'दृश्यते अनेन इति दर्शनम्'—जिसके द्वारा सत्य का साक्षात्कार किया जाए, वह दर्शन है। भारतीय दर्शन (Indian Philosophy) विश्व की सबसे समृद्ध और तार्किक विचार परंपरा है। इसे मुख्य रूप से आस्तिक (न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत) और नास्तिक (चार्वाक, जैन, बौद्ध) धाराओं में विभाजित किया गया है।
प्रस्तुत शोधपरक सूची में हमने **100 ऐसे मनीषियों** को कालक्रम के अनुसार संकलित किया है, जिन्होंने सूत्र रचना, भाष्य लेखन, तार्किक खंडन-मंडन और आधुनिक व्याख्याओं के माध्यम से भारतीय ज्ञान मीमांसा (Epistemology) और तत्वमीमांसा (Metaphysics) को शिखर पर पहुँचाया। यह सूची ऋषियों के **'आत्म-साक्षात्कार'** से लेकर नव्य-न्याय के **'बौद्धिक विलास'** तक की यात्रा है।
| क्रम | आचार्य/दार्शनिक | दर्शन/प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 1 | महर्षि कपिल | 'सांख्य सूत्र' (सृष्टि के आदि विद्वान, सांख्य दर्शन के प्रवर्तक)। |
| 2 | महर्षि पतंजलि | 'योगसूत्र' (अष्टांग योग के प्रणेता)। |
| 3 | महर्षि गौतम (अक्षपाद) | 'न्यायसूत्र' (तर्कशास्त्र और न्याय दर्शन के जनक)। |
| 4 | महर्षि कणाद | 'वैशेषिक सूत्र' (परमाणुवाद के जनक)। |
| 5 | महर्षि जैमिनी | 'मीमांसा सूत्र' (कर्मकांड और धर्म की व्याख्या)। |
| 6 | महर्षि बादरायण (व्यास) | 'ब्रह्मसूत्र' (वेदांत दर्शन का आधार स्तंभ)। |
| 7 | बृहस्पति | 'चार्वाक दर्शन' (लोकायत/भौतिकवाद) के आदि आचार्य। |
| 8 | आसुरी | सांख्य दर्शन के प्राचीन आचार्य (कपिल शिष्य)। |
| 9 | पंचशिख | सांख्य दर्शन के विस्तारक। |
| 10 | याज्ञवल्क्य | वृहदारण्यक उपनिषद के महान दार्शनिक। |
| 11 | महावीर (वर्धमान) | जैन दर्शन (अनेकांतवाद) के 24वें तीर्थंकर। |
| 12 | गौतम (इन्द्रभूति) | जैन गणधर (तर्क और ज्ञान मीमांसा)। |
| 13 | मंखलि गोसाल | आजीवक संप्रदाय (नियतिवाद) के प्रवर्तक। |
| 14 | उपवर्ष | मीमांसा और वेदांत के प्राचीन वृत्तिकार। |
| 15 | बौधायन | ब्रह्मसूत्र के प्राचीन वृत्तिकार। |
| 16 | नागार्जुन | 'माध्यमिक कारिका' (बौद्ध शून्यवाद के प्रवर्तक)। |
| 17 | अश्वघोष | बौद्ध दार्शनिक और महाकाव्य रचयिता। |
| 18 | मैत्रेयनाथ | बौद्ध विज्ञानवाद के आदि आचार्य। |
| 19 | उमास्वाति | 'तत्वार्थसूत्र' (जैन दर्शन का मानक ग्रंथ)। |
| 20 | लकुलीश | पाशुपत शैव दर्शन के प्रवर्तक। |
| 21 | वासुगुप्त | 'शिवसूत्र' (कश्मीर शैव दर्शन)। |
| 22 | असंग | योगाचार (बौद्ध दर्शन) के विस्तारक। |
| 23 | वसुबंधु | 'अभिधर्मकोश' (बौद्ध तत्वमीमांसा)। |
| 24 | कुन्दकुन्द आचार्य | 'समयसार' (जैन अध्यात्म और समयसार)। |
| 25 | ईश्वरकृष्ण | 'सांख्यकारिका' (सांख्य दर्शन का प्रामाणिक ग्रंथ)। |
| क्रम | आचार्य | प्रमुख ग्रंथ/संप्रदाय |
|---|---|---|
| 26 | वात्स्यायन | 'न्यायभाष्य' (न्याय सूत्र की प्रथम व्याख्या)। |
| 27 | प्रशस्तपाद | 'पदार्थधर्मसंग्रह' (वैशेषिक दर्शन भाष्य)। |
| 28 | शबर स्वामी | 'शाबर भाष्य' (मीमांसा दर्शन का आधार)। |
