डॉ. मोतीलाल शर्मा (शास्त्री): शतपथ ब्राह्मण के 'विज्ञान-भाष्यकार' और वैदिक विज्ञान के आधुनिक ऋषि
एक विस्तृत शोधपरक और वैज्ञानिक विश्लेषण: वह विद्वान जिसने सिद्ध किया कि 'शतपथ' केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology) का ग्रंथ है (The Scientific Decoder of Vedas)
- 1. प्रस्तावना: वैदिक विज्ञान का सूर्योदय
- 2. जीवन परिचय: चूरू से जयपुर तक
- 3. 'शतपथ ब्राह्मण' का विज्ञान भाष्य: एक क्रांति
- 4. 'विज्ञान भाष्य' क्या है? (Scientific Commentary)
- 5. प्रमुख अवधारणाएं: अग्नि, सोम और यज्ञ
- 6. वैदिक कॉस्मोलॉजी: सृष्टि की उत्पत्ति
- 7. सायण बनाम मोतीलाल: दृष्टिकोण का अंतर
- 8. निष्कर्ष: विज्ञान और अध्यात्म का संगम
आधुनिक काल में वेदों पर कार्य करने वाले कई विद्वान हुए, लेकिन **डॉ. मोतीलाल शर्मा** (जिन्हें **पं. मोतीलाल शास्त्री** के नाम से भी जाना जाता है) का नाम एक विशेष श्रेणी में आता है। उन्होंने वेदों को 'धर्म' या 'इतिहास' की दृष्टि से नहीं, बल्कि शुद्ध **'भौतिक विज्ञान'** (Physics) और **'ब्रह्मांड विज्ञान'** (Cosmology) की दृष्टि से देखा।
उनका सबसे महान योगदान **'शतपथ ब्राह्मण'** (Shatapatha Brahmana) का **'विज्ञान भाष्य'** (Scientific Commentary) है। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण ग्रंथों में वर्णित 'यज्ञ' केवल घी और सामग्री की आहुति नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांड में निरंतर चल रही ऊर्जा (Energy) और पदार्थ (Matter) की अंतर्क्रिया का एक वैज्ञानिक मॉडल है।
| पूरा नाम | डॉ. मोतीलाल शर्मा (पं. मोतीलाल शास्त्री) |
| जन्म तिथि | श्रावण शुक्ल तृतीया, संवत् 1964 (सन् 1908 ई.) |
| निधन | 1960 ई. (52 वर्ष की अल्पायु में) |
| जन्म स्थान | जयपुर, राजस्थान (मूलतः सादुलपुर, चूरू) |
| कर्मभूमि | मानव आश्रम (Manav Ashram), जयपुर |
| गुरु | विद्यावाचस्पति पं. मधुसूदन ओझा |
| महानतम कृति | शतपथ ब्राह्मण विज्ञान भाष्य (कई खंडों में), वेद विज्ञान |
| शोध का विषय | वैदिक विज्ञान (Vedic Science) और सृष्टि विद्या |
2. जीवन परिचय: चूरू से जयपुर तक
डॉ. मोतीलाल शर्मा (1908-1960) का जीवन अल्प लेकिन अत्यंत प्रभावशाली था। वे महान वैदिक विद्वान **पं. मधुसूदन ओझा** के शिष्य थे, जिन्होंने वेदों के विज्ञान पक्ष को खोजने की परंपरा शुरू की थी। डॉ. शर्मा ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और उसे एक संस्थागत रूप दिया।
मानव आश्रम: उन्होंने जयपुर में **'मानव आश्रम'** की स्थापना की, जो वैदिक शोध का एक प्रमुख केंद्र बना। उनका जीवन एक तपस्वी का जीवन था। 1960 में मात्र 52 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन इतने कम समय में उन्होंने इतना विपुल साहित्य रचा जो सामान्य व्यक्ति कई जन्मों में भी नहीं कर सकता।
3. 'शतपथ ब्राह्मण' का विज्ञान भाष्य: एक क्रांति
'शतपथ ब्राह्मण' यजुर्वेद का सबसे महत्वपूर्ण और विशाल ब्राह्मण ग्रंथ है। डॉ. शर्मा ने इस ग्रंथ पर अपना जीवन खपा दिया।
डॉ. शर्मा ने सिद्ध किया कि शतपथ ब्राह्मण में वर्णित 'यज्ञ वेदी' (Altar) का निर्माण, ईंटों की संख्या और अग्नि का चयन—यह सब ब्रह्मांड की संरचना (Cosmic Structure) का गणितीय मॉडल है।
उन्होंने बताया कि:
- अग्नि चयन: सौर ऊर्जा (Solar Energy) के संचय का विज्ञान है।
