तव्य प्रत्यय (Tavya Pratyaya)
परिचय: पाणिनीय सूत्र "तव्यत्तव्यानीयरः" (3.1.96) के अनुसार 'तव्यत्' के अलावा 'तव्य' भी एक स्वतंत्र प्रत्यय है।
अर्थ: इसका प्रयोग भी 'चाहिए' या 'योग्य' अर्थ में होता है।
अर्थ: इसका प्रयोग भी 'चाहिए' या 'योग्य' अर्थ में होता है।
💡 क्या अंतर है 'तव्यत्' और 'तव्य' में?
लौकिक संस्कृत (लिखने-पढ़ने) में दोनों का रूप एक समान बनता है (जैसे: कर्तव्य)।
अंतर केवल वैदिक स्वरों (Accent) का है:
1. तव्यत्: इसमें 'त्' (Tit) होने से स्वरित स्वर होता है।
2. तव्य: इसमें 'त्' नहीं है, अतः इसका स्वर भिन्न होता है।
लौकिक संस्कृत (लिखने-पढ़ने) में दोनों का रूप एक समान बनता है (जैसे: कर्तव्य)।
अंतर केवल वैदिक स्वरों (Accent) का है:
1. तव्यत्: इसमें 'त्' (Tit) होने से स्वरित स्वर होता है।
2. तव्य: इसमें 'त्' नहीं है, अतः इसका स्वर भिन्न होता है।
1. रूप सिद्धि के नियम (Grammar Rules)
- प्रक्रिया: धातु + तव्य = रूप तैयार। (इसमें कुछ भी हटाने की आवश्यकता नहीं होती)।
- गुण सन्धि: 'तव्यत्' की तरह इसमें भी धातु के अंतिम स्वर का गुण होता है (इ→ए, उ→ओ, ऋ→अर्)।
- वाच्य: कर्मवाच्य (Passive) और भाववाच्य में प्रयोग होता है।
- लिंग: यह विशेषण की तरह तीनों लिंगों में चलता है।
2. उदाहरण तालिका (Examples)
| धातु | पुल्लिंग (Male) | स्त्रीलिंग (Female) | नपुंसकलिग | अर्थ (Hindi) |
|---|---|---|---|---|
| लिख् | लेखितव्यः | लेखितव्या | लेखितव्यम् | लिखना चाहिए |
| श्रु (सुनना) | श्रोतव्यः | श्रोतव्या | श्रोतव्यम् | सुनना चाहिए |
| नी (ले जाना) | नेतव्यः | नेतव्या | नेतव्यम् | ले जाना चाहिए |
| खाद् (खाना) | खादितव्यः | खादितव्या | खादितव्यम् | खाना चाहिए |
| वच् (बोलना) | वक्तव्यः | वक्तव्या | वक्तव्यम् | बोलना चाहिए |
| सेव् (सेवा) | सेवितव्यः | सेवितव्या | सेवितव्यम् | सेवा करनी चाहिए |
3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)
1. त्वया लेखः लेखितव्यः।
(तुम्हारे द्वारा लेख लिखा जाना चाहिए।)
2. जनेन कथा श्रोतव्या।
(मनुष्य के द्वारा कथा सुनी जानी चाहिए।)
3. रोगीणा औषधं पा तव्यम् (पातव्यम्)।
(रोगी के द्वारा दवाई पी जानी चाहिए।)
(तुम्हारे द्वारा लेख लिखा जाना चाहिए।)
2. जनेन कथा श्रोतव्या।
(मनुष्य के द्वारा कथा सुनी जानी चाहिए।)
3. रोगीणा औषधं पा तव्यम् (पातव्यम्)।
(रोगी के द्वारा दवाई पी जानी चाहिए।)
