रत्व सन्धि (Ratva Sandhi)

Sooraj Krishna Shastri
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रत्व सन्धि (Ratva Sandhi)

रत्व सन्धि विसर्ग सन्धि का वह प्रकार है जहाँ विसर्ग (ः) 'र्' (रेफ) में परिवर्तित हो जाता है। यह तब होता है जब विसर्ग से पहले 'अ/आ' न होकर कोई अन्य स्वर हो।

1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)

सूत्र: इचोऽशि विसर्जनीयस्य रेफः (वार्तिक/नियम) अर्थ: यदि विसर्ग से पहले 'अ' या 'आ' को छोड़कर कोई अन्य स्वर (इ, उ, ऋ आदि) हो, और बाद में कोई स्वर या मृदु व्यंजन (हश्) आए, तो विसर्ग के स्थान पर 'र्' हो जाता है।
(मूल सूत्र: ससजुषो रुः - जो सकार को रु (र्) करता है।)

2. परिभाषा (Definition)

पूर्व स्थिति: विसर्ग से पहले (अ/आ नहीं होना चाहिए)।
बाद की स्थिति: कोई भी स्वर, या वर्ग का 3, 4, 5 वां वर्ण, या य, र, ल, व, ह।
परिणाम: विसर्ग ➡ र् (यदि बाद में स्वर है तो 'र्' उसमें मिल जाएगा, यदि व्यंजन है तो 'र्' ऊपर (रेफ) चला जाएगा)।
(अ/आ भिन्न स्वर) + ः + (स्वर/मृदु व्यंजन)   ➡   र् (r)
(उदा: निः + धनः = निर्धनः)

3. रत्व सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)

क्र. सन्धि विच्छेद (Split) सन्धि पद (Join) नियम (Rule)
(क) बाद में स्वर होने पर (र् मिल जाता है)
1मुनिः + अयम्मुनिरयम्इ + : + अ = इर
2हरिः + आगच्छतिहरिरागच्छतिइ + : + आ = इरा
3कविः + उवाचक विरुवाचइ + : + उ = इरु
4भानुः + उदेतिभानुरुदेतिउ + : + उ = उरु
5गुरुः + आज्ञागुर्वाज्ञाउ + : + आ = उरा (यहाँ यण् भी प्रभावी हो सकता है, पर रत्व मुख्य है - गुर्वाज्ञा/गुरुराज्ञा) *शुद्ध: गुरुराज्ञा
6पितुः + इच्छापितुरिच्छाउ + : + इ = उरि
7नदीः + इहनदीरिहई + : + इ = ईरि
8वधूः + एषावधूरैषाऊ + : + ए = ऊरे
(ख) बाद में व्यंजन होने पर (रेफ - ऊपर र्)
9निः + धनःनिर्धनःइ + : + ध = र्ध
10दुः + जनःदुर्जनःउ + : + ज = र्ज
11निः + बलःनिर्बलःइ + : + ब = र्ब
12दुः + बलम्दुर्बलम्उ + : + ब = र्ब
13बहिः + गमनम्बहिर्गमनम्इ + : + ग = र्ग
14आशीः + वादःआशीर्वादःई + : + व = र्व
15आयुः + वेदःआयुर्वेदःउ + : + व = र्व
16ज्योतिः + मयःज्योतिर्मयःइ + : + म = र्म
17धनुः + धरःधनुर्धरःउ + : + ध = र्ध
18यजुः + वेदःयजुर्वेदःउ + : + व = र्व
19चतुः + भुजःचतुर्भुजःउ + : + भ = र्भ
20गुरुः + ब्रह्मागुरुर्ब्रह्माउ + : + ब = र्ब
⚠️ अपवाद (Exception - रो रि):
यदि विसर्ग के र् बनने के बाद, तुरंत 'र्' (रकार) आ जाए, तो पहले वाले 'र्' का लोप हो जाता है और उससे पहले वाला स्वर दीर्घ हो जाता है।
उदाहरण: निः + रोगः = (निर् + रोगः) = नीरोगः

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