महर्षि अरविंद: वेदों के 'रहस्य' के दृष्टा और अतिमानस के दार्शनिक
एक विस्तृत दार्शनिक और आध्यात्मिक विश्लेषण: वह क्रांतिकारी जिसने वेदों में छिपे 'मनोवैज्ञानिक प्रतीकों' को डिकोड किया और मानवता के दिव्य रूपांतरण (Life Divine) का मार्ग दिखाया (The Seer of the Secret Veda)
- 1. प्रस्तावना: क्रांतिकारी से महर्षि तक की यात्रा
- 2. जीवन परिचय: इंग्लैंड की शिक्षा और अलीपुर जेल
- 3. वेद व्याख्या: सायण और मैक्स मूलर का खंडन
- 4. 'वेद रहस्य': मनोवैज्ञानिक प्रतीकवाद (Psychological Symbolism)
- 5. प्रमुख वैदिक प्रतीक: अग्नि, इंद्र और गाय
- 6. पूर्ण योग (Integral Yoga) और अतिमानस (Supermind)
- 7. 'सावित्री': महाकाव्य और मंत्र
- 8. आध्यात्मिक राष्ट्रवाद: भारत विश्व गुरु
- 9. निष्कर्ष: भविष्य का दर्शन
आधुनिक भारत के ऋषियों में श्री अरविंद (Sri Aurobindo) का स्थान ध्रुव तारे के समान है। उनका जीवन दो पूर्णतः विपरीत धाराओं का संगम है—एक तरफ वे ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने वाले उग्र क्रांतिकारी (Revolutionary) थे, और दूसरी तरफ वे मानवता को देवत्व की ओर ले जाने वाले महायोगी।
इंडोलॉजी के क्षेत्र में उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने वेदों को **"बर्बरों के गीत"** (जैसा पश्चिमी विद्वान मानते थे) या केवल **"यज्ञ-कर्मकांड"** (जैसा सायण मानते थे) मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपनी अंतर्दृष्टि से सिद्ध किया कि वेद आध्यात्मिक अनुभवों का **'गुप्त विज्ञान'** (Esoteric Science) हैं।
| पूरा नाम | अरबिंदो घोष (Aurobindo Ghose) |
| काल | 15 अगस्त 1872 – 5 दिसंबर 1950 |
| जन्म स्थान | कलकत्ता (पश्चिम बंगाल) |
| शिक्षा | कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (इंग्लैंड) - ग्रीक, लैटिन, फ्रेंच में पारंगत |
| तपोभूमि | पांडिचेरी (पुदुच्चेरी) - 1910 से 1950 तक |
| प्रमुख कृतियाँ (वेद) | The Secret of the Veda, Hymns to the Mystic Fire |
| प्रमुख कृतियाँ (दर्शन) | The Life Divine, The Synthesis of Yoga, Savitri (Epic Poem) |
| सहयोगिनी | द मदर (मीरा अल्फासा) |
2. जीवन परिचय: इंग्लैंड की शिक्षा और अलीपुर जेल
श्री अरविंद का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहाँ उनके पिता उन्हें पूरी तरह 'अंग्रेज' बनाना चाहते थे। 7 वर्ष की आयु में उन्हें इंग्लैंड भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने 14 वर्षों तक पश्चिमी साहित्य और भाषाओं का अध्ययन किया। वे ग्रीक और लैटिन के विद्वान बन गए।
भारत वापसी (1893): बड़ौदा नरेश की सेवा में भारत लौटने पर उन्होंने संस्कृत और भारतीय भाषाओं का अध्ययन शुरू किया। वे स्वतंत्रता संग्राम के 'गर्म दल' (Extremists) के नेता बने और 'वंदे मातरम्' पत्र के माध्यम से क्रांति की आग जलाई।
आध्यात्मिक मोड़: 1908 में उन्हें 'अलीपुर बम कांड' में जेल भेज दिया गया। जेल की कालकोठरी में उन्हें भगवान श्री कृष्ण का दर्शन हुआ (वासुदेव सर्वमिति)। वहाँ उन्हें विवेकानंद की सूक्ष्म वाणी ने मार्गदर्शन दिया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने राजनीति त्याग दी और 1910 में पांडिचेरी चले गए, जहाँ उन्होंने 40 वर्षों तक मौन साधना की।
3. वेद व्याख्या: सायण और मैक्स मूलर का खंडन
श्री अरविंद ने वेदों की प्रचलित व्याख्याओं को अपर्याप्त माना। उन्होंने दोनों प्रमुख विचारधाराओं का तार्किक खंडन किया:
| व्याख्याता | दृष्टिकोण | अरविंद की आलोचना |
|---|---|---|
| आचार्य सायण | कर्मकांडीय (Ritualistic)। यज्ञ, पशु, वर्षा के लिए प्रार्थना। | यह वेदों का केवल बाहरी अर्थ है। वेद केवल भौतिक सुख के लिए नहीं हैं। |
| मैक्स मूलर/पश्चिमी विद्वान | प्रकृतिवादी (Naturalistic)। सूर्य, आंधी, आग की पूजा। | यह वेदों को आदिम (Primitive) बनाता है। ऋषि इतने सरल नहीं थे। |
| श्री अरविंद | मनोवैज्ञानिक/आध्यात्मिक (Psychological)। आंतरिक यक़्ज्ञ। | वेद मनुष्य के भीतर चेतना के आरोहण का विज्ञान हैं। |
4. 'वेद रहस्य': मनोवैज्ञानिक प्रतीकवाद (Psychological Symbolism)
