100 major politics economics scholars: राजनीति और अर्थशास्त्र के 100 प्रमुख विद्वान

Sooraj Krishna Shastri
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राजनीति और अर्थशास्त्र: अभ्युदय और निःश्रेयस का आधार

भारतीय मेधा ने आदि काल से ही स्वीकार किया है कि एक समृद्ध राष्ट्र के लिए 'वार्ता' (अर्थशास्त्र) और 'दण्डनीति' (राजनीति) अनिवार्य हैं। जहाँ राजनीति न्याय और सुशासन (Governance) सुनिश्चित करती है, वहीं अर्थशास्त्र कृषि, व्यापार और धन के प्रबंधन द्वारा जन-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। महाभारत के 'शान्ति पर्व' से लेकर कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' तक, भारतीय मनीषियों ने सत्ता के विकेंद्रीकरण और कूटनीति (Diplomacy) के वे सूत्र दिए जो आज भी वैश्विक राजनीति के लिए प्रासंगिक हैं।

प्रस्तुत सूची में हमने **100 ऐसे नीतिज्ञों और अर्थशास्त्रियों** को संकलित किया है जिन्होंने सप्तांग सिद्धांत, मंडल सिद्धांत और कराधान (Taxation) के वैज्ञानिक नियमों का प्रतिपादन किया। यह संकलन **कौटिल्य** की प्रखर बुद्धि, **विदुर** की नैतिकता और **आधुनिक शोधकर्ताओं** के विजन का संगम है।

