भारत का राजपत्र
The Gazette of India
EXTRAORDINARY
PART III-Section 4
PUBLISHED BY AUTHORITY
नई दिल्ली, मंगलवार, जनवरी 13, 2026/पौष 23, 1947
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
अधिसूचना
नई दिल्ली, 13 जनवरी, 2026
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026
(यूआईएन: 1/2026)
फा. सं. 1-7/2011 (एससीटी). - प्रस्तावना :
यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के मानकों का समन्वय एवं निर्धारण करने के लिए अधिदिष्ट एवं सशक्त किया गया है;
और यद्यपि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 'पूर्ण समता एवं समावेशन' को सभी शैक्षिक निर्णयों की आधारशिला के रूप में मान्यता देती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी छात्र शिक्षा प्रणाली में उन्नति कर सकें;
और यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान के आधार पर या दिव्यांगजनों के विरुद्ध भेदभाव के उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्ध है;
और यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को संवर्धन देना है।
अब, इसलिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2012 के प्रतिस्थापन द्वारा तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 12 के खंड (ञ) के साथ पठित धारा 26 की उप-धारा (1) के खंड (छ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एतद्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थातः
1. संक्षिप्त शीर्षक, प्रयोज्यता और प्रारंभः
- क. इन विनियमों का नाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 (यूआईएन: 1/2026) होगा ।
- ख. ये भारत के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होंगे।
- ग. ये अधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे।
2. उद्देश्यः
धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों अथवा इनमें से किसी के भी सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव का उन्मूलन करना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन देना।
3. परिभाषाएँ:
(1) इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
- क. "अधिनियम" का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) है;
- ख. "पीड़ित व्यक्ति" का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास इन विनियमों के अंतर्गत शिकायतों से संबंधित या जुड़े मामलों में कोई शिकायत है;
- ग. "जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव है;
- घ. "आयोग" का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है;
- ङ. "भेदभाव" का अर्थ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी एक के आधार पर किसी भी हितधारक के विरुद्ध कोई भी अनुचित, भेदभावपूर्ण या पक्षपातपूर्ण व्यवहार या ऐसा कोई कार्य, चाहे वह स्पष्ट हो या अंतर्निहित हो। इसमें ऐसा कोई भी विभेद, बहिष्करण, प्रतिबंध या पक्षपात भी शामिल है जिसका उद्देश्य या प्रभाव शिक्षा में समान व्यवहार को निष्प्रभावी या अक्षम करना है और विशेष रूप से, किसी भी हितधारक या हितधारकों के समूह पर ऐसी शर्तें लगाना है जो मानवीय गरिमा के प्रतिकूल हों।
- च. "समता" से अर्थ सभी वैध अधिकारों के प्रयोग के संबंध में पात्रता एवं अवसर के मामले में सभी हितधारकों के लिए एक समान अवसर का क्षेत्र है।
- छ. "समता समिति" का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान के प्रमुख द्वारा गठित समिति है।
- ज. "समता हेल्पलाइन" का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा स्थापित एवं संचालित एक हेल्पलाइन है;
- झ. "समान अवसर केंद्र" का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा इन विनियमों के तहत स्थापित केंद्र है;
