भारतीय मेधा ने आदि काल से ही स्वीकार किया है कि एक समृद्ध राष्ट्र के लिए 'वार्ता' (अर्थशास्त्र) और 'दण्डनीति' (राजनीति) अनिवार्य हैं। जहाँ राजनीति न्याय और सुशासन (Governance) सुनिश्चित करती है, वहीं अर्थशास्त्र कृषि, व्यापार और धन के प्रबंधन द्वारा जन-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। महाभारत के 'शान्ति पर्व' से लेकर कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' तक, भारतीय मनीषियों ने सत्ता के विकेंद्रीकरण और कूटनीति (Diplomacy) के वे सूत्र दिए जो आज भी वैश्विक राजनीति के लिए प्रासंगिक हैं।
प्रस्तुत सूची में हमने **100 ऐसे नीतिज्ञों और अर्थशास्त्रियों** को संकलित किया है जिन्होंने सप्तांग सिद्धांत, मंडल सिद्धांत और कराधान (Taxation) के वैज्ञानिक नियमों का प्रतिपादन किया। यह संकलन **कौटिल्य** की प्रखर बुद्धि, **विदुर** की नैतिकता और **आधुनिक शोधकर्ताओं** के विजन का संगम है।
| क्रम | आचार्य/नीतिज्ञ | प्रमुख ग्रंथ/सिद्धांत |
|---|---|---|
| 1 | बृहस्पति | 'बार्हस्पत्य सूत्र' (राजनीति और नास्तिक अर्थशास्त्र)। |
| 2 | शुक्राचार्य | 'शुक्रनीति' (प्रशासनिक व्यवस्था और दंड नीति)। |
| 3 | महात्मा विदुर | 'विदुर नीति' (महाभारत कालीन नैतिक राजनीति)। |
| 4 | पितामह भीष्म | 'राजधर्म' (शान्ति पर्व, महाभारत)। |
| 5 | महर्षि भारद्वाज (नीति) | प्राचीन राजनीति शास्त्र के आचार्य। |
| 6 | विशालाक्ष | कौटिल्य द्वारा उल्लिखित प्राचीन नीतिज्ञ। |
| 7 | पिशुन | गुप्तचर और कूटनीति के प्राचीन विशेषज्ञ। |
| 8 | कौणपदंत | परंपरागत राजनीति के समर्थक। |
| 9 | वातव्याधि | विदेशी नीति (Foreign Policy) के प्राचीन आचार्य। |
| 10 | बहुदंती पुत्र | इंद्र संप्रदाय की राजनीति। |
| 11 | कणिक | 'कणिक नीति' (यथार्थवादी और कठोर राजनीति)। |
| 12 | मनु (राजधर्म) | 'मनुस्मृति' का राजधर्म अध्याय (सप्तांग सिद्धांत)। |
| 13 | गौतम (नीति) | गौतम धर्मसूत्र (प्रशासनिक कानून)। |
| 14 | पराशर (नीति) | प्राचीन अर्थशास्त्र के व्याख्याता। |
| 15 | नारद (राजनीति) | नारद स्मृति (न्याय और राज-व्यवस्था)। |
| 16 | याज्ञवल्क्य (विधि) | विधिक और प्रशासनिक दंड व्यवस्था। |
| 17 | कामंदक | 'नीतिसार' (गुप्त कालीन राजनीति का प्रमुख ग्रंथ)। |
| 18 | कौटिल्य (चाणक्य) | 'अर्थशास्त्र' (राजनीति और अर्थशास्त्र का महानतम ग्रंथ)। |
| 19 | मेधातिथि (राजधर्म) | राज्य के कर्तव्यों की व्याख्या। |
| 20 | अश्वघोष | 'बुद्धचरित' में वर्णित राजधर्म। |
| 21 | कात्यायन (नीति) | विधिक और आर्थिक न्याय। |
| 22 | विशाखदत्त | 'मुद्राराक्षस' (कूटनीति और जासूसी पर आधारित नाटक)। |
| 23 | आर्यशूर | 'जातकमाला' (करुणा आधारित राजनीति)। |
| 24 | पिंगल (संख्या) | सांख्यिकी (Statistics) का प्राचीन आधार। |
| 25 | तिरुवल्लुवर | 'तिरुक्कुरल' (दक्षिण भारत की राजनीति और नैतिकता)। |
| क्रम | आचार्य | प्रमुख ग्रंथ/विशेष योगदान |
|---|---|---|
| 26 | सोमदेव सूरि | 'नीतिवाक्यामृत' (जैन दार्शनिक राजनीति)। |
| 27 | राजा भोज | 'युक्तिकल्पतरु' (प्रशासन, वास्तु और कूटनीति)। |
| 28 | हेमचन्द्र सूरी | 'अर्घनीति' (जैन राजनीतिक सिद्धांत)। |
