन करावैं, बढ़े कुल की शान॥
✨ सार (Essence) बारहों संक्रान्ति में, तिल-गुड़ प्रधान।
सात्त्विक भोजन करै जो, सो पावै कल्याण॥

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