| 29 | दिङ्नाग | 'प्रमाणसमुच्चय' (बौद्ध न्याय के जनक)। |
| 30 | धर्मकीर्ति | 'न्यायबिन्दु' (भारतीय तर्कशास्त्र के शिखर पुरुष)। |
| 31 | उद्योतकर | 'न्यायवार्तिक' (न्याय दर्शन के रक्षक)। |
| 32 | गौडपाद | 'माण्डूक्य कारिका' (अजातवाद, आदि शंकराचार्य के गुरु के गुरु)। |
| 33 | कुमारिल भट्ट | 'श्लोकवार्तिक' (मीमांसा और वैदिक कर्मकांड के रक्षक)। |
| 34 | प्रभाकर मिश्र | मीमांसा में 'गुरु मत' के प्रवर्तक। |
| 35 | आदि शंकराचार्य | 'शारीरक भाष्य' (अद्वैत वेदांत की स्थापना)। |
| 36 | सुरेश्वराचार्य | 'नैष्कर्म्यसिद्धि' (शंकराचार्य के शिष्य)। |
| 37 | पद्मपाद | 'पंचपादिका' (विवरण संप्रदाय के आदि)। |
| 38 | मंडन मिश्र | 'ब्रह्मसिद्धि' (पहले मीमांसक, बाद में अद्वैती)। |
| 39 | वाचस्पति मिश्र | 'भामती' (सर्वतंत्रस्वतंत्र, सभी 6 दर्शनों पर टीका)। |
| 40 | जयंत भट्ट | 'न्यायमंजरी' (न्याय दर्शन का विश्वकोश)। |
| 41 | आनंदवर्धन | काव्य दर्शन और ध्वनि सिद्धांत। |
| 42 | अभिनवगुप्त | 'तन्त्रालोक' (कश्मीर शैव दर्शन के सर्वोच्च आचार्य)। |
| 43 | उदयनाचार्य | 'न्यायकुसुमांजलि' (ईश्वर सिद्धि के तार्किक प्रमाण)। |
| 44 | भास्कर आचार्य | 'भेदाभेद' वेदांत मत। |
| 45 | यामुनाचार्य | 'सिद्धित्रय' (विशिष्टाद्वैत की पूर्वपीठिका)। |
| 46 | हरिभद्र सूरि | 'षड्दर्शनसमुच्चय' (तुलनात्मक दर्शन)। |
| 47 | अकलंक देव | जैन न्याय के महान तार्किक। |
| 48 | विद्यानन्द | 'अष्टसहस्री' (जैन दर्शन)। |
| 49 | शांतक्षित | 'तत्वसंग्रह' (बौद्ध दर्शन)। |
| 50 | श्रीधर | 'न्यायकंदली' (वैशेषिक टीका)। |
| क्रम | आचार्य | प्रमुख ग्रंथ/दर्शन |
|---|---|---|
| 51 | रामानुजाचार्य | 'श्रीभाष्य' (विशिष्टाद्वैत वेदांत)। |
| 52 | निम्बार्काचार्य | 'वेदांत पारिजात सौरभ' (द्वैताद्वैत)। |
| 53 | मध्वाचार्य | 'पूर्णप्रज्ञ भाष्य' (द्वैत वेदांत)। |
| 54 | श्रीहर्ष | 'खंडनखंडखाद्य' (अद्वैत तर्कशास्त्र)। |
| 55 | गंगेश उपाध्याय | 'तत्वचिंतामणि' (नव्य-न्याय के प्रवर्तक)। |
| 56 | चित्सुखाचार्य | 'चित्सुखी' (प्रत्यक्-तत्व-प्रदीपिका)। |
| 57 | विद्यारण्य स्वामी | 'पंचदशी' (अद्वैत वेदांत का मानक प्रकरण ग्रंथ)। |
| 58 | वेदांत देशिक | 'शतदूषणी' (विशिष्टाद्वैत के तार्किक रक्षक)। |
| 59 | जयतीर्थ | 'न्यायसुधा' (द्वैत वेदांत के टीकाकार)। |
| 60 | वल्लभाचार्य | 'अणुभाष्य' (शुद्धाद्वैत / पुष्टि मार्ग)। |
| 61 | चैतन्य महाप्रभु | अचिंत्य भेदाभेद (गौड़ीय वेदांत)। |
| 62 | रूप गोस्वामी | भक्ति रसामृत सिन्धु (भक्ति दर्शन)। |
| 63 | जीव गोस्वामी | 'षड्संदर्भ' (गौड़ीय दार्शनिक सिद्धांत)। |
| 64 | मधुसूदन सरस्वती | 'अद्वैतसिद्धि' (न्याय और अद्वैत का समन्वय)। |
| 65 | अप्पय दीक्षित | 'सिद्धांतलेशसंग्रह' और शैव अद्वैत। |
| 66 | रघुनाथ शिरोमणि | 'दीधिति' (नव्य-न्याय के क्रांतिकारी विचारक)। |
| 67 | जगदीश तर्कालंकार | 'शब्दशक्तिप्रकाशिका' (नव्य-न्याय)। |
| 68 | गदाधर भट्टाचार्य | नव्य-न्याय के अंतिम महान आचार्य (गादाधरी)। |