1. प्राचीन नीतिज्ञ एवं स्मृतिकाल (वैदिक काल से 300 ई.पू.)
क्रमआचार्य/नीतिज्ञप्रमुख ग्रंथ/सिद्धांत
1बृहस्पति'बार्हस्पत्य सूत्र' (राजनीति और नास्तिक अर्थशास्त्र)।
2शुक्राचार्य'शुक्रनीति' (प्रशासनिक व्यवस्था और दंड नीति)।
3महात्मा विदुर'विदुर नीति' (महाभारत कालीन नैतिक राजनीति)।
4पितामह भीष्म'राजधर्म' (शान्ति पर्व, महाभारत)।
5महर्षि भारद्वाज (नीति)प्राचीन राजनीति शास्त्र के आचार्य।
6विशालाक्षकौटिल्य द्वारा उल्लिखित प्राचीन नीतिज्ञ।
7पिशुनगुप्तचर और कूटनीति के प्राचीन विशेषज्ञ।
8कौणपदंतपरंपरागत राजनीति के समर्थक।
9वातव्याधिविदेशी नीति (Foreign Policy) के प्राचीन आचार्य।
10बहुदंती पुत्रइंद्र संप्रदाय की राजनीति।
11कणिक'कणिक नीति' (यथार्थवादी और कठोर राजनीति)।
12मनु (राजधर्म)'मनुस्मृति' का राजधर्म अध्याय (सप्तांग सिद्धांत)।
13गौतम (नीति)गौतम धर्मसूत्र (प्रशासनिक कानून)।
14पराशर (नीति)प्राचीन अर्थशास्त्र के व्याख्याता।
15नारद (राजनीति)नारद स्मृति (न्याय और राज-व्यवस्था)।
16याज्ञवल्क्य (विधि)विधिक और प्रशासनिक दंड व्यवस्था।
17कामंदक'नीतिसार' (गुप्त कालीन राजनीति का प्रमुख ग्रंथ)।
18कौटिल्य (चाणक्य)'अर्थशास्त्र' (राजनीति और अर्थशास्त्र का महानतम ग्रंथ)।
19मेधातिथि (राजधर्म)राज्य के कर्तव्यों की व्याख्या।
20अश्वघोष'बुद्धचरित' में वर्णित राजधर्म।
21कात्यायन (नीति)विधिक और आर्थिक न्याय।
22विशाखदत्त'मुद्राराक्षस' (कूटनीति और जासूसी पर आधारित नाटक)।
23आर्यशूर'जातकमाला' (करुणा आधारित राजनीति)।
24पिंगल (संख्या)सांख्यिकी (Statistics) का प्राचीन आधार।
25तिरुवल्लुवर'तिरुक्कुरल' (दक्षिण भारत की राजनीति और नैतिकता)।
2. मध्यकालीन राज्यशास्त्र एवं कूटनीति (600 ई. - 1600 ई.)
क्रमआचार्यप्रमुख ग्रंथ/विशेष योगदान
26सोमदेव सूरि'नीतिवाक्यामृत' (जैन दार्शनिक राजनीति)।
27राजा भोज'युक्तिकल्पतरु' (प्रशासन, वास्तु और कूटनीति)।
28हेमचन्द्र सूरी'अर्घनीति' (जैन राजनीतिक सिद्धांत)।
29चण्डेश्वर'राजनीतिरत्नाकर' (मिथिला की प्रशासनिक व्यवस्था)।
30विज्ञानेश्वर'मिताक्षरा' (संपत्ति और आर्थिक कानून)।
31जीमूतवाहन'दायभाग' (उत्तराधिकार और धन प्रबंधन)।
32लक्ष्मोधर'राजधर्मकल्पतरु' (विशाल प्रशासनिक संकलन)।
33सोमेश्वर (तृतीय)'मानसोल्लास' (राजा के कर्तव्य और मनोरंजन)।
34प्रतापरुद्र देव'सरस्वतीविलास' (हिंदू विधि और प्रशासन)।
35माधवाचार्यविजयनगर साम्राज्य के प्रशासनिक सूत्रधार।
36मित्र मिश्र'वीरमित्रोदय' (राजव्यवस्था खंड)।
37नीलकण्ठ भट्ट'नीति मयूख'।
38कमलाकर भट्टविधिक और राजनैतिक विमर्श।
39अनंतदेव'राजधर्मकौस्तुभ'।
40विश्वरूपस्मृति भाष्य में वर्णित राजधर्म।
41बाणभट्ट'हर्षचरित' (सम्राट के गुण और शासन)।
42कल्हण'राजतरङ्गिणी' (कश्मीर का राजनीतिक इतिहास)।
43जयंत भट्ट'न्यायमंजरी' (तर्क और न्याय)।
44वाचस्पति मिश्रविवादचिन्तामणि (आर्थिक न्याय)।
45ठक्कुर फेरू'द्रव्यपरीक्षा' (मुद्रा विज्ञान/Numismatics)।
46बल्लल सेन'दानसागर' (सामाजिक आर्थिक प्रबंधन)।
47टोडरमलराजस्व प्रणाली (Revenue System) के संस्कृत व्याख्याता।
48भट्टोजि दीक्षितकानून और व्याकरण का समन्वय।
49नारायण पंडित'हितोपदेश' (कथाओं के माध्यम से राजनीति)।
50विष्णु शर्मा'पंचतंत्र' (मित्रभेद, मित्रसंप्राप्ति आदि राजनीतिक सूत्र)।
3. आधुनिक विमर्श एवं विधिक शोधकर्ता (1800 ई. - वर्तमान)
क्रमविद्वानप्रमुख शोध/कार्य
51आर. शामशास्त्री'अर्थशास्त्र' की पांडुलिपि के खोजकर्ता और संपादक।
52के.पी. जायसवाल'Hindu Polity' (भारतीय गणतंत्रवाद के शोधकर्ता)।
53पी.वी. काणेधर्मशास्त्र के इतिहास में राजनीति का विस्तृत विवेचन।
54ए.एस. अल्तेकर'State and Government in Ancient India'।
55यू.एन. घोषाल'A History of Indian Political Ideas'।
56बी.के. सरकारप्राचीन भारतीय राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन।
