कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)
परिचय: कर्मधारय समास तत्पुरुष समास का ही एक भेद है। इसमें दोनों पदों (पूर्वपद और उत्तरपद) में समान विभक्ति (प्रथमा) होती है।
इसमें मुख्य रूप से 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का सम्बन्ध होता है।
इसमें मुख्य रूप से 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का सम्बन्ध होता है।
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: तत्पुरुषः समानाधिकरणः कर्मधारयः (१.२.४२)
अर्थ: जब तत्पुरुष समास में दोनों पदों का अधिकरण (विभक्ति) समान हो, तो उसे 'कर्मधारय' कहते हैं।
सहायक सूत्र: विशेषणं विशेष्येण बहुलम् (२.१.५७) अर्थ: विशेषण का विशेष्य के साथ समास होता है।
सहायक सूत्र: विशेषणं विशेष्येण बहुलम् (२.१.५७) अर्थ: विशेषण का विशेष्य के साथ समास होता है।
2. नियम और पहचान (Rules)
1. विशेषण + विशेष्य (नीलकमलम्)
2. उपमान + उपमेय (घनश्यामः)
3. उपमेय + उपमान (नरसिंहः)
4. रूपक (विद्याधनम्)
2. उपमान + उपमेय (घनश्यामः)
3. उपमेय + उपमान (नरसिंहः)
4. रूपक (विद्याधनम्)
3. कर्मधारय समास के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | विग्रह (Split) | समस्त पद (Join) | प्रकार/अर्थ |
|---|---|---|---|
| (क) विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध | |||
| 1 | नीलम् च तत् कमलम् | नीलकमलम् | नीला कमल |
| 2 | महान् च असौ देवः | महादेवः | महान देवता |
| 3 | पीतम् च तत् अम्बरम् | पीताम्बरम् | पीला वस्त्र |
| 4 | कृष्णः च असौ सर्पः | कृष्णसर्पः | काला साँप |
| 5 | महान् च असौ राजा | महाराजा | महान राजा |
| 6 | सत् च असौ जनः | सज्जनः | अच्छा मनुष्य |
| 7 | सुन्दरः च असौ बालकः | सुन्दरबालकः | सुन्दर बालक |
| 8 | रक्तम् च तत् उत्पलम् | रक्तोत्पलम् | लाल कमल |
| 9 | महत् च तत् काव्यम् | महाकाव्यम् | महान काव्य |
| 10 | श्वेतम् च तत् वस्त्रम् | श्वेतवस्त्रम् | सफेद कपड़ा |
| (ख) उपमान-उपमेय और रूपक | |||
| 11 | घन इव श्यामः | घनश्यामः | बादल जैसा काला |
| 12 | चन्द्र इव मुखम् | चन्द्रमुखम् | चाँद जैसा मुख |
| 13 | नरः सिंहः इव | नरसिंहः | शेर जैसा मनुष्य |
| 14 | कमलम् इव नयनम् | कमलनयनम् | कमल जैसी आँखें |
| 15 | विद्या एव धनम् | विद्याधनम् | विद्या रूपी धन |
| 16 | शोकः एव अग्निः | शोकाग्निः | शोक रूपी आग |
| 17 | संसारः एव सागरः | संसारसागरः | संसार रूपी सागर |
| (ग) कु-गति और उभयपद | |||
| 18 | कुत्सितः पुत्रः | कुपुत्रः | बुरा बेटा |
| 19 | शोभनः पुरुषः | सुपुरुषः | अच्छा पुरुष |
| 20 | शीतम् च तत् उष्णम् च | शीतोष्णम् | ठंडा और गरम |
⚠️ भ्रम न पालें (Confusion):
'पीताम्बरम्' (वस्त्र) में कर्मधारय है, लेकिन 'पीताम्बरः' (विष्णु) में बहुव्रीहि समास है।
अंतर: कर्मधारय में पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है, जबकि बहुव्रीहि में दोनों मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं।
'पीताम्बरम्' (वस्त्र) में कर्मधारय है, लेकिन 'पीताम्बरः' (विष्णु) में बहुव्रीहि समास है।
अंतर: कर्मधारय में पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है, जबकि बहुव्रीहि में दोनों मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं।
