श्री दुर्गा माता की आरती - जय अम्बे गौरी | Shri Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri

Sooraj Krishna Shastri
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॥ श्री दुर्गा माता की आरती ॥

जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुःखहारी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी । आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ । बाजत ताल मृदङ्गा, और बाजत डमरू ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता । भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी । मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
कञ्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै । कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥

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