लोकमान्य तिलक: गीता रहस्य के प्रणेता, वैदिक खगोलशास्त्री
एक विस्तृत शोधपरक विश्लेषण: वह राजनेता जिसने मांडले जेल की चारदीवारी में वेदों के 'आर्कटिक रहस्य' और गीता के 'कर्मयोग' को खोज निकाला (The Scholar-Politician)
- 1. प्रस्तावना: राजनीतिज्ञ के भीतर छिपा ऋषि
- 2. जीवन परिचय: गणित, कानून और केसरी
- 3. 'द ओरियन': वेदों का काल-निर्धारण (4500 ई.पू.)
- 4. 'आर्कटिक होम इन द वेदास': ध्रुवीय उत्पत्ति का सिद्धांत
- 5. 'गीता रहस्य': कर्मयोग शास्त्र की स्थापना
- 6. शंकराचार्य बनाम तिलक: व्याख्या का अंतर
- 7. गणेश उत्सव और स्वराज्य: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
- 8. निष्कर्ष: आधुनिक भारत के निर्माता
भारतीय इतिहास में बाल गंगाधर तिलक को "भारतीय असंतोष का जनक" (Father of Indian Unrest) कहा जाता है। उन्होंने नारा दिया था—"स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है"। किन्तु, तिलक का व्यक्तित्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वे एक उच्च कोटि के संस्कृत विद्वान, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे।
जब मैक्स मूलर जैसे पश्चिमी विद्वान वेदों का काल 1200 ई.पू. मान रहे थे, तब तिलक ने खगोलीय गणनाओं (Astronomical Calculations) के आधार पर सिद्ध किया कि वेद कम से कम 4000-6000 ई.पू. पुराने हैं। उनका ग्रंथ 'गीता रहस्य', जो उन्होंने मांडले जेल में लिखा, भगवद्गीता की आधुनिक युग की सबसे प्रभावशाली व्याख्या मानी जाती है।
| पूरा नाम | केशव गंगाधर तिलक (लोकमान्य) |
| काल | 23 जुलाई 1856 – 1 अगस्त 1920 |
| जन्म स्थान | रत्नागिरी, महाराष्ट्र (चितपावन ब्राह्मण परिवार) |
| शिक्षा | बी.ए. (गणित), एल.एल.बी. (डेक्कन कॉलेज, पुणे) |
| प्रमुख कृतियाँ (Indology) | 1. The Orion (1893) 2. The Arctic Home in the Vedas (1903) 3. श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य (1915) |
| प्रमुख पत्र | केसरी (मराठी) और मराठा (अंग्रेजी) |
| सिद्धांत | कर्मयोग (Activism), आर्यों का आर्कटिक मूल |
2. जीवन परिचय: गणित, कानून और केसरी
तिलक का जन्म एक विद्वान परिवार में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक और संस्कृत के पंडित थे। तिलक बचपन से ही गणित और संस्कृत में बहुत तेज थे। उन्होंने पुणे के डेक्कन कॉलेज से स्नातक किया। वे चाहते तो सरकारी नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा का मार्ग चुना।
संस्थापक: उन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज और 'न्यू इंग्लिश स्कूल' की स्थापना की ताकि भारतीयों को राष्ट्रीय शिक्षा मिल सके। उन्होंने 'केसरी' और 'मराठा' अखबारों के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ जनमत तैयार किया।
3. 'द ओरियन': वेदों का काल-निर्धारण (4500 ई.पू.)