- ञ. "संकाय सदस्य" का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान के लिए कार्य करने वाले शिक्षक हैं;
- ट. "लिंग" का अर्थ पुरुष, महिला और तृतीय लिंग सम्मिलित हैं;
- ठ. "शिकायत" का अर्थ इन विनियमों के अंतर्गत भेदभाव के संबंध में एक पीड़ित व्यक्ति द्वारा की गई शिकायतें सम्मिलित हैं;
- ड. "संस्थान का प्रमुख" का अर्थ विश्वविद्यालय के मामले में कुलपति या समविश्वविद्यालय (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), प्राचार्य या निदेशक अथवा संस्थान या महाविद्यालय के कार्यकारी प्रमुख के लिए प्रयुक्त ऐसा अन्य पदनाम है;
- ढ. "उच्च शिक्षा संस्थान" का अर्थ धारा 2 के खंड (च) के अर्थ के अंतर्गत एक विश्वविद्यालय, धारा 12क की उप-धारा (1) के खंड (ख) के अर्थ के अंतर्गत एक महाविद्यालय, तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत घोषित समविश्वविद्यालय (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी संस्थान) है;
- ण. "लोकपाल" का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (छात्रों की शिकायतों का निवारण) विनियम, 2023 के तहत, समय-समय पर संशोधित, नियुक्त लोकपाल है;
- त. "कर्मचारी" का अर्थ संकाय सदस्यों के अतिरिक्त, वे व्यक्ति हैं जो उच्च शिक्षा संस्थान के लिए कार्यरत हैं;
- थ. "हितधारक" का अर्थ छात्र, संकाय सदस्यों, कर्मचारी, और प्रबंध समिति के सदस्य, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थान का प्रमुख भी शामिल है;
- द. "छात्र" का अर्थ किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान में किसी भी माध्यम से, अर्थात् औपचारिक, मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल), या ऑनलाइन के माध्यम से नामांकित, या नामांकन हेतु प्रवेश चाहने वाला व्यक्ति है;
- ध. "विश्वविद्यालय" का अर्थ केंद्रीय अधिनियम, प्रांतीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके तहत स्थापित या समामेलित विश्वविद्यालय है और इसमें ऐसा कोई भी संस्थान शामिल है जिसे संबंधित विश्वविद्यालय के परामर्श से, आयोग द्वारा अधिनियम के तहत इस निमित्त बनाए गए विनियमों के अनुसार मान्यता प्रदान की गई हो;
(2) इन विनियमों में प्रयुक्त किंतु यहां परिभाषित न की गई वे शब्द और पद जो अधिनियम या सामान्य उपबंध अधिनियम, 1897 में परिभाषित हैं, उनके वे अर्थ होंगे जो क्रमशः उस अधिनियम या सामान्य उपबंध अधिनियम, 1897 में, जैसी भी स्थिति हो, उनके लिए निर्दिष्ट किए गए हैं।
4. समता के संवर्धन का कर्तव्यः
(1) प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान का -
- क. भेदभाव के उन्मूलन का कर्तव्य होगा;
- ख. हितधारकों के बीच समता के संवर्धन का कर्तव्य होगा;
- ग. हितधारकों के विरुद्ध भेदभाव को उन्मूलन करने तथा उनकी जाति, सम्प्रदाय, धर्म, भाषा, नृजातीयता, लिंग या दिव्यांगता के पूर्वाग्रह के बिना उनके हितों की रक्षा के लिए उचित संरक्षात्मक एवं निवारक उपाय करेगा।
(2) कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान भेदभाव के किसी भी रूप की अनुमति नहीं देगा या उसे नजरअंदाज नहीं करेगा।
(3) यह सुनिश्चित करना संस्थान के प्रमुख का कर्तव्य होगा कि इन विनियमों का विधिवत पालन हो, और इस उद्देश्य के लिए उसके पास सभी आवश्यक शक्तियाँ होंगी।
5. समान अवसर केंद्र:
- प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान एक समान अवसर केंद्र स्थापित करेगा, जिसका कार्य वंचित समूहों के लिए नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रखना; शैक्षणिक, वित्तीय, सामाजिक एवं अन्य मामलों में मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान करना; तथा परिसर में सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करना होगा। बशर्ते कि यदि किसी महाविद्यालय में समान अवसर केंद्र स्थापित करने के लिए कम से कम पाँच संकाय सदस्य नहीं हैं, तो महाविद्यालय के समान अवसर केंद्र के कार्य उस विश्वविद्यालय के समान अवसर केंद्र द्वारा किए जाएंगे, जिससे महाविद्यालय संबद्ध है।
