Sanskrit Avyaya (अव्यय): Definition, Rules & 100+ Examples | सम्पूर्ण परिचय

Sooraj Krishna Shastri
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संस्कृत अव्यय परिचय: सूत्र, अर्थ और प्रयोग

लेख सारांश: संस्कृत व्याकरण में 'अव्यय' (Indeclinables) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विस्तृत लेख में हम पाणिनीय सूत्रों के माध्यम से अव्यय की परिभाषा, उसके भेद (उपसर्ग, निपात, चादिगण), और दैनिक व साहित्यिक प्रयोग के सैकड़ों उदाहरणों को समझेंगे। यह सामग्री विशेष रूप से छात्रों और संस्कृत प्रेमियों के लिए BhagwatDarshan.com द्वारा संकलित की गई है।


१. अव्यय किसे कहते हैं? (परिभाषा)

संस्कृत भाषा में शब्द मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—विकारी (जिनमें परिवर्तन होता है) और अविकारी (जिनमें परिवर्तन नहीं होता)। 'अव्यय' अविकारी शब्द हैं।

शाब्दिक अर्थ में— "न व्ययः इति अव्ययः"। अर्थात् जिसका व्यय (खर्च या परिवर्तन) न हो, वह अव्यय है।

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु ।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥

अर्थ: जो शब्द तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग), सभी विभक्तियों (प्रथमा से सप्तमी) और तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में एक समान रहता है—अर्थात् जिसके रूप में कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता—उसे अव्यय कहते हैं।

२. पाणिनीय व्याकरण के अनुसार अव्यय (प्रमुख सूत्र)

महर्षि पाणिनि ने अष्टाध्यायी में अव्यय संज्ञा करने के लिए विशेष सूत्र दिए हैं। व्याकरण की दृष्टि से अव्यय प्रकरण को समझना अत्यंत आवश्यक है।

(क) स्वरादिनिपातमव्ययम् (१.१.३७)

सूत्र: स्वरादिनिपातमव्ययम्

व्याख्या: 'स्वर' आदि गण (समूह) में पठित शब्द तथा 'निपात' संज्ञक शब्दों की अव्यय संज्ञा होती है।
उदाहरण: स्वः (स्वर्ग/कल), अन्तः, प्रातः, पुनर्, उच्चैः, नीचैः, शनैः आदि।

(ख) तद्धितश्चासर्वविभक्तिः (१.१.३८)

सूत्र: तद्धितश्चासर्वविभक्तिः

व्याख्या: ऐसे तद्धित प्रत्ययान्त शब्द जिनसे सभी विभक्तियाँ नहीं आतीं (अर्थात् जिनके रूप नहीं चलते), वे भी अव्यय कहलाते हैं।
उदाहरण: ततः (वहाँ से), यतः (जहाँ से), कुतः (कहाँ से/क्यों), तत्र, यत्र, कुत्र।

(ग) कृन्मेजन्तः (१.१.३९)

सूत्र: कृन्मेजन्तः

व्याख्या: जिन कृदन्त (Krit suffixes) शब्दों के अंत में 'म्', 'ए' या 'ऐ' हो, वे अव्यय होते हैं।

  • तुम् (तुमुन्): पठितुम्, गन्तुम्, कर्तुम्।
  • त्वा (क्त्वा): गत्वा, पीत्वा, लिखित्वा। (यद्यपि यह 'त्वा' है, पर क्त्वा-ल्यप् के लिए अलग वार्तिक है, फिर भी ये अव्यय माने जाते हैं)।
  • ल्यप्: आगत्य, विहस्य, सम्पूज्य।

(घ) अव्ययीभावश्च (१.१.४१)

सूत्र: अव्ययीभावश्च

व्याख्या: अव्ययीभाव समास से बने शब्द भी अव्यय माने जाते हैं।
उदाहरण: यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), प्रतिदिनम् (दिन-दिन), उपगंगम् (गंगा के समीप)।

३. अव्यय के प्रमुख भेद और वर्गीकरण

अव्ययों को उनके प्रयोग और अर्थ के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

भेद विवरण प्रमुख उदाहरण
१. उपसर्ग (Prefixes) जो धातुओं के पूर्व लगकर अर्थ बदलते हैं। इनकी संख्या २२ है। प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आङ्, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप।
२. क्रिया-विशेषण (Adverbs) जो क्रिया की विशेषता (समय, स्थान, रीति) बताते हैं। अत्र, तत्र, इदानीम्, सर्वदा, उच्चैः, शनैः।
३. चादि गण (Conjunctions) जो वाक्यों या शब्दों को जोड़ते हैं। च (और), वा (या), तु (तो), हि (निश्चय ही)।
४. विस्मयादिबोधक (Interjections) हर्ष, शोक, आश्चर्य प्रकट करने वाले शब्द। अहो, बत, हा, धिक्।

४. प्रमुख अव्यय, अर्थ और वाक्य प्रयोग (विस्तृत सूची)

छात्रों की सुविधा के लिए यहाँ १००+ महत्वपूर्ण अव्ययों की सूची उनके हिंदी अर्थ और संस्कृत वाक्य प्रयोग के साथ दी जा रही है।

(क) कालवाचक अव्यय (Time Related)