| 69 | अन्नंभट्ट | 'तर्कसंग्रह' (न्याय-वैशेषिक का प्रवेश द्वार)। |
| 70 | विश्वनाथ न्यायपंचानन | 'न्यायसिद्धांतमुक्तावली'। |
| 71 | सदानंद योगींद्र | 'वेदांतसार'। |
| 72 | धर्मराज अध्वरिन्द्र | 'वेदांतपरिभाषा' (अद्वैत प्रमाण शास्त्र)। |
| 73 | विज्ञानभिक्षु | 'सांख्यप्रवचनभाष्य' (सांख्य और वेदांत समन्वय)। |
| 74 | हेमचंद्र | 'प्रमाणमीमांसा' (जैन)। |
| 75 | नीलकंठ चतुर्धर | महाभारत पर अद्वैत परक टीका। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 76 | राजा राममोहन राय | उपनिषदों का आधुनिक अनुवाद और व्याख्या। |
| 77 | स्वामी दयानंद सरस्वती | 'सत्यार्थ प्रकाश' (वैदिक दर्शन का तार्किक पक्ष)। |
| 78 | स्वामी विवेकानंद | नव-वेदांत (Practical Vedanta)। |
| 79 | बाल गंगाधर तिलक | 'गीता रहस्य' (कर्मयोग दर्शन)। |
| 80 | महर्षि अरविंद | 'The Life Divine' (पूर्ण अद्वैत/समग्र योग)। |
| 81 | के.सी. भट्टाचार्य | 'Subject as Freedom' (स्वराज का दर्शन)। |
| 82 | डॉ. एस. राधाकृष्णन | 'Indian Philosophy' (भारतीय दर्शन का पाश्चात्य जगत में प्रचार)। |
| 83 | एस.एन. दासगुप्ता | 'History of Indian Philosophy' (विस्तृत इतिहास)। |
| 84 | एम. हिरियन्ना | 'Outlines of Indian Philosophy'। |
| 85 | टी.आर.वी. मूर्ति | शून्यवाद और कांट (Kant) का तुलनात्मक अध्ययन। |
| 86 | ज्ञानेश्वर (संत) | 'ज्ञानेश्वरी' (गीता पर भावार्थ दीपिका)। |
| 87 | फणिभूषण तर्कवागीश | न्याय दर्शन का बांग्ला/हिंदी भाष्य। |
| 88 | लक्ष्मण शास्त्री जोशी | 'धर्मकोश' और आधुनिक मीमांसा। |
| 89 | श्रीराम शर्मा आचार्य | 108 उपनिषदों और दर्शनों का सरल भाष्य। |
| 90 | बी.के. मतिलाल | भारतीय तर्कशास्त्र (Logic) का आधुनिक विश्लेषण। |
| 91 | जे.एन. मोहंती | फेनोमेनोलॉजी और भारतीय दर्शन। |
| 92 | बद्रीनाथ शुक्ल | नव्य-न्याय के आधुनिक मूर्धन्य विद्वान। |
| 93 | गोविंद चंद्र पांडे | बौद्ध धर्म और वेदांत का ऐतिहासिक शोध। |
| 94 | एन.एस. रामानुज ताताचार्य | नव्य-न्याय और मीमांसा के समकालीन शिखर पुरुष। |
| 95 | रेवाप्रसाद द्विवेदी | काव्यालंकार और दर्शन। |
| 96 | दयानंद भार्गव | जैन दर्शन और नैतिकता। |
| 97 | राममूर्ति शर्मा | अद्वैत वेदांत शोध। |
| 98 | शशिप्रभा कुमार | वैशेषिक दर्शन पर आधुनिक शोध। |
| 99 | रामजी सिंह | जैन दर्शन और गांधीवाद। |
| 100 | पेरी सूर्यनारायण शास्त्री | व्याकरण और दर्शन के समन्वयकर्ता। |
भारतीय दर्शन केवल बौद्धिक विलास नहीं, अपितु दुखों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का साधन है। कपिल के 'दुखत्रय' निवारण से लेकर शंकराचार्य के 'ब्रह्म सत्य' तक, और गंगेश के 'प्रमाण' से लेकर अरविंद के 'अतिमानस' तक—यह 100 विद्वानों की सूची भारत की **प्रज्ञा (Wisdom)** का प्रतीक है।
इन आचार्यों ने सिद्ध किया कि भारत में धर्म और दर्शन (Religion and Philosophy) अलग नहीं हैं। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास पाठकों को अपनी दार्शनिक विरासत से जोड़ने का एक विनम्र सेतु है।

