कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)

Sooraj Krishna Shastri
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कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)

परिचय: कर्मधारय समास तत्पुरुष समास का ही एक भेद है। इसमें दोनों पदों (पूर्वपद और उत्तरपद) में समान विभक्ति (प्रथमा) होती है।
इसमें मुख्य रूप से 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का सम्बन्ध होता है।

1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)

सूत्र: तत्पुरुषः समानाधिकरणः कर्मधारयः (१.२.४२) अर्थ: जब तत्पुरुष समास में दोनों पदों का अधिकरण (विभक्ति) समान हो, तो उसे 'कर्मधारय' कहते हैं।

सहायक सूत्र: विशेषणं विशेष्येण बहुलम् (२.१.५७) अर्थ: विशेषण का विशेष्य के साथ समास होता है।

2. नियम और पहचान (Rules)

1. विशेषण + विशेष्य (नीलकमलम्)
2. उपमान + उपमेय (घनश्यामः)
3. उपमेय + उपमान (नरसिंहः)
4. रूपक (विद्याधनम्)

3. कर्मधारय समास के 20 उदाहरण (20 Examples)

क्र. विग्रह (Split) समस्त पद (Join) प्रकार/अर्थ
(क) विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध
1नीलम् च तत् कमलम्नीलकमलम्नीला कमल
2महान् च असौ देवःमहादेवःमहान देवता
3पीतम् च तत् अम्बरम्पीताम्बरम्पीला वस्त्र
4कृष्णः च असौ सर्पःकृष्णसर्पःकाला साँप
5महान् च असौ राजामहाराजामहान राजा
6सत् च असौ जनःसज्जनःअच्छा मनुष्य
7सुन्दरः च असौ बालकःसुन्दरबालकःसुन्दर बालक
8रक्तम् च तत् उत्पलम्रक्तोत्पलम्लाल कमल
9महत् च तत् काव्यम्महाकाव्यम्महान काव्य
10श्वेतम् च तत् वस्त्रम्श्वेतवस्त्रम्सफेद कपड़ा
(ख) उपमान-उपमेय और रूपक
11घन इव श्यामःघनश्यामःबादल जैसा काला
12चन्द्र इव मुखम्चन्द्रमुखम्चाँद जैसा मुख
13नरः सिंहः इवनरसिंहःशेर जैसा मनुष्य
14कमलम् इव नयनम्कमलनयनम्कमल जैसी आँखें
15विद्या एव धनम्विद्याधनम्विद्या रूपी धन
16शोकः एव अग्निःशोकाग्निःशोक रूपी आग
17संसारः एव सागरःसंसारसागरःसंसार रूपी सागर
(ग) कु-गति और उभयपद
18कुत्सितः पुत्रःकुपुत्रःबुरा बेटा
19शोभनः पुरुषःसुपुरुषःअच्छा पुरुष
20शीतम् च तत् उष्णम् चशीतोष्णम्ठंडा और गरम
⚠️ भ्रम न पालें (Confusion):
'पीताम्बरम्' (वस्त्र) में कर्मधारय है, लेकिन 'पीताम्बरः' (विष्णु) में बहुव्रीहि समास है।
अंतर: कर्मधारय में पहला पद दूसरे की विशेषता बताता है, जबकि बहुव्रीहि में दोनों मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं।

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