अव्यय हिन्दी अर्थ वाक्य प्रयोग
अद्य आज अद्य सोमवारः अस्ति। (आज सोमवार है।)
ह्यः बीता हुआ कल सः ह्यः विद्यालयं न अगच्छत्। (वह कल विद्यालय नहीं गया।)
श्वः आने वाला कल अहं श्वः वाराणसीं गमिष्यामि। (मैं कल वाराणसी जाऊँगा।)
परश्वः परसों (आने वाला) सः परश्वः आगमिष्यति।
इदानीम् / अधुना अब / इस समय इदानीं त्वं किं करोषि? (इस समय तुम क्या कर रहे हो?)
यदा... तदा जब... तब यदा मेघः गर्जति, तदा मयूरः नृत्यति।
कदा कब भवान् कदा उत्तिष्ठति? (आप कब उठते हैं?)
चिरम् देर तक / लम्बे समय तक सः चिरम् अपठत्। (उसने देर तक पढ़ाई की।)

(ख) स्थानवाचक अव्यय (Place Related)

अव्यय हिन्दी अर्थ वाक्य प्रयोग
अत्र यहाँ अत्र आगच्छ। (यहाँ आओ।)
तत्र वहाँ तत्र एकः विशालः वृक्षः अस्ति।
कुत्र कहाँ त्वं कुत्र वससि? (तुम कहाँ रहते हो?)
यत्र... तत्र जहाँ... वहाँ यत्र धूमः, तत्र वह्निः। (जहाँ धुआँ है, वहाँ आग है।)
सर्वत्र सब जगह ईश्वरः सर्वत्र अस्ति।
अन्यत्र दूसरी जगह सः अन्यत्र गतः।
उपरि ऊपर (षष्ठी विभक्ति के साथ) वृक्षस्य उपरि खगाः तिष्ठन्ति। (पेड़ के ऊपर पक्षी बैठे हैं।)
अधः नीचे भूमौ अधः जलम् अस्ति।
बहिः बाहर (पंचमी के साथ) ग्रामात् बहिः सरोवरः अस्ति।

(ग) रीतिवाचक और प्रश्नवाचक अव्यय (Manner & Question)

अव्यय हिन्दी अर्थ वाक्य प्रयोग
शनैः धीरे गजः शनैः शनैः चलति। (हाथी धीरे-धीरे चलता है।)
उच्चैः जोर से / ऊँचा सिंहः उच्चैः गर्जति।
सहसा अचानक सहसा विदधीत न क्रियाम्। (अचानक कोई कार्य नहीं करना चाहिए।)
वृथा बेकार / व्यर्थ विवादं वृथा मा कुरु। (बेकार में झगड़ा मत करो।)
कुतः कहाँ से / क्यों कुतः आगच्छसि? (कहाँ से आ रहे हो?)
कथम् कैसे त्वं कथम् अस्ति? (तुम कैसे हो?)
अलम् बस करो / पर्याप्त अलम् विवादेन। (विवाद मत करो / बस करो।)

(घ) समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunctions)

अव्यय हिन्दी अर्थ वाक्य प्रयोग
और रामः लक्ष्मणः च वनं गच्छतः। (राम और लक्ष्मण वन जाते हैं।)
अपि भी अहम् अपि पठामि। (मैं भी पढ़ता हूँ।)
किन्तु / परन्तु लेकिन सः धनवान् अस्ति, किन्तु कृपणः अस्ति।
यदि... तर्हि अगर... तो यदि त्वं पठिष्यसि, तर्हि उत्तीर्णः भविष्यसि।
यतः क्योंकि सः न आगच्छत् यतः सः रुग्णः आसीत्।

५. साहित्यिक प्रयोग एवं विशेष नियम

संस्कृत साहित्य (जैसे भगवत गीता, पुराण) में अव्ययों का प्रयोग श्लोकों के पाद पूर्ति और भाव को स्पष्ट करने के लिए बहुतायत से होता है।

निपात (Particles for Emphasis)

कुछ अव्यय केवल वाक्य में बल देने के लिए या पाद पूर्ति के लिए आते हैं:

  • हि: (निश्चय ही) - त्वं हि प्राणः। (तुम ही प्राण हो।)
  • खलु: (निश्चय) - अयं खलु महापुरुषः। (यह निश्चित ही महापुरुष है।)
  • इव: (समान/तरह) - वागर्थाविव सम्पृक्तौ। (वाणी और अर्थ की तरह जुड़े हुए।)

उपसर्ग (Prefixes) - एक विशेष दृष्टि

ध्यान दें, जब 'प्र', 'परा' आदि शब्द क्रिया (Verb) के साथ जुड़ते हैं तो उपसर्ग कहलाते हैं (जैसे 'प्रहार'), लेकिन जब स्वतंत्र रूप से प्रयोग होते हैं, तो अव्यय कहलाते हैं।

उपसर्गेण धात्वर्थो बलादन्यत्र नीयते ।
प्रहाराहार-संहार-विहार-परिहारवत् ॥

६. निष्कर्ष (Conclusion)

अव्यय संस्कृत भाषा की रीढ़ हैं। संज्ञा और क्रिया के रूप बदलते रहते हैं, जिससे नए छात्रों को कठिनाई हो सकती है, परन्तु अव्यय हमेशा स्थिर रहते हैं। अव्ययों के सही ज्ञान से संस्कृत संभाषण और लेखन अत्यंत सरल हो जाता है।

NCERT की पुस्तकों (शेमुषी, मणिका) और प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC NET, KVS) में 'अव्यय पद चयन' और 'रिक्त स्थान पूर्ति' के प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। आशा है कि BhagwatDarshan.com का यह प्रयास आपके संस्कृत अध्ययन में सहायक सिद्ध होगा।

अगला लेख: संस्कृत में कारक और विभक्ति का विस्तृत परिचय (Coming Soon)
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