- केंद्र इन विनियमों के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु नागरिक समाज, स्थानीय मीडिया, पुलिस, जिला प्रशासन, इस क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षक सदस्यों, कर्मचारियों एवं अभिभावकों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
- समान अवसर केंद्र इन विनियमों के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सामान्य रूप से तथा योग्य मामलों में कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ समन्वय करेगा।
- उच्च शिक्षा संस्थान की कार्यकारी परिषद या शासी निकाय या प्रबंध समिति, जैसी भी स्थिति हो, केंद्र के समन्वयक के रूप में एक स्थायी प्रोफेसर या एक वरिष्ठ संकाय सदस्य का नाम निर्देशन करेगी जिसकी वंचित सामाजिक समूहों के कल्याण में स्वाभाविक रुचि हो।
- समान अवसर केंद्र में एक समता समिति होगी, जिसका गठन संस्थान प्रमुख द्वारा केंद्र के कामकाज के प्रबंधन एवं भेदभाव संबंधी शिकायतों की जाँच के लिए किया जाएगा।
-
समता समिति का गठन इस प्रकार होगाः
- i. संस्थान प्रमुख पदेन अध्यक्ष होंगे।
- ii. उच्च शिक्षा संस्थान के तीन प्रोफेसर / वरिष्ठ संकाय सदस्य, सदस्य के रूप में।
- iii. उच्च शिक्षा संस्थान का एक कर्मचारी (शिक्षक के अतिरिक्त), सदस्य के रूप में।
- iv. व्यावसायिक अनुभव रखने वाले नागरिक समाज के दो प्रतिनिधि, सदस्य के रूप में।
- v. दो छात्र प्रतिनिधि, जिनका नामांकन शैक्षणिक योग्यता/खेलों में उत्कृष्टता/सह-पाठयक्रम गतिविधियों में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा, विशेष आमंत्रित के रूप में।
- vi. समान अवसर केंद्र का समन्वयक पदेन सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करेगा।
- समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
- सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा, और विशेष आमंत्रितों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा।
- समिति की वर्ष में कम से कम दो बार बैठक होगी, और बैठक के लिए गणपूर्ति (कोरम), जिसमें अध्यक्ष शामिल होंगे किंतु विशेष आमंत्रितों को छोड़कर, चार की होगी। समिति अपनी अर्ध-वार्षिक बैठकों में, पिछले 6 महीनों में प्राप्त मामलों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करेगी, जिसमें उसके द्वारा अन्य समितियों को भेजे गए मामले भी शामिल होंगे, जो यूजीसी के किसी अन्य विनियमों या वर्तमान में लागू किसी अन्य कानून के तहत गठित की गई हों।
-
समान अवसर केंद्र के निम्नलिखित कार्य होंगे:
- क. उच्च शिक्षा संस्थान में समुदाय को समग्र रूप से समता एवं समान अवसर सुनिश्चित करना और सामाजिक समावेशन लाना।
- ख. छात्रों, शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच समता को संवर्धन देना और साथ ही भेदभाव की धारणा का उन्मूलन करना।
- ग. विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के बीच शैक्षणिक संवाद तथा स्वस्थ अंतर्वैयक्तिक संबंधों के विकास के लिए एक सामाजिक रूप से अनुकूल वातावरण बनाना।
- घ. हितधारकों को सामाजिक समावेशन के प्रति संवेदनशील बनाने के प्रयास करना।
- ङ. समाज के वंचित वर्ग से संबंधित व्यक्तियों या छात्रों के समूह की सहायता करना।
- च. किसी भी भेदभाव की घटना का प्रतिवेदन करने वाले पीड़ित व्यक्ति को प्रतिशोध से बचाना।
- छ. सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के कल्याण हेतु योजनाओं एवं कार्यक्रमों से संबंधित सूचना, साथ ही समय-समय पर जारी सरकार तथा यूजीसी या अन्य संबंधित एजेंसियों/संगठनों के अधिसूचनाएं/ज्ञापन, कार्यालय आदेश का प्रसार करना।