1893 में तिलक ने अपनी पहली शोधपूर्ण पुस्तक "The Orion" (ओरियन: वेदों की प्राचीनता पर शोध) प्रकाशित की।
तिलक ने तर्क दिया कि वेदों और ब्राह्मण ग्रंथों में नक्षत्रों की स्थिति का जो वर्णन मिलता है, वह केवल कल्पना नहीं है, बल्कि उस समय की आकाश की स्थिति का रिकॉर्ड है।
मुख्य तर्क: ऋग्वेद में वसंत संपात (Vernal Equinox) का वर्णन मृगशिरा (Orion) नक्षत्र में मिलता है। खगोलीय गणना के अनुसार, वसंत संपात मृगशिरा में लगभग 4500 ई.पू. में था।
अतः वेदों का काल कम से कम 4500 ई.पू. होना चाहिए, न कि मैक्स मूलर द्वारा बताया गया 1200 ई.पू.। मैक्स मूलर ने भी इस पुस्तक को पढ़कर तिलक की प्रशंसा की थी।
4. 'आर्कटिक होम इन द वेदास': ध्रुवीय उत्पत्ति का सिद्धांत
1903 में तिलक ने अपनी सबसे क्रांतिकारी पुस्तक "The Arctic Home in the Vedas" प्रकाशित की। इसमें उन्होंने यह विवादास्पद सिद्धांत दिया कि आर्यों का मूल निवास स्थान उत्तरी ध्रुव (Arctic Region) था।
प्रमाण:
1. दीर्घ उषा (Long Dawn): ऋग्वेद में उषा (Dawn) के कई सूक्त हैं जो बताते हैं कि सूर्योदय से पहले की उषाकाल कई दिनों तक चलती थी।
2. दीर्घ दिन-रात: वेदों में "छह महीने का दिन और छह महीने की रात" के संकेत मिलते हैं (जैसे देवयान और पितृयान)।
3. घूमता हुआ आकाश: महाभारत और वेदों में तारों के क्षितिज के समानांतर घूमने का वर्णन है।
तिलक ने निष्कर्ष निकाला कि यह खगोलीय स्थिति केवल उत्तरी ध्रुव पर ही संभव है। हिमयुग (Ice Age) आने के कारण आर्यों को वहां से दक्षिण की ओर प्रवास करना पड़ा।
5. 'गीता रहस्य': कर्मयोग शास्त्र की स्थापना
जब तिलक को 1908 में राजद्रोह के आरोप में 6 साल के लिए बर्मा (म्यांमार) की मांडले जेल भेज दिया गया, तो उन्होंने वहां अपनी सबसे महान कृति "श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य" लिखी।
यह पुस्तक गीता की एक विशाल टीका (Commentary) है। इसमें उन्होंने सिद्ध किया कि गीता का मुख्य संदेश 'संन्यास' (दुनिया छोड़ना) नहीं, बल्कि 'कर्मयोग' (निस्वार्थ कर्म करना) है।
6. शंकराचार्य बनाम तिलक: व्याख्या का अंतर
तिलक ने अपनी व्याख्या में पारंपरिक आचार्यों को चुनौती दी।
| दृष्टिकोण | आदि शंकराचार्य (निवृत्ति मार्ग) | बाल गंगाधर तिलक (प्रवृत्ति मार्ग) |
|---|---|---|
| मुख्य संदेश | ज्ञान और संन्यास (Actionlessness). | निष्काम कर्मयोग (Action). |
| कर्म की भूमिका | कर्म केवल चित्त शुद्धि के लिए है, अंत में इसे छोड़ना पड़ता है। | ज्ञानी पुरुष को भी लोक-संग्रह (समाज कल्याण) के लिए मृत्यु तक कर्म करना चाहिए। |
| लक्ष्य | मोक्ष (व्यक्तिगत मुक्ति)। | मोक्ष + राष्ट्र/समाज का उत्थान। |
तिलक की व्याख्या ने हजारों युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में कूदने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गीता को एक 'धार्मिक पुस्तक' से बदलकर 'क्रांतिकारियों की पुस्तिका' बना दिया।
7. गणेश उत्सव और स्वराज्य: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
तिलक जानते थे कि केवल किताबों से क्रांति नहीं होती। उन्होंने लोगों को जोड़ने के लिए धर्म और संस्कृति का सहारा लिया।
- गणेश उत्सव (1893): उन्होंने गणेश पूजा को घर से निकालकर 'सार्वजनिक महोत्सव' बना दिया, ताकि सभी जातियों के लोग एक मंच पर आ सकें और विचारों का आदान-प्रदान कर सकें।
- शिवाजी जयंती (1895): उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को राष्ट्रीय नायक के रूप में स्थापित किया और युवाओं में वीरता का संचार किया।
8. निष्कर्ष: आधुनिक भारत के निर्माता
महात्मा गांधी ने तिलक को "आधुनिक भारत का निर्माता" (The Maker of Modern India) कहा था। तिलक एक अद्भुत व्यक्तित्व थे—एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में राजनीति का झंडा।
जहाँ मैक्स मूलर और कीथ जैसे विद्वान वेदों को केवल अकादमिक दृष्टि से देखते थे, तिलक ने वेदों और गीता को जीवन जीने और संघर्ष करने का साधन बनाया। उनका 'आर्कटिक होम' सिद्धांत आज भले ही भूवैज्ञानिक दृष्टि से बहस का विषय हो, लेकिन उनकी मेधा (Intellect) और संस्कृत ज्ञान पर कोई संदेह नहीं कर सकता।
संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)
- Srimad Bhagavad Gita Rahasya - B.G. Tilak (English Translation by B.S. Sukthankar).
- The Orion - B.G. Tilak.
- The Arctic Home in the Vedas - B.G. Tilak.
- Lokmanya Tilak: A Biography - Ram Gopal.
