महर्षि पराशर: ज्योतिष शास्त्र के आदि पुरुष और विष्णु पुराण के प्रणेता
(Biographical, Astrological & Spiritual Study)
यस्य वाक्यं जगत्सर्वं व्यासोच्छिष्टं भविष्यति॥" अर्थ: मैं उन महर्षि पराशर को नमस्कार करता हूँ जो संपूर्ण जगत का कल्याण चाहने वाले हैं, और जिनके पुत्र व्यास जी के ज्ञान से यह जगत प्रकाशित है।
भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के इतिहास में महर्षि पराशर (Maharishi Parashara) का स्थान अत्यंत ऊंचा है। वे न केवल महान सप्तर्षि वशिष्ठ के पौत्र हैं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु के अंशावतार महर्षि वेदव्यास के पिता भी हैं। पराशर जी को विश्व के सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ज्योतिष शास्त्र 'बृहत् पराशर होरा शास्त्र' का रचयिता माना जाता है। उन्होंने ही कलयुग के मनुष्यों के लिए 'पराशर स्मृति' जैसे धर्मग्रंथ की रचना की, जो आज भी हमारे धर्म और न्याय का आधार है।
| पिता | महर्षि शक्ति (वशिष्ठ के पुत्र) |
| माता | अदृश्यंती |
| पुत्र | महर्षि वेदव्यास (कृष्ण द्वैपायन) |
| प्रमुख ग्रंथ | बृहत् पराशर होरा शास्त्र, विष्णु पुराण, पराशर स्मृति, कृषि पराशर |
| गुरु / संरक्षक | महर्षि वशिष्ठ (दादा) |
| विशेषता | वैदिक ज्योतिष (फलित ज्योतिष) के जनक |
1. जन्म और वंश: वशिष्ठ के पौत्र
महर्षि पराशर का जन्म अत्यंत संघर्षमयी स्थितियों में हुआ था। उनके पिता शक्ति मुनि को राजा कल्माषपाद (राक्षस भाव में) ने मार दिया था। उस समय पराशर जी अपनी माता अदृश्यंती के गर्भ में ही थे। उनके दादा महर्षि वशिष्ठ ने ही उनका पालन-पोषण किया।
जब पराशर को अपने पिता की हत्या का पता चला, तो उन्होंने राक्षसों के विनाश के लिए 'रक्षोघ्न यज्ञ' प्रारंभ किया। बाद में वशिष्ठ जी और पुलस्त्य ऋषि के समझाने पर उन्होंने क्षमा धर्म को अपनाते हुए उस यज्ञ को समाप्त किया। प्रसन्न होकर पुलस्त्य ऋषि ने उन्हें समस्त शास्त्रों और पुराणों के ज्ञान का वरदान दिया।
2. बृहत् पराशर होरा शास्त्र: ज्योतिष का आधार
आज पूरे विश्व में जिस वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) का अनुसरण किया जाता है, उसका 90% भाग महर्षि पराशर की देन है। उनका ग्रंथ 'बृहत् पराशर होरा शास्त्र' ज्योतिष का 'संविधान' माना जाता है।
- विंशोत्तरी दशा: मनुष्य के जीवन की घटनाओं के समय की गणना करने वाली 'विंशोत्तरी दशा' पराशर जी की ही खोज है।
- षोडशवर्ग: कुण्डली के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए 16 प्रकार के चार्ट्स (वर्ग) का विधान उन्होंने ही दिया।
- ग्रहों के प्रभाव: किस ग्रह का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी सटीक व्याख्या पराशर सूत्रों में मिलती है।
3. विष्णु पुराण और पराशर स्मृति
महर्षि पराशर केवल एक ज्योतिषी नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और न्यायविद् भी थे।
- विष्णु पुराण: अठारह पुराणों में 'विष्णु पुराण' को सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ माना जाता है। इसके मुख्य वक्ता महर्षि पराशर ही हैं। इसमें उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, राजाओं के वंश और भक्ति का अद्भुत वर्णन किया है।
- पराशर स्मृति: प्रत्येक युग के लिए अलग-अलग नियम होते हैं। शास्त्रों के अनुसार सतयुग में मनु की, त्रेता में गौतम की, द्वापर में शंख-लिखित की और कलयुग में 'पराशर स्मृति' की आज्ञा ही सर्वोपरि मानी गई है।
- कृषि पराशर: प्राचीन काल में खेती के विज्ञान, वर्षा की भविष्यवाणी और पशुपालन पर उन्होंने यह विशिष्ट ग्रंथ लिखा था।
4. सत्यवती प्रसंग और वेदव्यास का जन्म
महर्षि पराशर की यात्रा के दौरान उनकी भेंट निषाद कन्या मत्स्यगंधा (सत्यवती) से हुई। पराशर जी ने अपने तपोबल से जान लिया था कि इसी कन्या के गर्भ से एक ऐसी महान आत्मा जन्म लेगी जो वेदों का विभाजन करेगी और महाभारत जैसे ग्रंथ लिखेगी।
यमुना नदी के बीच एक द्वीप पर उनके मिलन से कृष्ण द्वैपायन (वेदव्यास) का जन्म हुआ। पराशर जी के आशीर्वाद से ही सत्यवती के शरीर की गंध 'योजनगंधा' (कोसों दूर तक फैलने वाली सुगंध) में बदल गई थी।
5. निष्कर्ष
महर्षि पराशर का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत दुख (पिता की हत्या) को भुलाकर ज्ञान के सृजन में खुद को समर्पित किया जाता है। वे आकाश के नक्षत्रों से लेकर धरती की खेती तक और मानव के भाग्य से लेकर समाज के कानून तक, हर क्षेत्र के मार्गदर्शक बने। आज भी जब कोई ज्योतिषी किसी की कुण्डली देखता है, तो वह अनजाने में ही महर्षि पराशर की मेधा को नमन कर रहा होता है।
संदर्भ ग्रंथ (References)
- बृहत् पराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर)।
- विष्णु पुराण (प्रथम अंश - पराशर-मैत्रेय संवाद)।
- महाभारत (आदि पर्व - वंशावली)।
- पराशर स्मृति (कलयुग धर्म व्यवस्था)।
- श्रीमद्भागवत पुराण (तृतीय स्कन्ध)।