- ज. उन कार्यों की एक उदाहरणात्मक सूची तैयार एवं प्रसारित करना जिन्हें भेदभाव माना जाएगा।
- झ. समाज के वंचित समूहों से संबंधित छात्रों के प्रवेश के लिए समावेशी प्रक्रियाएं तैयार करना।
- ञ. वंचित समूहों से संबंधित छात्रों को सहायता प्रदान करने के लिए शैक्षणिक एवं वित्तीय संसाधन जुटाने हेतु सरकार एवं अन्य एजेंसियों/संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- ट. भेदभाव की किसी भी घटना का प्रतिवेदन करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाए रखना।
- ठ. उच्च शिक्षा संस्थान में समता को संवर्धन देने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले अन्य कार्य करना।
- प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान निगरानी रखने तथा परिसर में किसी भी भेदभाव को रोकने के लिए आवश्यक समझे गए प्रतिनिधित्व के साथ एक छोटी इकाई भी गठित करेगा, जिसे 'समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड)' कहा जाएगा। उच्च शिक्षा संस्थान आवश्यक संख्या में समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड) गठित कर सकता है, और ऐसे समूह (स्क्वॉड) गतिशील रहेंगे तथा संवेदनशील स्थानों पर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड) अपना प्रतिवेदन समान अवसर केंद्र के समन्वयक को प्रस्तुत करेंगे।
- प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान अपनी प्रत्येक इकाई, विभाग, संकाय, स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय या सुविधा में कम से कम एक हितधारक को 'समता दूत (इक्विटी एम्बेसडर)' के रूप में कार्य करने हेतु नामित करेगा। समता दूत (इक्विटी एम्बेसडर) के रूप में नामित हितधारक परिसर में समता के प्रतीक के रूप में कार्य करेंगे और समान अवसर केंद्र के समन्वयक के संपर्क में रहेंगे। समता दूत (इक्विटी एम्बेसडर) अपनी इकाई में समान अवसर केंद्र द्वारा नियोजित कार्यक्रम या गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए एक नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेगा और किसी भी समता उल्लंघन की सूचना बिना देरी के देगा।
- समान अवसर केंद्र प्रत्येक वर्ष जनवरी और जुलाई के अंत तक अपनी गतिविधियों की एक अर्ध-वार्षिक प्रतिवेदन प्रकाशित करेगा, और यह प्रतिवेदन उच्च शिक्षा संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रतिवेदन में छात्रों एवं कर्मचारियों की जनसांख्यिकीय संरचना, पिछले शैक्षणिक वर्ष के छात्रों की ड्रॉपआउट दर, इन विनियमों के तहत प्राप्त शिकायतें/अभियोग, और उनकी वर्तमान स्थिति शामिल होगी।
6. समता हेल्पलाइनः
- प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान एक 'समता हेल्पलाइन' स्थापित एवं संचालित करेगा जो चौबीसों घंटे कार्यरत रहेगी। बशर्ते कि यदि किसी महाविद्यालय की समता हेल्पलाइन किसी कारणवश कार्यशील नहीं है, तो उस कॉलेज के हितधारकों के लिए संबद्ध विश्वविद्यालय की समता हेल्पलाइन सुलभ होगी।
- समता हेल्पलाइन किसी भी ऐसे हितधारक के लिए सुलभ होगी जो किसी भेदभाव से संबंधित घटना के कारण संकट में हो।
- यदि सूचना देने वाला व्यक्ति अनुरोध करता है, तो भेदभाव की सूचना देने वाले हितधारक की पहचान गोपनीय रखी जायेगी।
7. समता के संवर्धन के उपायः
उच्च शिक्षा संस्थान समता के संवर्धन हेतु निम्नलिखित उपाय करेंगे:
- क. उच्च शिक्षा संस्थान यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रवेश या प्रवेश नवीनीकरण के समय सभी छात्र तथा सभी संकाय सदस्य एवं कर्मचारी एक घोषणा-पत्र प्रस्तुत करें कि वे समता को संवर्धन देंगे और भेदभाव के किसी भी रूप में संलिप्त नहीं होंगे।
- ख. इन विनियमों एवं समता हेल्पलाइन की जानकारी उच्च शिक्षा संस्थान की वेबसाइट (ओं) पर प्रमुखता से उपलब्ध कराई जाएगी।