| 29 | चण्डेश्वर | 'राजनीतिरत्नाकर' (मिथिला की प्रशासनिक व्यवस्था)। |
| 30 | विज्ञानेश्वर | 'मिताक्षरा' (संपत्ति और आर्थिक कानून)। |
| 31 | जीमूतवाहन | 'दायभाग' (उत्तराधिकार और धन प्रबंधन)। |
| 32 | लक्ष्मोधर | 'राजधर्मकल्पतरु' (विशाल प्रशासनिक संकलन)। |
| 33 | सोमेश्वर (तृतीय) | 'मानसोल्लास' (राजा के कर्तव्य और मनोरंजन)। |
| 34 | प्रतापरुद्र देव | 'सरस्वतीविलास' (हिंदू विधि और प्रशासन)। |
| 35 | माधवाचार्य | विजयनगर साम्राज्य के प्रशासनिक सूत्रधार। |
| 36 | मित्र मिश्र | 'वीरमित्रोदय' (राजव्यवस्था खंड)। |
| 37 | नीलकण्ठ भट्ट | 'नीति मयूख'। |
| 38 | कमलाकर भट्ट | विधिक और राजनैतिक विमर्श। |
| 39 | अनंतदेव | 'राजधर्मकौस्तुभ'। |
| 40 | विश्वरूप | स्मृति भाष्य में वर्णित राजधर्म। |
| 41 | बाणभट्ट | 'हर्षचरित' (सम्राट के गुण और शासन)। |
| 42 | कल्हण | 'राजतरङ्गिणी' (कश्मीर का राजनीतिक इतिहास)। |
| 43 | जयंत भट्ट | 'न्यायमंजरी' (तर्क और न्याय)। |
| 44 | वाचस्पति मिश्र | विवादचिन्तामणि (आर्थिक न्याय)। |
| 45 | ठक्कुर फेरू | 'द्रव्यपरीक्षा' (मुद्रा विज्ञान/Numismatics)। |
| 46 | बल्लल सेन | 'दानसागर' (सामाजिक आर्थिक प्रबंधन)। |
| 47 | टोडरमल | राजस्व प्रणाली (Revenue System) के संस्कृत व्याख्याता। |
| 48 | भट्टोजि दीक्षित | कानून और व्याकरण का समन्वय। |
| 49 | नारायण पंडित | 'हितोपदेश' (कथाओं के माध्यम से राजनीति)। |
| 50 | विष्णु शर्मा | 'पंचतंत्र' (मित्रभेद, मित्रसंप्राप्ति आदि राजनीतिक सूत्र)। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख शोध/कार्य |
|---|---|---|
| 51 | आर. शामशास्त्री | 'अर्थशास्त्र' की पांडुलिपि के खोजकर्ता और संपादक। |
| 52 | के.पी. जायसवाल | 'Hindu Polity' (भारतीय गणतंत्रवाद के शोधकर्ता)। |
| 53 | पी.वी. काणे | धर्मशास्त्र के इतिहास में राजनीति का विस्तृत विवेचन। |
| 54 | ए.एस. अल्तेकर | 'State and Government in Ancient India'। |
| 55 | यू.एन. घोषाल | 'A History of Indian Political Ideas'। |
| 56 | बी.के. सरकार | प्राचीन भारतीय राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन। |
| 57 | आर.पी. कांगले | 'The Kautilya Arthashastra' (अंग्रेजी अनुवाद और शोध)। |
| 58 | रामशरण शर्मा | 'Aspects of Political Ideas and Institutions'। |
| 59 | डॉ. बी.आर. अम्बेडकर | प्राचीन भारत की शासन व्यवस्था का विधिक विश्लेषण। |
| 60 | गोविंद चंद्र पांडे | भारतीय संस्कृति और राजनीति के मूल्य। |
| 61 | लक्ष्मणशास्त्री जोशी | मराठी और संस्कृत में राजनीतिक विमर्श। |
| 62 | वी.आर. मेहता | भारतीय राजनीतिक चिंतन की नींव। |
| 63 | पी.एन. सेन | 'Hindu Jurisprudence'। |
| 64 | वी.पी. वर्मा | 'Ancient Indian Political Thought'। |
| 65 | बी.ए. सालेटोर | 'Ancient Indian Political Thought and Institutions'। |
| 66 | जे.जे. मेयर | जर्मन भाषा में अर्थशास्त्र का शोध। |
| 67 | थॉमस ट्रॉटमैन | कौटिल्य और अर्थशास्त्र का संरचनात्मक अध्ययन। |
| 68 | अमर्त्य सेन | कौटिल्य के आर्थिक विचारों का आधुनिक संदर्भ। |