- इष्टका (ईंटें): सृष्टि के मूलभूत कणों (Fundamental Particles) का प्रतीक हैं।
उनका यह भाष्य कई विशाल खंडों में प्रकाशित है और वैदिक विज्ञान के शोधार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ है।
4. 'विज्ञान भाष्य' क्या है? (Scientific Commentary)
परंपरागत रूप से वेद के तीन अर्थ माने जाते हैं:
1. आधिभौतिक: लौकिक अर्थ (इतिहास/समाज)।
2. आध्यात्मिक: आत्मा और परमात्मा का अर्थ।
3. आधिदैविक: डॉ. शर्मा ने इसे **'वैज्ञानिक अर्थ'** (Scientific Meaning) के रूप में परिभाषित किया।
उनका कहना था कि वेद के मंत्रों में 'देवता' का अर्थ कोई 'व्यक्ति' नहीं, बल्कि **'प्राकृतिक शक्तियां'** (Forces of Nature) हैं।
उदाहरण: 'इंद्र' कोई राजा नहीं, बल्कि वह विद्युत शक्ति (Electrical Energy) या मध्यस्थ शक्ति है जो लोकों को थामे हुए है।
5. प्रमुख अवधारणाएं: अग्नि, सोम और यज्ञ
डॉ. मोतीलाल शर्मा ने वैदिक शब्दों की नई परिभाषाएं दीं जो आधुनिक विज्ञान के बहुत निकट हैं:
- अग्नि (Agni): यह केवल आग नहीं है। यह **'ऊर्जा'** (Energy) है जो हर पदार्थ के केंद्र में है। यह विस्तार का सिद्धांत (Expansion Principle) है।
- सोम (Soma): यह **'पदार्थ'** (Matter) या ईधन है। अग्नि (ऊर्जा) सोम (पदार्थ) को खाती है, जिससे सृष्टि चलती है। यह E=mc² के सिद्धांत का वैदिक रूप है।
- यज्ञ (Yajna): यह 'सृष्टि प्रक्रिया' (Cosmic Process) है। जहाँ भी अग्नि और सोम का मिलन होता है (चाहे वह सूर्य में हो, पेट में पाचन हो, या प्रयोगशाला में), वहां 'यज्ञ' हो रहा है।
6. वैदिक कॉस्मोलॉजी: सृष्टि की उत्पत्ति
डॉ. शर्मा ने **'नासदीय सूक्त'** (सृष्टि उत्पत्ति सूक्त) और शतपथ ब्राह्मण के आधार पर वैदिक कॉस्मोलॉजी का नक्शा खींचा।
मन, प्राण और वाक्: उन्होंने समझाया कि सृष्टि तीन तत्वों से बनी है:
1. **मन (Mind/Code):** सृष्टि का ब्लूप्रिंट।
2. **प्राण (Energy/Life Force):** गतिज शक्ति।
3. **वाक् (Matter/Expression):** पंचमहाभूत।
इन तीनों का वैज्ञानिक विश्लेषण उनकी पुस्तकों का मुख्य विषय है।
7. सायण बनाम मोतीलाल: दृष्टिकोण का अंतर
| विषय | आचार्य सायण (परंपरागत) | डॉ. मोतीलाल शर्मा (वैज्ञानिक) |
|---|---|---|
| उद्देश्य | यज्ञ अनुष्ठान (Ritual). | ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology). |
| 'अश्व' का अर्थ | घोड़ा (पशु)। | व्यापक ऊर्जा (Energy that pervades). |
| 'गो' का अर्थ | गाय। | रश्मि (Rays) या गति। |
| दृष्टि | धार्मिक। | तात्विक (Philosophical/Scientific). |
8. निष्कर्ष: विज्ञान और अध्यात्म का संगम
डॉ. मोतीलाल शर्मा एक मौन साधक थे। उन्होंने प्रसिद्धि की परवाह किए बिना अपना पूरा जीवन वेदों के वैज्ञानिक पक्ष को खोजने में लगा दिया।
आज जब हम **'वैदिक विज्ञान'** (Vedic Science) की बात करते हैं, तो डॉ. मोतीलाल शर्मा का नाम आदर के साथ लिया जाता है। उनके ग्रंथ **'संस्कृति के चार अध्याय'** में रामधारी सिंह दिनकर द्वारा भी प्रशंसित किए गए हैं। वे आधुनिक भारत के **'वैज्ञानिक ऋषि'** थे।
संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)
- शतपथ ब्राह्मण विज्ञान भाष्य - डॉ. मोतीलाल शर्मा (मानव आश्रम, जयपुर)।
- वेदों का वैज्ञानिक अर्थ - डॉ. मोतीलाल शर्मा।
- उपनिषदों का विज्ञान भाष्य - डॉ. मोतीलाल शर्मा।
- संस्कृति के चार अध्याय - रामधारी सिंह दिनकर (डॉ. शर्मा के कार्यों का उल्लेख)।
