मतुप् प्रत्यय (Matup Pratyaya)

Sooraj Krishna Shastri
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मतुप् प्रत्यय (Matup Pratyaya)

परिचय: यह एक 'तद्धित प्रत्यय' है जो संज्ञा (Noun) शब्दों में लगता है।
अर्थ: इसका प्रयोग 'वाला' (Possession) या 'युक्त' (Having) के अर्थ में होता है।
जैसे: धन + मतुप् = धनवान् (धन वाला)।

1. 'मान्' या 'वान्'? (The Golden Rule)

मतुप् प्रत्यय जुड़ने पर अंत में कभी 'मान्' (मत्) दिखता है तो कभी 'वान्' (वत्)। इसका नियम बहुत सरल है:

नियम चार्ट:

  • 'वान्' (वत्) कब लगेगा?
    यदि शब्द के अंत में 'अ' या 'आ' हो।
    (उदा: धन (अ) → धनवान्, विद्या (आ) → विद्यावान्)
  • 'मान्' (मत्) कब लगेगा?
    यदि शब्द के अंत में 'अ/आ' को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो (जैसे इ, ई, उ, ऊ, ऋ)।
    (उदा: बुद्धि (इ) → बुद्धिमान्, श्री (ई) → श्रीमान्)

2. उदाहरण तालिका (Examples)

मूल शब्द नियम पुल्लिंग (Male) स्त्रीलिंग (Female) अर्थ
धन अ-अंत (वान्) धनवान् धनवती पैसे वाला
बुद्धि इ-अंत (मान्) बुद्धिमान् बुद्धिमती बुद्धि वाला
बल अ-अंत (वान्) बलवान् बलवती ताकतवर
श्री (लक्ष्मी) ई-अंत (मान्) श्रीमान् श्रीमती श्री युक्त / आदरणीय
गुण अ-अंत (वान्) गुणवान् गुणवती गुणों वाला
शक्ति इ-अंत (मान्) शक्तिमान् शक्तिमती शक्तिशाली
आयुष् विशेष* आयुष्मान् आयुष्मती दीर्घायु वाला

3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

1. सः बालकः बुद्धिमान् अस्ति।
(वह बालक बुद्धिमान है।)

2. सा कन्या गुणवती अस्ति।
(वह कन्या गुणवान (गुणी) है।)
(स्त्रीलिंग होने के कारण 'वती' लगा)

3. ईश्वरः शक्तिमान् अस्ति।
(ईश्वर शक्तिशाली है।)

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