- ग. प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से पूर्व, संस्थान प्रमुख विभिन्न कार्यकर्ताओं जैसे छात्रावास वार्डन, छात्र, अभिभावक/संरक्षक, संकाय, कर्मचारी, जिला प्रशासन, पुलिस की एक बैठक आयोजित करेंगे और उसमें संबोधित करेंगे, जो अभिविन्यास कार्यक्रम का हिस्सा होगी, ताकि हितधारकों के बीच समता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जा सके और इन विनियमों के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके। बैठक का एक वीडियो उच्च शिक्षा संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा।
- घ. उच्च शिक्षा संस्थान यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रावासों, कक्षाओं, मेंटरशिप समूहों या किसी अन्य शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए कोई भी चयन, अलगाव या आवंटन पारदर्शी, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण हो।
- ङ. समता को संवर्धन देने के लिए, उच्च शिक्षा संस्थान परिसर में उपयुक्त स्थानों पर पोस्टर प्रमुखता से प्रदर्शित करेंगे और कार्यशालाएं, कार्यक्रम आदि आयोजित करेंगे।
- च. उच्च शिक्षा संस्थान छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के परामर्श हेतु व्यावसायिक परामर्शदाताओं की सेवाएं लेंगे या सहायता प्राप्त करेंगे।
- छ. उच्च शिक्षा संस्थान समता को संवर्धन देने के लिए यूजीसी द्वारा समय-समय पर जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों, जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (एसईडीजी) के लिए समान अवसर प्रदान करने के दिशा-निर्देश, आदि को लागू करेंगे।
- ज. किसी भी भेदभाव की घटना के पीड़ित या गवाह, चाहे वह छात्र, संकाय सदस्य या कर्मचारी ही क्यों न हो, ऐसी घटनाओं का प्रतिवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किए जाएंगे, और सूचनाकर्ता द्वारा अनुरोध किए जाने पर उनकी पहचान संरक्षित रखी जाएगी, तथा उन्हें प्रतिशोध या उत्पीड़न के विरुद्ध आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
8. भेदभाव की घटना के मामले में प्रक्रियाः
- क. कोई भी पीड़ित व्यक्ति किसी भी भेदभाव की घटना की सूचना ऑनलाइन पोर्टल पर, लिखित रूप में, या समान अवसर केंद्र के समन्वयक को ईमेल भेजकर दे सकता है। पीड़ित व्यक्ति की पहचान अनुरोध किए जाने पर गोपनीय रखी जाएगी।
- ख. पीड़ित व्यक्ति के पास घटना की सूचना समता हेल्पलाइन पर देने का विकल्प भी होगा। हेल्पलाइन पर प्राप्त सूचना, यदि प्रथम दृष्टया दंड विधियों के अंतर्गत कोई मामला बनता है, तो संबंधित पुलिस प्राधिकारियों को अग्रेषित कर दी जाएगी।
- ग. समता समिति, ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, उचित कार्रवाई करने के लिए 24 घंटे के भीतर बैठक करेगी। समता समिति मामले को यूजीसी के किसी अन्य विनियमों या वर्तमान में लागू किसी अन्य कानून के तहत गठित किसी समिति को भी निर्दिष्ट कर सकती है, यदि उसकी राय है कि मामले को उस समिति द्वारा बेहतर ढंग से निपटाया जा सकता है; या विनियमों या कानून के प्रावधानों के अनुसार उस समिति द्वारा उस पर कार्रवाई की जानी आवश्यक है; या वह समिति पहले से ही मामले की जांच में है।
- घ. समता समिति तत्पश्चात 15 कार्य दिवसों के भीतर अपना प्रतिवेदन संस्थान के प्रमुख को प्रस्तुत करेगी। समता समिति का प्रतिवेदन की एक प्रति पीड़ित व्यक्ति को भी भेजी जाएगी।
- ङ. समता समिति से प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, संस्थान का प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान के नियमों के अनुसार 7 कार्य दिवसों के भीतर आगे की कार्रवाई शुरू करेगा। हालांकि, यदि दंड विधि के तहत कोई मामला बनता है, तो पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचित किया जाएगा।
