हृदय कलश विराजो माता
Deep Meditative Bhajan | Raag Darbari | Spiritual Awakening
"अंतर मन के सूने कोने में, एक लौ जली है मौन में..."
स्वागत है आपका इस आध्यात्मिक यात्रा में। यह भजन मन के भीतर छिपी उस शांति और ज्योति की खोज है, जो हमें स्वयं से और उस ईश्वरीय शक्ति से जोड़ती है।
इस विशेष प्रस्तुति को 'राग दरबारी' (Raag Darbari) की गंभीरता और शास्त्रीय सरगम के साथ तैयार किया गया है, ताकि इसके स्वर आपके हृदय की गहराइयों तक उतर सकें। इसमें देह की माटी और प्राणों के जल से सींचे गए उस भीतरी वन की पुकार है, जहाँ साक्षात माता का वास है।
जब मन लोभ और मोह से मुक्त होकर पूर्णतः समर्पण करता है, तभी ज्ञान का उज्ज्वल प्रकाश फैलता है। आइए, इस संगीतमयी साधना के साथ अपने भीतर की ज्योति जलाएं।
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🎵 भजन के मुख्य विवरण
| गीतकार (Lyrics) | सूरज कृष्ण शास्त्री (Sooraj Krishna Shastri) |
| संगीत शैली (Style) | Hindustani Classical Fusion |
| विषय (Theme) | Devotional / Meditative / Bhakti |
📜 भजन के बोल (Lyrics)
अंतर मन के सूने कोने में, एक लौ जली है मौन में।
देह की माटी प्राणों का जल, सिंचित है अब इस वन में।
हृदय कलश विराजो माता, जीवन ज्योति जगाओ माता।।
अन्तर्मन की ज्योति जला दो, सूने उपवन फूल खिला दो।
अंध तमस को दूर हटा दो, उज्जवल ज्ञान प्रकाशो माता।
हृदय कलश विराजो माता, जीवन ज्योति जगाओ माता।।
लोभ मोह सब नष्ट करो तुम, मुदित भाव अब वास करो तुम।
पुलकित तन मन जीवन कर दो, प्रेम सरस बरसा दो माता।
हृदय कलश विराजो माता, जीवन ज्योति जगाओ माता।।
नैनो के पट खोल दिए हैं, चरण कमल से जोड़ दिए हैं।
तुम ही साक्षी तुम ही सृष्टि, कृपा दृष्टि बरसाओ माता।
हृदय कलश विराजो माता, जीवन ज्योति जगाओ माता।।
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