बिना 'वजह' तो मूर्ख भी काम नहीं करता | Prayojanam Anuddishya Shloka

Sooraj Krishna Shastri
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बिना 'वजह' तो मूर्ख भी काम नहीं करता | Prayojanam Anuddishya Shloka

उद्देश्य ही कार्य की जननी है

प्रयोजनं सम्प्रवृत्तेः
कारणं फललक्षणम्।
प्रयोजनमनुद्दिश्य
न मन्दोऽपि प्रवर्तते॥
Prayojanaṁ sampravṛtteḥ
kāraṇaṁ phalalakṣaṇam |
Prayojanamanuddiśya
na mando'pi pravartate ||
हिन्दी अनुवाद:
"फल की प्राप्ति (लाभ) रूपी 'प्रयोजन' (उद्देश्य) ही किसी भी कार्य में प्रवृत्त होने (लगने) का मुख्य कारण है। बिना किसी उद्देश्य या प्रयोजन को सामने रखे तो मन्दबुद्धि (मूर्ख) व्यक्ति भी किसी कार्य में नहीं लगता।"

📖 शब्दार्थ (Word Analysis)

शब्द (Sanskrit) अर्थ (Hindi) English Meaning
प्रयोजनं उद्देश्य/लक्ष्य/वजह Purpose/Motive
सम्प्रवृत्तेः कारणं कार्य आरम्भ करने का कारण Cause of engagement
फललक्षणम् फल/परिणाम स्वरूप Characterized by result
अनुद्दिश्य बिना लक्ष्य बनाए Without targeting
न मन्दः अपि मूर्ख/आलसी भी नहीं Even a fool does not
प्रवर्तते कार्य में लगता है Engage/Act

(↔ तालिका को खिसका कर देखें)

🧠 दर्शन और मनोविज्ञान

1. मानव मनोविज्ञान (Human Psychology):
यह श्लोक 'Motivation' की जड़ को छूता है। इंसान स्वभाव से आलसी नहीं होता, वह 'उद्देश्यहीन' (Directionless) होता है। जैसे ही उसे एक बड़ा कारण (Big Why) मिल जाता है, उसकी ऊर्जा जाग जाती है।
2. मन्दोऽपि (Mandah + Api):
कवि ने यहाँ अतिशयोक्ति का प्रयोग किया है। बुद्धिमान तो दूर की बात, एक मूर्ख व्यक्ति भी अगर हाथ हिलाता है, तो उसके पीछे कोई न कोई कारण (मच्छर भगाना या खुजली मिटाना) अवश्य होता है। निरर्थक क्रिया संभव नहीं है।

🏙️ आधुनिक सन्दर्भ

आज के कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत जीवन में यह श्लोक 'Goal Setting' का आधार है:

  • Start With Why: आधुनिक लेखक साइमन सिनेक कहते हैं, "Start With Why"। यह श्लोक हजारों साल पहले यही कह चुका है। अगर आपका 'क्यों' (प्रयोजन) साफ़ नहीं है, तो आप सफलता के लिए काम नहीं करेंगे।
  • Procrastination (टालमटोल): हम काम टालते हैं क्योंकि हमें उस काम में अपना 'लाभ' या 'प्रयोजन' स्पष्ट नहीं दिखता।

🐢 संवादात्मक नीति कथा

🗿 तीन पत्थर तोड़ने वाले

एक राहगीर ने तीन मजदूरों को पत्थर तोड़ते हुए देखा। तीनों एक ही काम कर रहे थे, लेकिन उनके भाव अलग थे।

राहगीर ने पहले से पूछा: "क्या कर रहे हो?"
मजदूर (गुस्से में): "दिखता नहीं? पत्थर तोड़ रहा हूँ। किस्मत फूटी है मेरी।" (इसके पास प्रयोजन केवल पेट भरना था, इसलिए दुखी था)।

दूसरे से पूछा: "क्या कर रहे हो?"
मजदूर (शांत भाव से): "मैं अपनी रोजी-रोटी कमा रहा हूँ ताकि बच्चों को पढ़ा सकूँ।" (इसका प्रयोजन कर्तव्य था)।

तीसरे से पूछा: "क्या कर रहे हो?"
मजदूर (चमकती आँखों से): "मैं भगवान का एक भव्य मंदिर बना रहा हूँ!"

निष्कर्ष: काम तीनों का एक ही था, लेकिन तीसरे का 'प्रयोजन' (Purpose) महान था, इसलिए वह सबसे अधिक उत्साह (प्रवृत्ति) से काम कर रहा था।

🎯 निष्कर्ष (Conclusion)

गति (Speed) मायने नहीं रखती, दिशा (Direction/Purpose) मायने रखती है।
कोई भी काम शुरू करने से पहले खुद से पूछें—"मैं यह क्यों कर रहा हूँ?"
जब 'क्यों' मिल जाएगा, तो 'कैसे' अपने आप आसान हो जाएगा।

© BhagwatDarshan.com | ॥ इति शुभम् ॥

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