रत्व सन्धि (Ratva Sandhi)
रत्व सन्धि विसर्ग सन्धि का वह प्रकार है जहाँ विसर्ग (ः) 'र्' (रेफ) में परिवर्तित हो जाता है। यह तब होता है जब विसर्ग से पहले 'अ/आ' न होकर कोई अन्य स्वर हो।
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: इचोऽशि विसर्जनीयस्य रेफः (वार्तिक/नियम)
अर्थ: यदि विसर्ग से पहले 'अ' या 'आ' को छोड़कर कोई अन्य स्वर (इ, उ, ऋ आदि) हो, और बाद में कोई स्वर या मृदु व्यंजन (हश्) आए, तो विसर्ग के स्थान पर 'र्' हो जाता है।
(मूल सूत्र: ससजुषो रुः - जो सकार को रु (र्) करता है।)
(मूल सूत्र: ससजुषो रुः - जो सकार को रु (र्) करता है।)
2. परिभाषा (Definition)
पूर्व स्थिति: विसर्ग से पहले (अ/आ नहीं होना चाहिए)।
बाद की स्थिति: कोई भी स्वर, या वर्ग का 3, 4, 5 वां वर्ण, या य, र, ल, व, ह।
परिणाम: विसर्ग ➡ र् (यदि बाद में स्वर है तो 'र्' उसमें मिल जाएगा, यदि व्यंजन है तो 'र्' ऊपर (रेफ) चला जाएगा)।
बाद की स्थिति: कोई भी स्वर, या वर्ग का 3, 4, 5 वां वर्ण, या य, र, ल, व, ह।
परिणाम: विसर्ग ➡ र् (यदि बाद में स्वर है तो 'र्' उसमें मिल जाएगा, यदि व्यंजन है तो 'र्' ऊपर (रेफ) चला जाएगा)।
(अ/आ भिन्न स्वर) + ः + (स्वर/मृदु व्यंजन) ➡ र् (r)
(उदा: निः + धनः = निर्धनः)
(उदा: निः + धनः = निर्धनः)
3. रत्व सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| (क) बाद में स्वर होने पर (र् मिल जाता है) | |||
| 1 | मुनिः + अयम् | मुनिरयम् | इ + : + अ = इर |
| 2 | हरिः + आगच्छति | हरिरागच्छति | इ + : + आ = इरा |
| 3 | कविः + उवाच | क विरुवाच | इ + : + उ = इरु |
| 4 | भानुः + उदेति | भानुरुदेति | उ + : + उ = उरु |
| 5 | गुरुः + आज्ञा | गुर्वाज्ञा | उ + : + आ = उरा (यहाँ यण् भी प्रभावी हो सकता है, पर रत्व मुख्य है - गुर्वाज्ञा/गुरुराज्ञा) *शुद्ध: गुरुराज्ञा |
| 6 | पितुः + इच्छा | पितुरिच्छा | उ + : + इ = उरि |
| 7 | नदीः + इह | नदीरिह | ई + : + इ = ईरि |
| 8 | वधूः + एषा | वधूरैषा | ऊ + : + ए = ऊरे |
| (ख) बाद में व्यंजन होने पर (रेफ - ऊपर र्) | |||
| 9 | निः + धनः | निर्धनः | इ + : + ध = र्ध |
| 10 | दुः + जनः | दुर्जनः | उ + : + ज = र्ज |
| 11 | निः + बलः | निर्बलः | इ + : + ब = र्ब |
| 12 | दुः + बलम् | दुर्बलम् | उ + : + ब = र्ब |
| 13 | बहिः + गमनम् | बहिर्गमनम् | इ + : + ग = र्ग |
| 14 | आशीः + वादः | आशीर्वादः | ई + : + व = र्व |
| 15 | आयुः + वेदः | आयुर्वेदः | उ + : + व = र्व |
| 16 | ज्योतिः + मयः | ज्योतिर्मयः | इ + : + म = र्म |
| 17 | धनुः + धरः | धनुर्धरः | उ + : + ध = र्ध |
| 18 | यजुः + वेदः | यजुर्वेदः | उ + : + व = र्व |
| 19 | चतुः + भुजः | चतुर्भुजः | उ + : + भ = र्भ |
| 20 | गुरुः + ब्रह्मा | गुरुर्ब्रह्मा | उ + : + ब = र्ब |
⚠️ अपवाद (Exception - रो रि):
यदि विसर्ग के र् बनने के बाद, तुरंत 'र्' (रकार) आ जाए, तो पहले वाले 'र्' का लोप हो जाता है और उससे पहले वाला स्वर दीर्घ हो जाता है।
उदाहरण: निः + रोगः = (निर् + रोगः) = नीरोगः।
यदि विसर्ग के र् बनने के बाद, तुरंत 'र्' (रकार) आ जाए, तो पहले वाले 'र्' का लोप हो जाता है और उससे पहले वाला स्वर दीर्घ हो जाता है।
उदाहरण: निः + रोगः = (निर् + रोगः) = नीरोगः।
