5. विधिलिङ् लकार
पहचान: इसका प्रयोग 'चाहिए' अर्थ में, विधि (नियम) या संभावना बताने के लिए होता है। इसमें 'ए' की मात्रा मुख्य पहचान है।
उदाहरण: सः पठेत् (उसे पढ़ना चाहिए)।
उदाहरण: सः पठेत् (उसे पढ़ना चाहिए)।
⚠ सावधानी (हलन्त का अंतर):
1. प्रथम पुरुष एकवचन में 'त्' आधा होता है (पठेत्)।
2. मध्यम पुरुष बहुवचन में 'त' पूरा होता है (पठेत)।
1. प्रथम पुरुष एकवचन में 'त्' आधा होता है (पठेत्)।
2. मध्यम पुरुष बहुवचन में 'त' पूरा होता है (पठेत)।
क. परस्मैपद प्रत्यय (सूत्र)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | एत्(पठेत्) | एताम्(पठेताम्) | एयुः(पठेयुः) |
| मध्यम | एः(पठेः) | एतम्(पठेतम्) | एत(पठेत) |
| उत्तम | एयम्(पठेयम्) | एव(पठेव) | एम(पठेम) |
ख. आत्मनेपद प्रत्यय (सूत्र)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | एत(लभेत) | ईयाताम्(लभेयाताम्) | एरन्(लभेरन्) |
| मध्यम | एथाः(लभेथाः) | ईयाथाम्(लभेयाथाम्) | ईध्वम्(लभीध्वम्) |
| उत्तम | एय(लभेय) | ईवहि(लभीवहि) | ईमहि(लभीमहि) |
