शुकनासोपदेश: संस्कृत साहित्य का अनमोल रत्न
महाकवि बाणभट्ट द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध गद्यकाव्य 'कादम्बरी' का सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय अंश 'शुकनासोपदेश' (Shuknasopadesh) है। यह प्रसंग उस समय का है जब राजा तारापीड के महामंत्री शुकनास, राजकुमार चन्द्रापीड को उनके राज्याभिषेक (Yuvraj Abhishek) से पूर्व उपदेश देते हैं।
संस्कृत साहित्य में इसे व्यावहारिक ज्ञान का खजाना माना जाता है। शुकनास अपने उपदेश में युवावस्था के दोष, बिना परिश्रम के मिली धन-संपत्ति (लक्ष्मी) के अवगुण और सत्ता के नशे में राजाओं की बुद्धि भ्रष्ट होने का सजीव चित्रण करते हैं।
- UPSC & PCS Aspirants: संस्कृत साहित्य (Sanskrit Optional) के लिए अनिवार्य पाठ।
- B.A. & M.A. Students: संस्कृत पाठ्यक्रम (Syllabus) के विस्तृत अध्ययन हेतु।
- TGT/PGT & NET/JRF: प्रतियोगी परीक्षाओं में सूक्तियों और व्याकरण के लिए।
नीचे दी गई ई-बुक (E-Book Viewer) में आप शुकनासोपदेश का सम्पूर्ण संस्कृत मूल पाठ, उसका सटीक हिंदी अनुवाद और व्याकरणिक टिप्पणी (Sanskrit Notes) पढ़ सकते हैं। साथ ही, महत्वपूर्ण सामासिक पदों का विग्रह भी उपलब्ध कराया गया है।
