जड़ी-बूटी: धैर्य और प्रेम की अद्भुत शक्ति
बहुत समय पहले की बात है, एक वृद्ध संन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था। वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी:
संन्यासी ने कुछ सोचा और फिर बोला,
बाघ और महिला की मित्रता
अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी। बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखा। बाघ उसे देखते ही दहाड़ा, महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी।
अगले कुछ दिनों तक यही हुआ, महिला हिम्मत कर के उस बाघ के पास पहुँचती और डर कर वापस चली जाती। महीना बीतते-बीतते बाघ को महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी, और अब वह उसे देख कर सामान्य ही रहता। अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी, और बाघ बड़े चाव से उसे खाता। उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और अब महिला बाघ को थपथपाने भी लगी।
और देखते-देखते एक दिन वो भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया।
संन्यासी का अनूठा पाठ
फिर क्या था, वह बिना देरी किये संन्यासी के पास पहुंची, और बोली,
“बहुत अच्छे।” और ऐसा कहते हुए संन्यासी ने उस बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया।
”अब तुम्हे किसी जड़ी-बूटी की ज़रुरत नहीं है।” संन्यासी मुस्कराते हुए बोला—
"जाओ, जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो।"
महिला संन्यासी की बात समझ गयी, अब उसे उसकी असली जड़ी-बूटी मिल चुकी थी।