57आर.पी. कांगले'The Kautilya Arthashastra' (अंग्रेजी अनुवाद और शोध)।
58रामशरण शर्मा'Aspects of Political Ideas and Institutions'।
59डॉ. बी.आर. अम्बेडकरप्राचीन भारत की शासन व्यवस्था का विधिक विश्लेषण।
60गोविंद चंद्र पांडेभारतीय संस्कृति और राजनीति के मूल्य।
61लक्ष्मणशास्त्री जोशीमराठी और संस्कृत में राजनीतिक विमर्श।
62वी.आर. मेहताभारतीय राजनीतिक चिंतन की नींव।
63पी.एन. सेन'Hindu Jurisprudence'।
64वी.पी. वर्मा'Ancient Indian Political Thought'।
65बी.ए. सालेटोर'Ancient Indian Political Thought and Institutions'।
66जे.जे. मेयरजर्मन भाषा में अर्थशास्त्र का शोध।
67थॉमस ट्रॉटमैनकौटिल्य और अर्थशास्त्र का संरचनात्मक अध्ययन।
68अमर्त्य सेनकौटिल्य के आर्थिक विचारों का आधुनिक संदर्भ।
69एस. रामास्वामीराजनीति और अर्थशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन।
70ब्रजेंद्रनाथ सीलप्राचीन भारत के सकारात्मक विज्ञान और अर्थशास्त्र।
71के.एम. पणिक्करभारतीय कूटनीति का इतिहास।
72जे.सी. कुमारप्पाभारतीय आर्थिक दर्शन।
73धर्मपालभारतीय शासन और पंचायत व्यवस्था।
74एस. रंगराजनअर्थशास्त्र का आधुनिक अनुवाद (Aditya)।
75स्वामी दयानन्द सरस्वती'सत्यार्थ प्रकाश' में आदर्श राज्य व्यवस्था।
4. प्रशासन, न्याय और समकालीन नीतिज्ञ
क्रमविद्वानप्रमुख योगदान
76महात्मा गांधी'हिन्द स्वराज' (नैतिक राजनीति और विकेंद्रीकरण)।
77पंडित दीनदयाल उपाध्यायएकात्म मानववाद (Integral Humanism) और अर्थायाम।
78राम मनोहर लोहियासमाजवादी राजनीति और भारतीय परंपरा।
79के. राजारामचाणक्य के अर्थशास्त्र पर आधुनिक शोध।
80एल.एन. रंगराजनकौटिल्य का वैज्ञानिक संपादन।
81सुभाष काकप्राचीन भारत के सूचना सिद्धांत और राजनीति।
82राजीव मल्होत्राभारतीय राजनीति का वैश्विक विमर्श।
83बिबेक देबरॉयमहाभारत और पुराणों का आर्थिक व विधिक अनुवाद।
84सुब्रमण्यम स्वामीकौटिल्य के आर्थिक सिद्धांतों का आधुनिक प्रयोग।
85एस. जयशंकरकूटनीति में 'हनुमान' और 'कृष्ण' के सूत्रों का प्रयोग।
86प्रो. राधाकृष्णनचाणक्य नीति के आधुनिक प्रणेता।
87डी.डी. कोसंबीइतिहास और अर्थशास्त्र का भौतिकवादी विश्लेषण।
88अनंत सदाशिव अल्तेकरभारतीय गांव की शासन व्यवस्था।
89पी.एन. प्रभुहिंदू सामाजिक संगठन और प्रशासन।
90बलदेव उपाध्यायसंस्कृत साहित्य का राजनीतिक इतिहास।
91कपिला वात्स्यायनकला और राज्य का संबंध।
92विद्यानिवास मिश्रलोक नीति और भारतीयता।
93के. संतोषमप्राचीन भारतीय अर्थशास्त्र शोध।
94शशिप्रभा कुमारवैशेषिक और न्याय की राजनैतिक दृष्टि।
95अनिल सीलआधुनिक भारतीय राजनीति का उदय।
96पी.बी. गजेंद्रगडकरप्राचीन न्याय और आधुनिक कानून।
97जे.एन. मोहंतीस्वराज का दार्शनिक आधार।
98प्रो. रामजी उपाध्यायप्राचीन भारत की शासन प्रणाली।
99अभिराज राजेंद्र मिश्रआधुनिक संस्कृत में राजनीतिक चेतना।
100प्रभुनाथ द्विवेदीसाहित्य और राजनीति का समन्वय।
निष्कर्ष: सुशासन और राष्ट्र-निर्माण की परंपरा

राजनीति और अर्थशास्त्र के इन 100 विद्वानों की सूची यह प्रमाणित करती है कि भारत ने 'अर्थ' (Wealth) को कभी धर्म से अलग नहीं माना। **कौटिल्य** ने जहाँ "प्रजासुखे सुखं राज्ञः" (प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है) का मंत्र दिया, वहीं **शुक्राचार्य** और **विदुर** ने नैतिकता को सत्ता का आधार बताया।

आज के भू-राजनैतिक (Geopolitical) परिवेश में भारतीय कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री पुनः इन प्राचीन सूत्रों की ओर लौट रहे हैं। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास उन सभी ऋषियों और शोधकर्ताओं को नमन है, जिन्होंने भारत को "सोने की चिड़िया" बनाने वाले आर्थिक और राजनैतिक सिद्धांतों का सृजन किया।

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