| 69 | एस. रामास्वामी | राजनीति और अर्थशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन। |
| 70 | ब्रजेंद्रनाथ सील | प्राचीन भारत के सकारात्मक विज्ञान और अर्थशास्त्र। |
| 71 | के.एम. पणिक्कर | भारतीय कूटनीति का इतिहास। |
| 72 | जे.सी. कुमारप्पा | भारतीय आर्थिक दर्शन। |
| 73 | धर्मपाल | भारतीय शासन और पंचायत व्यवस्था। |
| 74 | एस. रंगराजन | अर्थशास्त्र का आधुनिक अनुवाद (Aditya)। |
| 75 | स्वामी दयानन्द सरस्वती | 'सत्यार्थ प्रकाश' में आदर्श राज्य व्यवस्था। |
| क्रम | विद्वान | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| 76 | महात्मा गांधी | 'हिन्द स्वराज' (नैतिक राजनीति और विकेंद्रीकरण)। |
| 77 | पंडित दीनदयाल उपाध्याय | एकात्म मानववाद (Integral Humanism) और अर्थायाम। |
| 78 | राम मनोहर लोहिया | समाजवादी राजनीति और भारतीय परंपरा। |
| 79 | के. राजाराम | चाणक्य के अर्थशास्त्र पर आधुनिक शोध। |
| 80 | एल.एन. रंगराजन | कौटिल्य का वैज्ञानिक संपादन। |
| 81 | सुभाष काक | प्राचीन भारत के सूचना सिद्धांत और राजनीति। |
| 82 | राजीव मल्होत्रा | भारतीय राजनीति का वैश्विक विमर्श। |
| 83 | बिबेक देबरॉय | महाभारत और पुराणों का आर्थिक व विधिक अनुवाद। |
| 84 | सुब्रमण्यम स्वामी | कौटिल्य के आर्थिक सिद्धांतों का आधुनिक प्रयोग। |
| 85 | एस. जयशंकर | कूटनीति में 'हनुमान' और 'कृष्ण' के सूत्रों का प्रयोग। |
| 86 | प्रो. राधाकृष्णन | चाणक्य नीति के आधुनिक प्रणेता। |
| 87 | डी.डी. कोसंबी | इतिहास और अर्थशास्त्र का भौतिकवादी विश्लेषण। |
| 88 | अनंत सदाशिव अल्तेकर | भारतीय गांव की शासन व्यवस्था। |
| 89 | पी.एन. प्रभु | हिंदू सामाजिक संगठन और प्रशासन। |
| 90 | बलदेव उपाध्याय | संस्कृत साहित्य का राजनीतिक इतिहास। |
| 91 | कपिला वात्स्यायन | कला और राज्य का संबंध। |
| 92 | विद्यानिवास मिश्र | लोक नीति और भारतीयता। |
| 93 | के. संतोषम | प्राचीन भारतीय अर्थशास्त्र शोध। |
| 94 | शशिप्रभा कुमार | वैशेषिक और न्याय की राजनैतिक दृष्टि। |
| 95 | अनिल सील | आधुनिक भारतीय राजनीति का उदय। |
| 96 | पी.बी. गजेंद्रगडकर | प्राचीन न्याय और आधुनिक कानून। |
| 97 | जे.एन. मोहंती | स्वराज का दार्शनिक आधार। |
| 98 | प्रो. रामजी उपाध्याय | प्राचीन भारत की शासन प्रणाली। |
| 99 | अभिराज राजेंद्र मिश्र | आधुनिक संस्कृत में राजनीतिक चेतना। |
| 100 | प्रभुनाथ द्विवेदी | साहित्य और राजनीति का समन्वय। |
राजनीति और अर्थशास्त्र के इन 100 विद्वानों की सूची यह प्रमाणित करती है कि भारत ने 'अर्थ' (Wealth) को कभी धर्म से अलग नहीं माना। **कौटिल्य** ने जहाँ "प्रजासुखे सुखं राज्ञः" (प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है) का मंत्र दिया, वहीं **शुक्राचार्य** और **विदुर** ने नैतिकता को सत्ता का आधार बताया।
आज के भू-राजनैतिक (Geopolitical) परिवेश में भारतीय कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री पुनः इन प्राचीन सूत्रों की ओर लौट रहे हैं। **भगवत दर्शन** का यह प्रयास उन सभी ऋषियों और शोधकर्ताओं को नमन है, जिन्होंने भारत को "सोने की चिड़िया" बनाने वाले आर्थिक और राजनैतिक सिद्धांतों का सृजन किया।