- च. यदि संस्थान के प्रमुख के विरुद्ध कोई शिकायत की जाती है, तो समता समिति की बैठक की अध्यक्षता समान अवसर केंद्र के समन्वयक द्वारा की जाएगी, और समता समिति का प्रतिवेदन संस्थान के प्रमुख के अगले उच्चतर प्राधिकारी को अग्रेषित की जाएगी।
9. अपीलः
(1) समता समिति का प्रतिवेदन से असंतुष्ट व्यक्ति उस प्रतिवेदन को प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर लोकपाल के समक्ष अपील कर सकता है। लोकपाल किसी अपील की सुनवाई सुविधाजनक बनाने के लिए एक एमिकस क्यूरी (न्याय-मित्र) नियुक्त कर सकता है।
(2) लोकपाल द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय-मित्र) को उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा उचित शुल्क का भुगतान किया जाएगा।
(3) लोकपाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (छात्रों की शिकायतों का निवारण) विनियम, 2023, जैसे समय-समय पर संशोधित, के अनुसार 30 दिनों की अवधि के भीतर अपील का निपटान करने के लिए सभी प्रयास करेगा।
10. निगरानीः
(1) यूजीसी इन विनियमों के उद्देश्यों की प्राप्ति में की गई प्रगति की समीक्षा के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करेगा और इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों से सूचना मांगना, उच्च शिक्षा संस्थानों के परिसरों का दौरा करना आदि सहित तंत्र विकसित करेगा। ऐसी समीक्षा के आधार पर, यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थानों को इन विनियमों के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उपाय करने की सलाह दे सकता है, और उच्च शिक्षा संस्थान तदनुसार कार्य करेंगे।
(2) यूजीसी एक राष्ट्रीय स्तरीय निगरानी समिति का गठन करेगी, जिसमें वैधानिक व्यावसायिक परिषदों और आयोगों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधि होंगे। समिति इन विनियमों के कार्यान्वयन की देखरेख करेगी और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव के मुद्दों पर भी विचार करेगी तथा उसकी रोकथाम के साधन सुझाएगी। समिति की वर्ष में कम से कम दो बार बैठक होगी।
(3) प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान अपने समान अवसर केंद्र के कार्यकरण के संबंध में एक वार्षिक प्रतिवेदन समीक्षा के प्रयोजनार्थ प्रत्येक वर्ष जनवरी माह के अंत तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, संबंधित वैधानिक व्यावसायिक परिषद (ओं) अथवा आयोग (ओं), संबंधित राज्य के उच्च शिक्षा विभाग अथवा निदेशालय तथा संबद्ध विश्वविद्यालय को प्रस्तुत करेगा।
11. अनुपालन न करने के परिणामः
यदि कोई उच्च शिक्षा संस्थान इन विनियमों के किसी भी प्रावधान का अनुपालन नहीं करता है, तो आयोग अनुपालन न करने की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करेगा। यदि आयोग द्वारा गठित जांच समिति द्वारा अनुपालन न करना सिद्ध हो जाता है, तो उच्च शिक्षा संस्थान पर निम्नलिखित कार्रवाई (याँ) की जाएगीः
- (क) यूजीसी योजनाओं में भाग लेने से वंचित किया जाएगा।
- (ख) उपाधि/डिग्री कार्यक्रम चलाने से वंचित किया जाएगा।
- (ग) मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) और ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम संचालित करने से वंचित किया जाएगा।
- (घ) यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 2 (च) और 12 बी के तहत रखी गई उच्च शिक्षा संस्थानों की सूची से हटा दिया जाएगा।
उच्च शिक्षा संस्थान पर उपरोक्त में से एक या एक से अधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, यूजीसी अन्य उपयुक्त दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है, जो कि प्रत्येक मामले की प्रकृति के अनुसार होगी।
मनिष जोशी, सचिव
[विज्ञापन-III/4/असा./619/2025-26]
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