श्री अरविंद की पुस्तक "The Secret of the Veda" (वेद रहस्य) इंडोलॉजी में एक मील का पत्थर है। उनका सिद्धांत है कि ऋषियों ने जानबूझकर **"द्वि-अर्थी"** (Double Meaning) भाषा का प्रयोग किया।
- बाहरी अर्थ: आम लोगों के लिए (यज्ञ, गाय, घोड़ा, युद्ध)।
- आंतरिक अर्थ: दीक्षितों (Initiates) के लिए (आध्यात्मिक साधना, ज्ञान, शक्ति, आंतरिक संघर्ष)।
वे कहते हैं कि वेद एक **'कोड भाषा'** (Symbolic Code) में लिखे गए हैं। यदि हम सही चाबी (Key) का प्रयोग करें, तो वेद हमें योग की उच्चतम अवस्थाओं का वर्णन करते हुए मिलते हैं।
5. प्रमुख वैदिक प्रतीक: अग्नि, इंद्र और गाय
श्री अरविंद ने वैदिक शब्दों के आंतरिक अर्थ को इस प्रकार समझाया:
बाहरी अर्थ: भौतिक आग।
आंतरिक अर्थ: मनुष्य के भीतर जलने वाली **'दिव्य इच्छाशक्ति'** (Divine Will) और **'अभीप्सा'** (Aspiration)। यह वह शक्ति है जो हमारी चेतना को ऊपर उठाती है। वह पुरोहित है जो हमारे कर्मों को भगवान तक ले जाता है।
बाहरी अर्थ: वर्षा और वज्र का देवता।
आंतरिक अर्थ: **'शुद्ध मन'** या 'दिव्य मन' (Illumined Mind) का स्वामी। वह वृत्र (अज्ञान) को मारकर प्रकाश की नदियां बहाता है।
वेद में ऋषि हमेशा गायों की चोरी होने और उन्हें वापस लाने की बात करते हैं।
अरविंद का अर्थ: 'गो' का अर्थ संस्कृत में **'प्रकाश'** (Light/Knowledge) भी होता है। पणि (राक्षस) हमारे ज्ञान को चुराकर अचेतना की गुफा में छिपा देते हैं। इंद्र (शुद्ध मन) आकर उस ज्ञान (गायों) को मुक्त कराता है। घोड़ा **'शक्ति'** (Vital Force) का प्रतीक है।
6. पूर्ण योग (Integral Yoga) और अतिमानस (Supermind)
वेदों के आधार पर श्री अरविंद ने अपना दर्शन **'पूर्ण योग'** (Integral Yoga) विकसित किया।
- लक्ष्य: पारंपरिक योग का लक्ष्य संसार छोड़कर मोक्ष (Nirvana) पाना था। अरविंद का लक्ष्य मोक्ष पाकर वापस आना और इस पृथ्वी/शरीर को **'दिव्य'** (Divine) बनाना है।
- अतिमानस (Supermind): यह मन (Mind) से ऊपर की अवस्था है। यह 'सत्य-चेतना' (Truth-Consciousness) है। अरविंद का मानना था कि मनुष्य विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं है। अगला चरण **'अतिमानव'** (Supramental Being) है, जो अज्ञान और मृत्यु से परे होगा।
योग केवल नीचे से ऊपर उठना (Ascent) नहीं है, बल्कि ऊपर की दिव्य शक्ति को नीचे लाना (Descent) है, ताकि पत्थर (जड़ जगत) भी जागृत हो सके।
7. 'सावित्री': महाकाव्य और मंत्र
श्री अरविंद ने अंग्रेजी भाषा का सबसे लंबा महाकाव्य "सावित्री" (Savitri) लिखा। यह महाभारत की कथा (सत्यवान-सावित्री) पर आधारित है, लेकिन इसमें उन्होंने अपने पूरे योग और दर्शन को पिरो दिया है।
यहाँ सावित्री केवल एक पत्नी नहीं, बल्कि **'दिव्य शक्ति'** (Divine Grace) है जो सत्यवान (मानव आत्मा) को मृत्यु (अज्ञान) के चंगुल से छुड़ाकर अमर जीवन देती है। इसे "भविष्य की कविता" (Mantra of the Real) कहा जाता है।
8. आध्यात्मिक राष्ट्रवाद: भारत विश्व गुरु
श्री अरविंद ने राष्ट्रवाद की नई परिभाषा दी। उन्होंने कहा:
"राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है। यह एक 'शक्ति' है, एक 'देवी' (भवानी) है।"
उनका मानना था कि भारत का उत्थान इसलिए जरूरी नहीं है कि हम शक्तिशाली बनें, बल्कि इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत के पास वह **'आध्यात्मिक ज्ञान'** है जो डूबती हुई मानवता को बचा सकता है। "सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है"—यह उनका उद्घोष था।
9. निष्कर्ष: भविष्य का दर्शन
महर्षि अरविंद 20वीं सदी के सबसे मौलिक विचारक थे। उन्होंने विज्ञान और आध्यात्मिकता, पश्चिम के 'विकासवाद' (Evolution) और भारत के 'वेदांत' को एक सूत्र में पिरो दिया।
उन्होंने वेदों को अंधविश्वास के आरोपों से मुक्त किया और उन्हें मनोविज्ञान के सर्वोच्च ग्रंथ के रूप में स्थापित किया। आज ऑरोविले (Auroville) और श्री अरविंद आश्रम उनके इस स्वप्न के प्रतीक हैं कि एक दिन पूरी पृथ्वी पर 'दिव्य जीवन' (Life Divine) उतरेगा।
संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)
- The Secret of the Veda - Sri Aurobindo.
- Hymns to the Mystic Fire - Sri Aurobindo.
- The Life Divine - Sri Aurobindo.
- Sri Aurobindo or The Adventure of Consciousness - Satprem.
