सत्व सन्धि (Satva Sandhi)

Sooraj Krishna Shastri
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सत्व सन्धि (Satva Sandhi)

सत्व सन्धि का अर्थ है विसर्ग का 'स्', 'श्' या 'ष्' बन जाना। यह परिवर्तन इस बात पर निर्भर करता है कि विसर्ग के बाद कौन सा अक्षर आ रहा है।

1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)

सूत्र: विसर्जनीयस्य सः (८.३.३४) अर्थ: यदि विसर्ग (ः) के बाद 'खर्' प्रत्याहार (वर्ग का 1, 2 वर्ण या श, ष, स) आए, तो विसर्ग के स्थान पर 'स्' हो जाता है।
(नोट: बाद में 'स्' का रूप अगले अक्षर के उच्चारण स्थान के अनुसार 'श्' या 'ष्' में बदल जाता है।)

2. नियम और पहचान (Rules)

1. शत्व (श्): यदि बाद में 'च' या 'छ' हो ➡ विसर्ग = श्
2. षत्व (ष्): यदि बाद में 'ट' या 'ठ' हो ➡ विसर्ग = ष्
3. सत्व (स्): यदि बाद में 'त' या 'थ' हो ➡ विसर्ग = स्
ः + (च / छ)   ➡   श् (ś)
ः + (ट / ठ)    ➡   ष् (ṣ)
ः + (त / थ)    ➡   स् (s)

3. सत्व सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)

क्र. सन्धि विच्छेद (Split) सन्धि पद (Join) नियम (Rule)
(क) 'श्' आदेश (च/छ परे होने पर)
1रामः + चरामश्च: + च = श्च
2कः + चित्कश्चित्: + च = श्च
3निः + छलःनिश्छलः: + छ = श्छ
4हरिः + चन्द्रःहरिश्चन्द्रः: + च = श्च
5पुनः + चपुनश्च: + च = श्च
6बालः + चलतिबालश्चलति: + च = श्च
7भक्तः + छत्रम्भक्तश्छत्रम्: + छ = श्छ
(ख) 'ष्' आदेश (ट/ठ परे होने पर)
8धनुः + टङ्कारःधनुष्टङ्कारः: + ट = ष्ट
9रामः + टीकतेरामष्टीकते: + ट = ष्ट
10निः + ठुरःनिष्ठुरः: + ठ = ष्ठ
11चतुः + टीकाचतुष्टीका: + ट = ष्ट
12बालः + टीकतेबालष्टीकते: + ट = ष्ट
(ग) 'स्' आदेश (त/थ परे होने पर)
13नमः + तेनमस्ते: + त = स्त
14इतः + ततःइतस्ततः: + त = स्त
15मनः + तापःमनस्तापः: + त = स्त
16दुः + तरम्दुस्तरम्: + त = स्त
17बालः + तरतिबालस्तरति: + त = स्त
18शिरः + त्राणम्शिरस्त्राणम्: + त = स्त
19विष्णुः + त्राताविष्णुस्त्राता: + त = स्त
20निः + तेजःनिस्तेजः: + त = स्त
⚠️ विशेष (Exception):
यदि विसर्ग के बाद 'क', 'ख', 'प', 'फ' आएं, तो विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता (जैसे: प्रातःकालः)।
लेकिन, नमः और पुरः शब्दों के साथ 'क' आने पर 'स्' हो जाता है (जैसे: नमस्कारः, पुरस्कारः)।

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