त्व प्रत्यय (Tva Pratyaya)
परिचय: यह एक 'तद्धित प्रत्यय' है। यह धातु (Verb) में नहीं, बल्कि संज्ञा या विशेषण शब्दों में लगता है।
अर्थ: इसका प्रयोग 'भाववाचक संज्ञा' (Abstract Noun) बनाने के लिए किया जाता है। हिन्दी में इसका अर्थ 'पन', 'ता' या 'भाव' होता है।
जैसे: देव + त्व = देवत्वम् (देवता होने का भाव)।
अर्थ: इसका प्रयोग 'भाववाचक संज्ञा' (Abstract Noun) बनाने के लिए किया जाता है। हिन्दी में इसका अर्थ 'पन', 'ता' या 'भाव' होता है।
जैसे: देव + त्व = देवत्वम् (देवता होने का भाव)।
💡 स्मार्ट टिप (लिंग नियम):
'त्व' प्रत्यय लगने के बाद बनने वाला शब्द हमेशा नपुंसकलिग (Neuter Gender) में होता है और इसके अंत में 'म्' जुड़ जाता है।
(शब्द + त्व = शब्दत्वम्)
'त्व' प्रत्यय लगने के बाद बनने वाला शब्द हमेशा नपुंसकलिग (Neuter Gender) में होता है और इसके अंत में 'म्' जुड़ जाता है।
(शब्द + त्व = शब्दत्वम्)
1. सूत्र और नियम (Grammar Rules)
- सूत्र: "तस्य भावस्त्वतलौ" (5.1.119) - अर्थात् किसी शब्द के 'भाव' (Nature/State) को बताने के लिए 'त्व' और 'तल्' प्रत्यय लगते हैं।
- सरलता: इसमें शब्दों के मूल रूप में कोई कठिन परिवर्तन (गुण/वृद्धि) नहीं होता, बस सीधे 'त्वम्' जुड़ जाता है।
- विशेष: यदि शब्द के अंत में 'त्' है और 'त्व' जुड़ रहा है, तो दो बार 'त्' लिखा जाएगा (महत् + त्व = महत्त्वम्)।
2. उदाहरण तालिका (Examples)
| मूल शब्द | प्रत्यय | निर्मित शब्द (नपुं.) | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| मनुष्य | त्व | मनुष्यत्वम् | मनुष्यता / इंसानियत |
| गुरु (भारी/बड़ा) | त्व | गुरुत्वम् | भारीपन / बड़प्पन |
| लघु (छोटा) | त्व | लघुत्वम् | छोटापन |
| कवि | त्व | कवित्वम् | कवि होने का भाव / कविता |
| महत् (महान) | त्व | महत्त्वम् | महानता (Importance) |
| सुन्दर | त्व | सुन्दरत्वम् | सुन्दरता |
| शिशु (बच्चा) | त्व | शिशुत्वम् | बचपन |
3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)
1. तस्य कवित्वम् अद्भुतं अस्ति।
(उसकी कविता/कवि-प्रतिभा अद्भुत है।)
2. ईश्वरे प्रभुत्वम् अस्ति।
(ईश्वर में प्रभुता/स्वामित्व है।)
3. सज्जनानां महत्त्वम् सर्वे जानन्ति।
(सज्जनों की महानता सब जानते हैं।)
(उसकी कविता/कवि-प्रतिभा अद्भुत है।)
2. ईश्वरे प्रभुत्वम् अस्ति।
(ईश्वर में प्रभुता/स्वामित्व है।)
3. सज्जनानां महत्त्वम् सर्वे जानन्ति।
(सज्जनों की महानता सब जानते हैं।)
